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ब्रेस्ट कैंसर के बारे में ये नहीं जानती होंगी महिलाएं

Sat, 13 Sep 2014 01:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 13 Sep 2014 01:55 PM IST
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Womans, Know Here about Breast Cancer

महिलाओं में कैंसर जनित रोगों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इनमें मुख्य रूप से ब्रेस्ट, सरवाइकल, ओवेरियन और गर्भाश्य कैंसर शामिल हैं। जागरूक नहीं होने के कारण अक्सर महिलाएं इन रोगों के संपर्क में आ जाती हैं।

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यदि समय-समय पर महिलाएं चेकअप कराती रहे तो इन बीमारियों से आसानी बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कैंसर, उसकी जांच और निदान के बारे में।

ब्रेस्ट कैंसर:
ब्रेस्ट कैंसर के तीन प्रमुख कारण हैं जींस, एनवायर्नमेंट और लाइफस्टाइल। ये तीन कारक मिलकर कैंसर की आशंका बढ़ाते हैं। 100 में से दस मामलों में ही अनुवांशिकता काम करती है। एक अध्ययन के मुताबिक 2015 तक ब्रेस्ट कैंसर के ढाई लाख नए केस आ चुके होंगे।

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देखे ये बदलाव तो नहीं

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  • ब्रेस्ट या निपल के साइज में कोई असामान्य बदलाव।
  • कहीं कोई गांठ (चाहे मूंग की दाल के बराबर ही क्यों न हो) जिसमें अक्सर दर्द न रहता हो। ब्रेस्ट कैंसर में शुरुआत में आमतौर पर गांठ में दर्द नहीं होता।
  • कहीं भी स्किन में सूजन, लाली, खिंचाव या गड्ढे पड़ना, संतरे के छिलके की तरह छोटे-छोटे छेद या दाने बनना।
  • एक ब्रेस्ट पर खून की नलियां ज्यादा साफ दिखना
  • ब्रेस्ट में कहीं भी लगातार दर्द
  • नोट-जब ऐसे बदलाव आए तो अपने डाक्टर को जरूर दिखाएं। 90 पर्सेंट गांठें कैंसर रहित होती हैं।

ऐसे करवाएं जांच

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-40 साल की उम्र में एक बार और फिर हर दो साल में मेमोग्राफी करवानी चाहिए ताकि शुरुआती स्टेज में ही ब्रेस्ट कैंसर का पता लग सके।
-ब्रेस्ट स्क्रीनिंग के लिए एमआरआई और अल्ट्रासोनोग्राफी भी की जाती है। इनसे पता लगता है कि कैंसर कहीं शरीर के दूसरे हिस्सों में तो नहीं फैल रहा।
- एफएनएसी से भी जांच की जाती है। इसमें किसी ठोस गांठ की जांच सूई से वहां के सेल्स निकालकर की जाती है। ट्यूमर कैसा है, इसकी जांच के लिए यह टेस्ट किया जाता है।

जागरूकता जरूरी
ब्रेस्ट कैंसर के 50 फीसदी मरीजों को इलाज करवाने का मौका ही नहीं मिल पाता। कैंसर के सफल इलाज का एकमात्र सूत्र है - जल्द पहचान। जितनी शुरुआती अवस्था में कैंसर की पहचान होगी, इलाज उतना ही सरल, सस्ता, छोटा और सफल होगा।

इसकी पहचान के बारे में अगर लोग जागरूक हों, अपनी जांच नियमित समय पर खुद करें तो मशीनी जांचों से पहले ही बीमारी के होने का अंदाजा हो सकता है।

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सरवाइकल कैंसर के बारे में जानिए

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इसे बच्चादानी, गर्भाश्य या फिर यूट्राइन सर्विक्स कैंसर भी कहा जाता है। गर्भाशय के ऊपरी हिस्से को इंडो सर्विक्स और निचले हिस्से को एक्टोसर्विक्स कहते हैं। इसका मुख्य कारण ह्यूमन पैपीलोमा वायरस (एचपीवी ) होता है।

एक से अधिक पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाने वाली किसी भी महिला में सरवाइकल कैंसर की संभावना 50 फीसदी देखी गई है। इसीलिए संक्रमण को एसटीडी यानी सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज भी माना गया है।

बीमारी के लक्षण

योनि से सफेद बदबूदार पानी का रिसाव। यह ल्यूकीमिया भी हो सकता है, इसके बावजूद स्क्रीनिंग के बाद पैप स्मीयर जांच कराएं। संभोग के बाद अधिक मात्र में रक्तस्राव या फिर तेज दर्द। मीनोपॉज के बाद भी शारीरिक संबंध बनाने पर खून का रिसाव। भूख और अधिक वजन घटना भी प्रमुख लक्षण है।
(लेखिका मैक्स सुपर स्पेशलिटी मोहाली की सीनियर कंसलटेंट गायनी हैं)

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