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महिला दिवसः घर संभालने के साथ समाजसेवा का जुनून, दूसरों की मदद कर इन्हें मिलता सुकून
Wed, 04 Mar 2020 10:55 AM IST
खुशबू गोयल
रूबी सिंह, चंडीगढ़
रूबी सिंह, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 04 Mar 2020 10:55 AM IST
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अशु शर्मा, गीता सचदेवा, रमा
- फोटो : अमर उजाला
ग्लैमर वर्ल्ड हो या फिर सोशल वर्क। सिटी ब्यूटीफुल की महिलाएं हर चीज में अव्वल हैं। ये महिलाएं शिक्षिकाएं हैं तो कुछ समाज सेविकाएं। किचन में लजीज पकवान बनाने की धनी और गरीब बच्चों एवं महिलाओं की आर्थिक मदद से करने में भी ये सबसे आगे हैं। ये घर संभालने के साथ साथ गरीब बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। आज का वुमन डे स्पेशल वीकेंड की दूसरी कड़ी उन महिलाओं को समर्पित जो घर संभालने के साथ समाज सेवा में भी आगे हैं। इन महिलाओं ने अमर उजाला के साथ अपने अनुभव सांझा किए।
बच्चों को पढ़ाने में मिलता है सुकून
मैं बचपन से ही आर्थिक तौर पर कमजोर बच्चों की मदद के लिए काम करना चाहती थी। शादी से पहले थोड़ा बहुत इस पर काम करती थी। लेकिन शादी के बाद एक निजी स्कूल में एनजीओ के गरीब बच्चों को पढ़ाने का मौका मिला। मैंने इसको सुनते ही तुरंत हां कर दी। बच्चों को पढ़ाना मुझे सुकून देता है। मेरे ख्याल से सभी महिलाओं को समाज के लिए कुछ न कुछ करता रहना चाहिए।
- गीता सचदेवा, शिक्षिका
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बच्चों को पढ़ाने में मिलता है सुकून
मैं बचपन से ही आर्थिक तौर पर कमजोर बच्चों की मदद के लिए काम करना चाहती थी। शादी से पहले थोड़ा बहुत इस पर काम करती थी। लेकिन शादी के बाद एक निजी स्कूल में एनजीओ के गरीब बच्चों को पढ़ाने का मौका मिला। मैंने इसको सुनते ही तुरंत हां कर दी। बच्चों को पढ़ाना मुझे सुकून देता है। मेरे ख्याल से सभी महिलाओं को समाज के लिए कुछ न कुछ करता रहना चाहिए।
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- गीता सचदेवा, शिक्षिका
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जिंदगी सिर्फ अपने लिए नहीं, दूसरे के लिए भी जिएं
मैं हमेशा कोशिश करती थीं कि किसी तरह दूसरों के मदद आ सकूं। चाहे वह बहुत थोड़े स्तर पर हो या फिर बडे़। इसलिए हम सहेलियाें ने एक ग्रुप भी बनाया है जो भजन कीर्तन कर पैसे इकट्ठे करती हैं। उसके साथ हम गरीब मरीजों का इलाज करवाते हैं। यहीं नहीं हम चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली जहां भी गरीब बच्चों एवं महिलाओं की मदद करने का मौका मिलता है, हम सभी एक साथ मिलकर इनकी मदद करते हैं। मेरा मानना है कि जिंदगी को सिर्फ अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए भी जीना चाहिए।
- रमा, सेक्टर-37 निवासी
बच्चों को शिक्षित करने में मिल रही है बेहद खुशी
मैं पहले भी गरीबों की मदद के लिए करना चाहती थीं। लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि कैसे करूं। एक दिन मेरी कुछ सहेलियों ने मुझे एक एनजीओ के बारे में बताया। यहां गरीब बच्चों को पढ़ाने था। बस फिर क्या था, मैंने तुरंत हां कर दी। मैंने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। आज इन्हें पढ़ाकर बेहद खुशी महसूस होती है। मुझे इतना उत्साह रहता है कि मैं लंच बनाने के बाद इन बच्चों के पास पहुंच जाती हूं। मेरे परिवार ने भी मुझे बहुत सहयोग दिया है। वे मेरे इस कार्य को लेकर मुझसे ज्यादा उत्साहित हैं।
- अशु शर्मा, शिक्षिका
सबको करनी चाहिए समाज सेवा
मैं और मेरा परिवार लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते हैं। मुझे तो गरीब बच्चों की मदद के लिए छोटा सा काम करना करना ही बेहद अच्छा लगता है। हम सब को समाज के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए। गरीब बच्चों को पढ़ाकर काफी संतुष्टि मिल रही है। हर सबको समाज की सेवा करनी चाहिए।
- नीतू जयसवाल, शिक्षिका
मैं हमेशा कोशिश करती थीं कि किसी तरह दूसरों के मदद आ सकूं। चाहे वह बहुत थोड़े स्तर पर हो या फिर बडे़। इसलिए हम सहेलियाें ने एक ग्रुप भी बनाया है जो भजन कीर्तन कर पैसे इकट्ठे करती हैं। उसके साथ हम गरीब मरीजों का इलाज करवाते हैं। यहीं नहीं हम चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली जहां भी गरीब बच्चों एवं महिलाओं की मदद करने का मौका मिलता है, हम सभी एक साथ मिलकर इनकी मदद करते हैं। मेरा मानना है कि जिंदगी को सिर्फ अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए भी जीना चाहिए।
- रमा, सेक्टर-37 निवासी
बच्चों को शिक्षित करने में मिल रही है बेहद खुशी
मैं पहले भी गरीबों की मदद के लिए करना चाहती थीं। लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि कैसे करूं। एक दिन मेरी कुछ सहेलियों ने मुझे एक एनजीओ के बारे में बताया। यहां गरीब बच्चों को पढ़ाने था। बस फिर क्या था, मैंने तुरंत हां कर दी। मैंने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। आज इन्हें पढ़ाकर बेहद खुशी महसूस होती है। मुझे इतना उत्साह रहता है कि मैं लंच बनाने के बाद इन बच्चों के पास पहुंच जाती हूं। मेरे परिवार ने भी मुझे बहुत सहयोग दिया है। वे मेरे इस कार्य को लेकर मुझसे ज्यादा उत्साहित हैं।
- अशु शर्मा, शिक्षिका
सबको करनी चाहिए समाज सेवा
मैं और मेरा परिवार लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते हैं। मुझे तो गरीब बच्चों की मदद के लिए छोटा सा काम करना करना ही बेहद अच्छा लगता है। हम सब को समाज के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए। गरीब बच्चों को पढ़ाकर काफी संतुष्टि मिल रही है। हर सबको समाज की सेवा करनी चाहिए।
- नीतू जयसवाल, शिक्षिका