33 फीसदी आरक्षण के फैसले से उड़ान भरेंगी बेटियां, हर साल उच्च शिक्षा में होते दो लाख दाखिले
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब सरकार के सिविल सेवाओं की सीधी भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के फैसले के बाद यहां की बेटियां अब ऊंची उड़ान भर सकेंगी। हर साल उच्च शिक्षा के लिए दो लाख बेटियां पंजाब विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध 196 कॉलेजों में स्नातक और परास्नातक की शिक्षा हासिल कर रही हैं। सरकार के फैसले से इन बेटियों के अफसर बनने की राह आसान हो गई है।
पंजाब राज्य में लड़कियों की साक्षरता दर बढ़ने के साथ ही उच्च शिक्षा का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों को देखें तो सूबे के अधिकांश विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए पंजाब विश्वविद्यालय में प्रवेश लेते हैं। यहां लगभग 16000 छात्र-छात्राओं में से 80 प्रतिशत विद्यार्थी पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। इसके साथ ही पंजाब विवि से संबद्ध 196 कॉलेजों में हर साल उच्च शिक्षा के लिए 3 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं प्रवेश लेते हैं।
इनमें 60 प्रतिशत लड़कियां होती हैं। यानी छात्र 1.20 लाख और छात्राएं 1.80 लाख हैं। प्रदेश की सिविल सेवाओं की सीधी भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के फैसले से सूबे की लाखों की संख्या में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहीं बेटियों के अफसर बनने की राह आसान हो गई है।
10 साल में 71.34 प्रतिशत पहुंची साक्षरता दर
पंजाब में महिलाओं की साक्षरता दर में पिछले 10 साल में काफी सुधार हुआ है। 2011 की जनगणना के अनुसार 71.34 प्रतिशत पंजाब की महिलाएं साक्षर हो चुकी हैं। 2001 में यह महिलाओं में साक्षरता की दर 63.4 प्रतिशत थी। हालांकि पुरुषों की साक्षरता दर 81.48 प्रतिशत है।
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में 20 फीसदी से भी कम लड़कियां कर रही इंजीनियरिंग
सेक्टर- 12 स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर धीरज सांघी ने बताया कि उनके कॉलेज में इंजीनियरिंग कोर्सेज में 20 प्रतिशत से भी कम लड़कियों की भागीदारी है। दो साल पहले फिर भी ये अनुपात 23 प्रतिशत तक था लेकिन दो साल पहले आईआईटी ने लड़कियों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण देना शुरू कर दिया।
इसके साथ ही पिछले साल लड़कियों की इंजीनियरिंग में कम भागीदारी देख एनआईटी ने भी लगभग 17 प्रतिशत लड़कियों के लिए आरक्षण रखा। जिससे वहां लड़कियों का अनुपात थोड़ा ठीक हुआ लेकिन अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में भागीदारी कम ही है। इसका एक बड़ा कारण है कि लड़कियों को 12वीं के बाद जेईई की कोचिंग लड़कों के अनुपात में बहुत कम मिलती है, जिससे वे ज्यादा अच्छे अंक नहीं हासिल कर पातीं। यही अनुपात स्कूल में 12वीं तक अच्छा रहता है, टॉपर्स में लड़कियों का अनुपात लगभग 50 प्रतिशत तक रहता है।
महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा देने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हमेशा प्रयास किए हैं। पंजाब सिविल सेवाएं नियम 2020 की मंजूरी के बाद महिलाओं के लिए सभी सरकारी नौकरियों में इसका लाभ मिलेगा। पंजाब में यह फैसला एतिहासिक है।
- अरुणा चौधरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री, पंजाब
- प्रोफेसर दीप्ति गुप्ता, चेयरपर्सन, डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश, पंजाब यूनिवर्सिटी
पंजाब में बेटियों को रोजगार पाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकार के इस फैसले से पंजाब की खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली छात्राओं के अफसर बनने के सपने पूरे हो पाएंगे। पंजाब में ग्रामीण क्षेत्रों को इस फैसले का पूरा लाभ मिल सकेगा।
- रेनूका बी सलवान, डायरेक्टर, पब्लिक रिलेशन, पीयू
महिला सशक्तीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा यह एक स्वागत योग्य कदम है। महिलाएं एक बेहतर प्रबंधक के रूप में जानी जाती हैं। सरकारी के साथ ही गैर सरकारी क्षेत्रों में भी महिलाएं बेहतर प्रबंधन कर रही हैं।
- जसनूर धवन, लुधियाना, पंजाब
अभी तक देश में महिला सशक्तीकरण को लेकर ऐसा कोई भी फैसला नहीं लिया गया। पंजाब यह पहला ऐसा राज्य होगा, जिसने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए यह फैसला लिया है। सरकार का कदम स्वागत योग्य है।
- सोनाली, फिरोजपुर, पंजाब
हमारा समाज आज भी पितृसत्तात्मक ढांचे के अनुसार चल रहा है। ऐसे में प्रोफेशनल नौकरियां जैसे इंजीनियरिंग इत्यादि में महिलाओं की भागीदारी कम है। महिलाओं के लिए कम समय और कम मेहनत वाली नौकरी को उचित समझा जाता है, जिससे वे परिवार को भी संभाल सकें। महिलाएं आज भी नौकरी के लिए अपने पति की मर्जी पर निर्भर रहती हैं।
- रंजय वर्धान, एचओडी, समाजशास्त्र विभाग, जीसीजी-42
लिंग विशेष भूमिकाओं के कारण महिलाएं पीछे
हमारे समाज में आज भी आदमी की भूमिकाएं लिंग विशेष हैं। महिलाओं को घरेलू और पुरुष पारिवारिक आय के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। इसी कारण महिलाएं शिक्षण, गृह-विज्ञान जैसे कोर्स में ज्यादा हिस्सा लेती हैं। जिससे वे नौकरी के साथ परिवार को भी देख सकें। वहीं, महिलाओं की बजाय पुरुषों की आमदनी को प्राथमिकता दी जाती है, जिसके कारण पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते महिलाएं नौकरी छोड़ भी देती हैं।
- प्रो जगदीश चंद्र मेहता, एचओडी, समाजशास्त्र विभाग, डीएवी-10