राशन-बिजली को तरसता परिवार, अब विधवा पेंशन भी हुई बंद, जान देने पहुंची महिला
सरकारी योजनाओं का हाल बेहाल है। जरूरतमंदों को भी इनका लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। इन्हीं सबसे ऊब कर एक विधवा आत्महत्या करने को मजबूर है। पंजाब के अबोहर में सड़क के किनारे बिना बिजली की झोपड़ी में एक विधवा महिला मेहनत मजदूरी करके अपने तीन नाबालिग बच्चों और बुजुर्ग सास का पालन-पोषण कर रही है।
कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद भी उसे आटा-दाल योजना में शामिल नहीं किया गया। इतना ही नहीं पिछले कुछ महीनों से जब सरकार ने विधवा पेंशन भी बंद कर दी तो दुखी होकर महिला शनिवार को गांव डंगरखेड़ा के सामने ट्रेन से कटकर आत्महत्या करने के लिए पहुंच गई। मौके पर पहुंचे लोगों ने उसे बड़ी मुश्किल से रेल लाइन से उठाया। घटना का पता चलते ही नर सेवा संस्था के प्रधान राजू चराया ने उसे यथा संभव सहायता मुहैया कराई।
ग्राम पंचायत ढाणी डंडेवाली निवासी बलविंद्र बाई पत्नी स्व. कश्मीर सिंह ने बताया कि वह शुरू से ही झोपड़ी में रह रही है। सरकार ने न तो उसे बिजली की सुविधा दी और न ही उसके नीले कार्ड बनाए। वह मजदूरी करके 12 वर्ष के बेटे सुखचैन, 10 वर्ष के गुरदास, 8 वर्ष की बेटी गोगा बाई, बुजुर्ग सास का पालन पोषण करती है।
नीले कार्ड के लिए ई बार फार्म भरवाए गए। इसके बाद भी उसे इस योजना का लाभ नहीं मिला। वहीं पिछले कुछ महीनों से उसकी विधवा पेंशन भी जारी नहीं हुई। दो बेटों, एक बेटी व सास के साथ बड़ी मुश्किल से जीवन यापन करने वाली बलविंद्र बाई गरीबी से इतनी परेशान हो गई कि शनिवार को उसने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। लेकिन मौके पर पहुंचे संवाददाता सहित कुछ अन्य लोगों ने उसे मौत के मुंह से निकाल लिया। उसका छोटा बेटा भी उसे बचाने का प्रयास कर रहा था।
मामले की सूचना मिलते ही नर सेवा संस्था के प्रधान राजू चराया ने उसकी झोपड़ी में पहुंच कर उसे यथा संभव सहायता दी। वहीं ढाणी डंडेवाली के सरपंच कर्मजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने बलविंद्र बाई की झोपड़ी तक बिजली के खंभे लगवा दिए और शीघ्र ही वहां लाइट शुरू हो जाएगी। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद नीले कार्ड की जगह स्मार्ट कार्ड बनाने का अभियान भी बलविंद्र बाई के घर से ही शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि बलविंद्र के साथ अन्य परिवारों को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।