फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Womens Day, success story of IAS Naajuk Kumar

Womens Day: एसडीएम बोलीं- अफसर 100 में से 10 काम पूरा करें तो बदल सकती है तस्वीर

Sun, 08 Mar 2020 01:10 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 08 Mar 2020 01:10 PM IST
विज्ञापन
Womens Day, success story of IAS Naajuk Kumar
आईएएस नाजुक कुमार - फोटो : अमर उजाला
‘समान शिक्षा व्यवस्था से ही समाज में समानता आएगी। मेरा मानना है कि शहर की कुछ सड़कें भले टूटी रह जाएं, लेकिन शिक्षा व्यवस्था बदहाल नहीं होनी चाहिए। हर किसी को शिक्षा मिलनी चाहिए।’ यह कहना है एसडीएम सेंट्रल आईएएस नाजुक कुमार का। नाजुक कुमार के पिता आईएएस अनिल कुमार (रिटायर्ड) चंडीगढ़ के गृह सचिव रह चुके हैं जबकि पति आईपीएस विनीत कुमार चंडीगढ़ पुलिस में कार्यरत हैं।
विज्ञापन


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नाजुक कुमार ने अमर उजाला से खास बातचीत की। आईएएस अफसर नाजुक कुमार शहर में एसडीएम सेंट्रल के साथ मंडी बोर्ड और इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट का काम भी देख रही हैं। उन्होंने स्कूली पढ़ाई चंडीगढ़ से ही की जबकि आईआईटी दिल्ली से स्नातक किया। इसके बाद कालेज प्लेसमेंट हुई तो एक साल प्राइवेट नौकरी भी की।
विज्ञापन


स्नातक में ही आईएएस की तैयारी शुरू कर दी लेकिन नौकरी के साथ पढ़ाई को पूरा समय नहीं दे पा रही थीं, इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह तैयारी में जुट गईं। वर्ष 2015 में परीक्षा पास कर 2016 में आईएएस बनीं। उन्होंने बताया कि प्राइवेट नौकरी में उन्हें वह संतुष्टि नहीं मिली जो आज सिविल सर्विसेज में मिलती है। बताया कि अलग-अलग विभागों का काम करने का मौका मिलता है तो सीखने को भी बहुत कुछ मिलता है। नाजुक कुमार ने कहा कि अभी हम जिस समाज में रह रहे हैं, उसमें पूरी तरह से समानता नहीं आई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पिता को काम करते देखा हैं, मैं उनके जैसा नहीं बन पाती

नाजुक कुमार ने बताया कि उनके पिता अनिल कुमार का काम करने का तरीका बहुत अलग था। वह एक समय पर कई काम बड़े आराम से कर लेते थे। हमेशा शांत रहते हैं लेकिन मुझसे कभी-कभी नहीं रहा जाता। उनसे हमेशा सकारात्मक एनर्जी मिली है। आईएएस ज्वाइन करने से पहले पता था कि क्या कुछ झेलना पड़ेगा क्योंकि पिता को उन सभी मुसीबतों से गुजरते देखा था। आईएएस के बारे में पॉजीटिव और निगेटिव दोनों सुना था लेकिन ज्वाइन करने के बाद महसूस किया है कि सिविल सर्विसेज के सकारात्मक प्रभाव ज्यादा हैं। हम 100 में से अगर 10 काम भी पूरे करते हैं तो उससे समाज में बदलाव आता है।

चंडीगढ़ में पुलिस ज्यादा, फिर भी सुरक्षित महसूस नहीं करती लड़कियां
नाजुक कुमार ने कहा कि शहर में लड़कियों की सुरक्षा के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में दिन में भी लड़कियां सुरक्षित नही हैं। पार्क और गार्डन सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। फिर भी दिल्ली व अन्य शहरों के मुकाबले शहर बहुत ज्यादा सुरक्षित है।  

लड़की के अधिकार के लिए भिड़ गईं थीं पति से
नाजुक कुमार ने बताया कि कुछ समय पहले एक ऐसा मामला शहर में हुआ, जिस पर उनकी और उनके पति विनीत कुमार की की राय अलग थी। मेरे पति कानून के मुताबिक अपना काम कर रहे थे लेकिन मुझे लगता था कि उस मामले को कानून की नजर के साथ मानवता के नजरिए से भी देखना चाहिए तभी लड़की को उस केस में इंसाफ मिलेगा। कुछ समय तक टकराव बना रहा। अब मुझे लगता है, हम दोनों अपनी जगह सही थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed