#MeToo महिला अकाली दल ने किया सीएम आवास का घेराव, मंत्री को बर्खास्त करने की मांग
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‘मीटू’ मामले में पंजाब के एक कैबिनेट मंत्री का नाम आने के बाद गुरुवार को महिला अकाली दल की सदस्यों ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के आवास का घेराव किया। उन्होंने आवास के बाहर मुर्दाबाद के नारे लगाए और मंत्री को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मंत्री को बर्खास्त कर उसके खिलाफ पर्चा दर्ज नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
उल्लेखनीय है कि महिला अकाली दल द्वारा सीएम आवास पर प्रदर्शन के इस अचानक कार्यक्रम की भनक चंडीगढ़ पुलिस को भी नहीं लगी और वह सरकार और मंत्री के खिलाफ नारे लिखीं तख्तियां लेकर वहां पहुंच गईं। सीएम आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन वे इस बात पर अड़ गईं कि जब तक मुख्यमंत्री का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलकर मांग पत्र नहीं लेगा, वे धरने से नहीं उठेंगी। आखिरकार सीएम के ओएसडी ने बाहर आकर मांग पत्र लिया।
इसके बाद महिलाओं ने मंत्री के आवास की ओर जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस मौके पर महिला अकाली दल की नेता हरजिंदर कौर ने कहा कि इस मामले में जरूरी यह था कि मुख्यमंत्री तुरंत कार्रवाई करते और मंत्री को बर्खास्त करके उसके खिलाफ पर्चा दर्ज किया जाता लेकिन सरकार ने इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की।
सुखबीर ने किया ट्वीट
अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने मीटू मामले में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की। इस संबंध में उन्होंने एक ट्वीट भी किया। इसमें उन्होंने लिखा, ‘अभी करें। झुकें नहीं। तुर्की में छुट्टियों की बीच अपने शासित राज्य के लिए समय निकालें।’
मुख्यमंत्री के बयान के बाद अब यह मामला खत्म : वेरका
पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेता और प्रवक्ता राजकुमार वेरका ने सूबे के एक मंत्री और एक महिला अधिकारी के बीच उठे विवाद को गंभीर माना। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कार्रवाई कर चुके हैं और इससे महिला अधिकारी भी संतुष्ट हैं। ऐसे में यह पूरा मामला अब समाप्त हो चुका है।
वेरका ने कहा कि यह प्रकरण चार-पांच हफ्ते पुराना है। मुख्यमंत्री द्वारा मामला सुलझाने के बाद न तो महिला अधिकारी ने कोई मुद्दा उठाया है और न ही संबंधित मंत्री के खिलाफ कोई शिकायत मिली है। ऐसे में मंत्री के खिलाफ भविष्य में किसी कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता।