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Chandigarh News: मांगें मनवाने के लिए मजदूर फिर आंदोलन को तैयार
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मजदूरों के लिए 26,000 रुपये वेतन घोषित करे राज्य सरकार : जय भगवान
श्रम मंत्री मूलचंद शर्मा को लिखा पत्र, मीटिंग का मांगा समय : सुरेखा
चंडीगढ़। प्रदेशभर के मजदूर संगठन विधानसभा चुनावों से पहले एक बार फिर आंदोलन के लिए लामबंद हो रहे हैं। मजदूर संगठनों ने चेताया कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो वे विधानसभा चुनावों में सरकार का खुला विरोध करेंगे। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) हरियाणा की राज्य अध्यक्ष सुरेखा व महासचिव जय भगवान ने कहा कि जल्द ही आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
दोनों मजदूर नेताओं ने कहा कि पिछले करीब 10 साल से हरियाणा में मजदूरों के न्यूनतम वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। कानूनी रूप से प्रत्येक पांच साल में मजदूरों का वेतन रिवाइज किया जाना चाहिए। सीटू नेताओं ने कहा कि मजदूर हितों के लिए बने अलग-अलग बोर्डों में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की बजाय सरकार ने अपने नुमाइदें भर्ती कर रखे हैं, जिनका मजदूर हितों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भवन निर्माण के कारीगर मजदूरों के हित में बने बोर्ड को पंगु बनाकर सुविधाओं पर अघोषित ताला लगा दिया। सीटू के महासचिव जयभगवान ने बताया कि राज्य के श्रम मंत्री मूल चंद शर्मा को मजदूरों की मांगों पर वार्ता के लिए समय देने के लिए पत्र लिखा है। इस पत्र में मांग उठाई कि राज्य में मजदूरों के लिए 26,000 रुपये न्यूनतम वेतन घोषित हो, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए बोर्ड बनें, निर्माण श्रमिकों के लिए बने बोर्ड के तहत सुविधाओं पर अघोषित पाबंदी हटे, भट्टा मजदूरों के लिए लिया बोर्ड पंजीकरण का कार्य अनुभव एक साल की बजाय छह महीने का हो। श्रम विभाग, सेफ्टी एंड हेल्थ में पर्याप्त ऑफिस व स्टाफ की भर्ती हो।
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श्रम मंत्री मूलचंद शर्मा को लिखा पत्र, मीटिंग का मांगा समय : सुरेखा
चंडीगढ़। प्रदेशभर के मजदूर संगठन विधानसभा चुनावों से पहले एक बार फिर आंदोलन के लिए लामबंद हो रहे हैं। मजदूर संगठनों ने चेताया कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो वे विधानसभा चुनावों में सरकार का खुला विरोध करेंगे। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) हरियाणा की राज्य अध्यक्ष सुरेखा व महासचिव जय भगवान ने कहा कि जल्द ही आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
दोनों मजदूर नेताओं ने कहा कि पिछले करीब 10 साल से हरियाणा में मजदूरों के न्यूनतम वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। कानूनी रूप से प्रत्येक पांच साल में मजदूरों का वेतन रिवाइज किया जाना चाहिए। सीटू नेताओं ने कहा कि मजदूर हितों के लिए बने अलग-अलग बोर्डों में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की बजाय सरकार ने अपने नुमाइदें भर्ती कर रखे हैं, जिनका मजदूर हितों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भवन निर्माण के कारीगर मजदूरों के हित में बने बोर्ड को पंगु बनाकर सुविधाओं पर अघोषित ताला लगा दिया। सीटू के महासचिव जयभगवान ने बताया कि राज्य के श्रम मंत्री मूल चंद शर्मा को मजदूरों की मांगों पर वार्ता के लिए समय देने के लिए पत्र लिखा है। इस पत्र में मांग उठाई कि राज्य में मजदूरों के लिए 26,000 रुपये न्यूनतम वेतन घोषित हो, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए बोर्ड बनें, निर्माण श्रमिकों के लिए बने बोर्ड के तहत सुविधाओं पर अघोषित पाबंदी हटे, भट्टा मजदूरों के लिए लिया बोर्ड पंजीकरण का कार्य अनुभव एक साल की बजाय छह महीने का हो। श्रम विभाग, सेफ्टी एंड हेल्थ में पर्याप्त ऑफिस व स्टाफ की भर्ती हो।
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