{"_id":"64bf3e75d3c0bb3b9c0fce2d","slug":"women-of-chandigarh-will-now-be-fed-rajosh-panjiri-prepared-from-coarse-grains-to-remove-anemia-2023-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh: मोटे अनाज से तैयार पंजीरी महिलाओं में दूर करेगी खून की कमी, PGI में शुरू हुआ शोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh: मोटे अनाज से तैयार पंजीरी महिलाओं में दूर करेगी खून की कमी, PGI में शुरू हुआ शोध
Tue, 25 Jul 2023 08:46 AM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 25 Jul 2023 08:46 AM IST
सार
पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रो.पूनम खन्ना का कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान को लेकर अनदेखी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर रही है। खासतौर पर महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित हैं। इसका मुख्य कारण असमय व असंतुलित भोजन करना है।
विज्ञापन
panjiri
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ की महिलाओं में खून की कमी को दूर करने के लिए अब उन्हें मोटे अनाज से तैयार राजोश पंजीरी खिलाई जाएगी। पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों की देखरेख में इस पर शोध शुरू किया गया है। एनीमिया ग्रस्त महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें विभाग द्वारा तैयार की गई राजोश यानि रागी, ज्वार और शक्कर के मिश्रण वाली पौष्टिक पंजीरी दी जाएगी।
तीन माह बाद होगी जांच
तीन महीने तक पंजीरी का सेवन करने के बाद उन महिलाओं में एनीमिया के स्तर की जांच की जाएगी। परिणाम सकारात्मक आने पर महिलाओं को उस पंजीरी को बनाने का तरीका भी बताया जाएगा जिससे वे खुद के साथ ही अन्य महिलाओं को भी राजोश पंजीरी बनाने का तरीका बता सकें। गौरतलब है कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट में चंडीगढ़ की 15 से 49 साल की 60.3 प्रतिशत महिलाओं को एनीमिया ग्रस्त बताया गया है।
सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रो. पूनम खन्ना, डॉ. विवेक सागर के निर्देशन में शोध छात्रा डॉ. तनु जिंदल ने पहले फेज में सेक्टर- 25 की 30 महिलाओं को पंजीरी वितरित कर दिया है। इसी क्रम में चिह्नित अन्य महिलाओं में भी क्रमवार तरीके से पंजीरी का वितरण किया जाएगा। इस शोध में स्वास्थ्य विभाग का खाद्य सुरक्षा सेल भी सहयोग कर रहा है। आहार विशेषज्ञ डॉ. रचना श्रीवास्तव का कहना है कि मिलेट्स के सेवन से बेहद कम खर्च में शरीर को पौष्टिक आहार की पूर्ति की जा सकती है। इस कारण ही मिलेट्स से तैयार पंजीरी के जरिए एनीमिया पर काबू का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: Punjab Flood: 19 जिलों के 1500 गांव पानी की चपेट पर पंजाब अब तक ‘बाढ़ प्रभावित’ राज्य घोषित नहीं
इन लक्षणों पर करें गौर
कमजोरी, थकान, पीली त्वचा, सांस की तकलीफ, हाइपरटेंशन, बार-बार सिरदर्द होना, चिड़चिड़ा, फटी या लाल जीभ और भूख में कमी।
सामान्य हीमोग्लोबिन स्तर
महिलाएं : 12.1 से 15.1 ग्राम/डीएल
गर्भवती महिलाएं : 11 से 15.1 ग्राम/डीएल
बढ़ाना है खून तो इसका सेवन करें
आयरन- आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे मीट, बीन्स, दाल, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां और सूखे मेवे।
फोलेट-यह पोषक तत्व और इसका सिंथेटिक रूप फोलिक एसिड, फल और फलों के रस, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां, हरी मटर, राजमा, मूंगफली और अनाज प्रोडक्ट्स जैसे रोटी, पास्ता और चावल में पाया जा सकता है।
विटामिन बी 12- विटामिन बी-12 से भरपूर खाद्य पदार्थों में मांस, डेयरी प्रोडक्ट और सोया से बनी चीजें शामिल हैं।
विटामिन सी- विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों में खट्टे फल और जूस, मिर्च, ब्रोकोली, टमाटर, खरबूजे और स्ट्रॉबेरी शामिल हैं।
सर्वे की रिपोर्ट में चंडीगढ़ की स्थिति गंभीर (एनएफएचएस 5)
6 से 59 माह के एनीमिया ग्रस्त बच्चे- 55 प्रतिशत
15 से 49 साल की एनीमिया ग्रस्त महिलाएं- 60.3 प्रतिशत
15 से 19 साल की एनीमिया ग्रस्त किशोरियां- 57.5 प्रतिशत
15 से 49 साल के एनीमिया ग्रस्त पुरुष- 8.1 प्रतिशत
पोषक तत्वों की कमी और गलत आहार बना रहा बीमार
पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रो.पूनम खन्ना का कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान को लेकर अनदेखी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर रही है। खासतौर पर महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित हैं। इसका मुख्य कारण असमय व असंतुलित भोजन करना है। कामकाजी महिलाएं जहां फास्ट फूड व अनियमित खानपान की आदत के कारण एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो रही हैं, वहीं गृहिणी खुद के सेहत की अनदेखी से बीमारियों की चपेट में आ रही हैं। ऐसे में जरूरी है खुद के लिए समय निकालना व संतुलित आहार लेना।
विज्ञापन
तीन माह बाद होगी जांच
तीन महीने तक पंजीरी का सेवन करने के बाद उन महिलाओं में एनीमिया के स्तर की जांच की जाएगी। परिणाम सकारात्मक आने पर महिलाओं को उस पंजीरी को बनाने का तरीका भी बताया जाएगा जिससे वे खुद के साथ ही अन्य महिलाओं को भी राजोश पंजीरी बनाने का तरीका बता सकें। गौरतलब है कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट में चंडीगढ़ की 15 से 49 साल की 60.3 प्रतिशत महिलाओं को एनीमिया ग्रस्त बताया गया है।
विज्ञापन
सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रो. पूनम खन्ना, डॉ. विवेक सागर के निर्देशन में शोध छात्रा डॉ. तनु जिंदल ने पहले फेज में सेक्टर- 25 की 30 महिलाओं को पंजीरी वितरित कर दिया है। इसी क्रम में चिह्नित अन्य महिलाओं में भी क्रमवार तरीके से पंजीरी का वितरण किया जाएगा। इस शोध में स्वास्थ्य विभाग का खाद्य सुरक्षा सेल भी सहयोग कर रहा है। आहार विशेषज्ञ डॉ. रचना श्रीवास्तव का कहना है कि मिलेट्स के सेवन से बेहद कम खर्च में शरीर को पौष्टिक आहार की पूर्ति की जा सकती है। इस कारण ही मिलेट्स से तैयार पंजीरी के जरिए एनीमिया पर काबू का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: Punjab Flood: 19 जिलों के 1500 गांव पानी की चपेट पर पंजाब अब तक ‘बाढ़ प्रभावित’ राज्य घोषित नहीं
इन लक्षणों पर करें गौर
कमजोरी, थकान, पीली त्वचा, सांस की तकलीफ, हाइपरटेंशन, बार-बार सिरदर्द होना, चिड़चिड़ा, फटी या लाल जीभ और भूख में कमी।
सामान्य हीमोग्लोबिन स्तर
महिलाएं : 12.1 से 15.1 ग्राम/डीएल
गर्भवती महिलाएं : 11 से 15.1 ग्राम/डीएल
बढ़ाना है खून तो इसका सेवन करें
आयरन- आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे मीट, बीन्स, दाल, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां और सूखे मेवे।
फोलेट-यह पोषक तत्व और इसका सिंथेटिक रूप फोलिक एसिड, फल और फलों के रस, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां, हरी मटर, राजमा, मूंगफली और अनाज प्रोडक्ट्स जैसे रोटी, पास्ता और चावल में पाया जा सकता है।
विटामिन बी 12- विटामिन बी-12 से भरपूर खाद्य पदार्थों में मांस, डेयरी प्रोडक्ट और सोया से बनी चीजें शामिल हैं।
विटामिन सी- विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों में खट्टे फल और जूस, मिर्च, ब्रोकोली, टमाटर, खरबूजे और स्ट्रॉबेरी शामिल हैं।
सर्वे की रिपोर्ट में चंडीगढ़ की स्थिति गंभीर (एनएफएचएस 5)
6 से 59 माह के एनीमिया ग्रस्त बच्चे- 55 प्रतिशत
15 से 49 साल की एनीमिया ग्रस्त महिलाएं- 60.3 प्रतिशत
15 से 19 साल की एनीमिया ग्रस्त किशोरियां- 57.5 प्रतिशत
15 से 49 साल के एनीमिया ग्रस्त पुरुष- 8.1 प्रतिशत
पोषक तत्वों की कमी और गलत आहार बना रहा बीमार
पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रो.पूनम खन्ना का कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान को लेकर अनदेखी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर रही है। खासतौर पर महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित हैं। इसका मुख्य कारण असमय व असंतुलित भोजन करना है। कामकाजी महिलाएं जहां फास्ट फूड व अनियमित खानपान की आदत के कारण एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो रही हैं, वहीं गृहिणी खुद के सेहत की अनदेखी से बीमारियों की चपेट में आ रही हैं। ऐसे में जरूरी है खुद के लिए समय निकालना व संतुलित आहार लेना।