चंडीगढ़: शहर में प्लाट मिलना आसान नहीं, भविष्य में फ्लैट ही मिलेंगे, पढ़ें- जनसंख्या वृद्धि पर क्या बोले विशेषज्ञ
चंडीगढ़ में बीते एक एक दशक में आबादी नियंत्रण में है लेकिन संसाधन कम पड़ रहे हैं। सरकारी मशीनरी जनसंख्या के भार से हांफ रही है। अस्पतालों में मरीजों को बेड नहीं मिल रहे। वहीं बच्चों को पढ़ने के लिए मनचाहा स्कूल नहीं मिल पा रहा है। पानी व बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। यानी हालात संसाधनों के दृष्टिकोण से सही नहीं हैं।
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विस्तार
सिटी ब्यूटीफुल में प्लॉट खरीदने का सपना देख रहे हैं तो उसे भूल जाएं। भूले बिसरे बिल्डिंग बायलॉज पर संशोधन हुए तो फ्लैट ही मिलेगा। चंडीगढ़ में जमीन की कमी का आलम ये हैं कि वर्ष 2009 के बाद चंडीगढ़ में न तो प्लॉट का आवंटन हुआ है, न ही नीलामी हुई है। प्रशासन ने जमीन की कमी का हवाला देते हुए संस्थाओं, सोसाइटियों आदि को प्लॉट का आवंटन व नीलामी बंद कर दी है। कम जमीन व स्मार्ट सिटी का तमगा हासिल होने से चंडीगढ़ की जमीन पड़ोसी राज्यों से दोगुनी महंगी है, इसलिए फ्लैट के दाम भी काफी ज्यादा होते हैं।
सिर्फ कुछ ही वर्ग के लोग चंडीगढ़ में घर खरीद पाते हैं। चंडीगढ़ के विभिन्न सेक्टरों, गांव व कालोनियों में जो जमीनें खाली हैं, वह किसी न किसी योजना के लिए आरक्षित हैं। कुछ जमीन आवासीय योजनाओं के लिए आरक्षित हैं तो कुछ डिस्पेंसरी, स्कूल, पार्क, ग्रीन बेल्ट, सरकारी इमारत के लिए।
अधिक जनसंख्या से बढ़ेगा प्रदूषण
जनसंख्या अधिक होगी तो वाहन बढ़ेंगे। इससे प्रदूषण और बढ़ेगा जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा। कूड़ा भी अधिक जनसंख्या होने पर बढ़ेगा। ऐसे में उसका असर भी पर्यावरण पर होगा। बिजली, पानी की खपत अधिक होने से वह भी पर्यावरण को प्रभावित करेगा। ऐसे में जनसंख्या को लेकर जागरूकता फैलाना जरूरी है। लोगों को खुद भी जागरूक होना चाहिए। - डॉ. सुमन मोर, चेयरपर्सन, पर्यावरण अध्ययन विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय
जागरूकता बेहद जरूरी
जनसंख्या अधिक होने से ज्यादा संसाधनों की भी आवश्यकता होगी। ऐसे में लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। कॉलेज की ओर से समय-समय पर अभियान चलाए जाते रहे हैं। आगे भी हम लोगों को जागरूक करेंगे। लोग खुद भी जागें और दूसरों को भी जगाएं। जितनी अधिक जागरूकता होगी उतना अधिक लाभ मिलेगा। -प्रो. अनीता कौशल, प्राचार्य, जीसीजी सेक्टर-11
गांवों को ही शहर बनाना होगा
आबादी चंडीगढ़ की ओर न बढ़े, इसके लिए आसपास के गांवों को ही शहर बनाना होगा। उद्योग स्थापित करने होंगे। अच्छे अस्पताल बनाने होंगे। लोगों को बेहतर शिक्षा मिलेगी तो वह जागरूक होंगे और परिवार छोटा रखेंगे। भारत में चल रहा कौशल विकास कार्यक्रम इस क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहा है। ग्रामीण इलाकों के युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। - प्रो. प्रशांत गौतम, खेल निदेशक, पंजाब विश्वविद्यालय
संसाधनों को बढ़ाना होगा
हांगकांग हो या फिर कोई अन्य देश। वहां जनसंख्या तो बढ़ी लेकिन उसके मुताबिक संसाधन भी बढ़ाए गए। इसके कारण परेशानी नहीं हुई। यहां भी संसाधनों का विस्तार करना जरूरी है। आज के युवा समझदार हो रहे हैं। वह खुद एक बच्चे से अधिक पैदा नहीं करना चाहते। बच्चे हो भी रहे हैं तो शादी के सात से आठ साल में। ऐसे में इसका असर जनसंख्या पर पड़ेगा। -प्रो. सुरेश शर्मा, सांख्यिकीय विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय
आसपास के शहरों को भी चंडीगढ़ जैसा बनाना होगा
चंडीगढ़ की जनसंख्या वाकई कई गुना हो गई है। चंडीगढ़ का पुराना वजूद को बचाना है। अच्छी शिक्षा व मेडिकल सुविधा आसपास के शहरों में रहने वाले लोगों को देनी होगी। साथ ही रोजगार भी मुहैया कराना होगा। इसके अलावा जागरूकता भी लानी होंगी। -प्रो. रोनकी राम, राजनीति विज्ञान, पंजाब विश्वविद्यालय
अगले दस साल में आबादी हो जाएगी कम
आज युवाओं की मानसिकता तेजी से बदली है। वह सहमति संबंध में रहना पसंद कर रहे हैं। अगर शादी भी कर रहे हैं तो आयु 30 पार रह रही है। अक्सर देखाने में आ रहा है कि तमाम युवा शादी करना भी छोड़ रहे हैं, जो शादी कर लेते हैं, वो नौकरी के कारण बच्चे पैदा नहीं करना चाहते। यह असर गांवों तक भी पहुंचेगा। ऐसे में आने वाले 10 साल में आबादी कम होगी। -डॉ. रोशन लाल, मनोविज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय