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Womens Day: छलांग लगाकर फांद जाते थे दीवार, इस गुरु ने उन्हें बना दिया डांस का 'सिकंदर'

Sun, 08 Mar 2020 02:41 PM IST
खुशबू गोयल नीरज कुमार, चंडीगढ़
नीरज कुमार, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 08 Mar 2020 02:41 PM IST
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Womens Day, success story of A Teacher Sarika, Who Encouraged Students to Make Sikander of Dance
स्कूल टीचर सारिका - फोटो : अमर उजाला
बच्चे शरारती हों या दिशाहीन, इसका यह मतलब नहीं है कि वे कामयाब नहीं हो सकते। राह दिखाने वाला कोई सक्षम गुरु मिल जाए, तो उनकी ‘मस्ती’ उन्हें बुलंदी पर पहुंचा सकती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है चंडीगढ़ निवासी सरकारी स्कूल की शिक्षिका सारिका वर्मा ने।
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हरियाणा शिक्षा कैडर की लेक्चरर सारिका इन दिनों बतौर डेपुटेशन राजकीय मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 19 चंडीगढ़ में तैनात हैं और उनके एक सफल प्रयोग के लिए लिए हरियाणा सरकार उन्हें सम्मानित भी कर चुकी है। सारिका वर्मा बताती हैं कि जब वे पंचकूला के सेक्टर 19 स्कूल में आई (वर्ष 2015 से 2019 तक) थी। तो वे नौवीं से बारहवीं कक्षा को पढ़ाती थी। कुछ ऐसे बच्चे थे, जिनका पढ़ाई में मन कम लगता था।
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कई बच्चे कलाबाजियां करते हुए स्कूल की दीवारें तक फांदकर घर चले जाते थे। उन्हें बच्चों की यही कला देखकर हैरानी होती थी। तभी ये निर्णय लिया कि अब इन्हीं बच्चों पर काम करना है। उनके इस प्रयोग में उनके स्कूल प्राचार्य मोहिंद्र सिंह चौहान व उनके सहयोगी मोनिका दूहन और धीरज कौशिक ने बहुत सहयोग दिया। जबकि उनके पति हेमंत वर्मा (शिक्षाविद) का भी मार्गदर्शन उन्हें मिला।
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कामयाबी ऐसी, जो शिक्षा सारथी के पन्ने पर छपी

Womens Day, success story of A Teacher Sarika, Who Encouraged Students to Make Sikander of Dance
स्कूल टीचर सारिका - फोटो : अमर उजाला
सारिका ने बताया कि उन्होंने आठवीं से बारहवीं कक्षा के इन बच्चों का एक ‘स्टंट डांस’ ग्रुप बना दिया। इस डांस ग्रुप के बच्चों को नाम दिया गया ‘टेरेफिक ब्वॉयज’। अब ये ग्रुप खतरनाक स्टंट के साथ डांस परफोरमेंस देने लगा और देखते ही देखते इस कदर मशहूर हुआ कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में दूसरे स्थान पर रहा। कई और भी सफलताएं इस ग्रुप के नाम रहीं। सरकारी स्कूल का मनीष तो अपने डांस के बूते ‘इंडियाज गोट टैलेंट’ तक पहुंच गया। छात्र सागर भी कई प्रतियोगिताओं में छाया।

उधर, छात्राओं को भी मार्शल आर्ट, बालिका मंच, सांस्कृतिक कार्यक्रम इत्यादि आयोजनों में व्यस्त कर दिया। छात्रों को कंप्यूटर बेस टीचिंग से भी जोड़ दिया गया और कई डाक्यूमेंट्री तैयार कर छात्रों की काउंसलिंग शुरू की गई। सारिका बताती हैं कि इन गतिविधियों से छात्रों में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा हो गई। कामयाबी को इस कदर पहचान मिली कि हरियाणा शिक्षा विभाग की एकमात्र स्टेट एजुकेशनल मैगजीन ‘शिक्षा सारथी’ को इस स्कूल की गतिविधियों को अपने कवर पेज छापना पड़ा।

सारिका के अनुसार उसके बाद उन्होंने एक दिन इन छात्रों की भावुक अंदाज में काउंसलिंग की, जिसमें उन्होंने छात्राें को बताया कि पढ़ाई के मामले में उनके स्कूल का नाम बहुत खराब है, रिजल्ट 19 प्रतिशत तक  रहता है। यदि पढ़ाई अच्छी नहीं हुई, बच्चे पास नहीं हुआ, तो उनकी तमाम अन्य गतिविधियों की चमक भी फीकी पड़ जाएगी। बस, फिर क्या था बच्चों ने पढ़ाई को अन्य गतिविधियों की तरह चुनौती के रूप में लेना शुरू कर दिया। सभी शिक्षकों ने भी इसके लिए बच्चों को मोटिवेट किया।

नतीजतन स्कूल का रिजल्ट सालाना 19 प्रतिशत से लेकर 63 और फिर 80 प्रतिशत से पार चला गया। आज हरियाणा शिक्षा विभाग के लिए ये स्कूल बढ़ते स्कूलों की श्रेणी में शुमार है।
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