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महिला चिकित्सक पर रिश्वत लेने का आरोप
अमर उजाला/ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 05 Oct 2014 12:39 AM IST
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कुरुक्षेत्र। दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति ने एलएनजेपी की महिला चिकित्सक पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। मरीज का आरोप है कि डॉक्टर ने उपचार के एवज में पांच हजार रुपये मांगे थे, लेकिन बाद में उसने तीन हजार रुपये ही दिए। इस मामले का खुलासा पीड़ित व्यक्ति ने कार्यकारी एमएस को दी लिखित शिकायत में किया है।
शिवकुमार ने बताया कि आठ अगस्त को सड़क हादसे में पैर के अंगूठे पर चोट आई थी और इसी दिन वह एलएनजेपी में भरती हुआ। 13 अगस्त तक उसका उपचार नहीं हुआ, जबकि इस दिन डॉक्टरों ने उसका आपरेशन करने की बात कही थी। मरीज ने बताया कि उपचार न होने से उसके पैर का अंगूठा काला पड़ गया था। उसने आरोप लगाया कि डॉ. बिमला गौरी ने अंगूठे को ऊपर से काट दिया, लेकिन जख्म ठीक नहीं हुआ।
इसके बारे में जानकारी देने पर डॉ. गौरी ने 12 सितंबर को सर्जरी कराने को कहा और दूसरे डाक्टर के माध्यम से 5 हजार रुपये मांगे, लेकिन उसने 3 हजार रुपये दिए। शिव ने बताया कि इसके बाद उसे बिना उपचार के 18 सितंबर को चंडीगढ़ रेफर कर दिया। पीड़ित के अनुसार कार्यकारी एमएस डॉ. सुरेंद्र राणा को उसने 29 सितंबर को बिमला गौरी के खिलाफ शिकायत दी। शिकायत पर अधिकारी द्वारा 3322 नंबर भी लगाया गया।
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शिवकुमार ने मेडिकल सुपरिटेडेंट को दी लिखित शिकायत में लिखा है कि डाक्टरों ने इलाज के नाम पर पैसे लिए है और अब उसका उपचार भी नहीं किया जा रहा। शिव कुमार ने डॉ. बिमला गौरी के खिलाफ कार्रवाई करने और उसके पैसे भी वापस दिलाने की मांग की है।
इस संबंध में डा. बिमला गौरी ने फोन पर बताया कि उन पर लगाया जा रहा आरोप निराधार है। उन्होंने कहा कि अभी वे आउट ऑफ स्टेशन है, वापस लौट कर ही बात कर पाएंगी।
एमएस डॉ. सुरेंद्र राणा ने बताया कि उन्होंने यह शिकायत प्राप्त कर नियमित मेडिकल सुपरिटेडेंट को मार्क कर दी है। कार्यकारी एमएस होने के नाते उन्होंने शिकायत ले ली थी, अब अगली कार्रवाई अस्पताल में तैनात अधिकारी के हाथ में हैं।
मंगलवार को हो सकती है कार्रवाई : एमएस
मेडिकल सुपरिटेडेंट डॉ. मुकेश ने कहा कि अभी यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। शेड्यूल व्यस्त और छुट्टियां होने के कारण उन्हें इस बारे में पता नहीं चला। कार्यालय पहुंचकर वे शिकायत देखेंगे। उन्होंने कहा कि मंगलवार को इस मामले पर कार्रवाई हो सकती है।
निष्पक्षता से जांच के बाद होेगी कार्रवाई : सीएमओ
सिविल सर्जन डा. जेएस ग्रेवाल ने कहा कि मामले की निष्पक्षता से जांच होगी। सरकारी अस्पताल में उपचार के बदले रुपये लेना गैर कानूनी है और यदि ऐसा हुआ है, तो कार्रवाई जरुर की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यदि मरीज सीधा उनके पास आता, तो वे तभी कार्रवाई कर देते।
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शिवकुमार ने बताया कि आठ अगस्त को सड़क हादसे में पैर के अंगूठे पर चोट आई थी और इसी दिन वह एलएनजेपी में भरती हुआ। 13 अगस्त तक उसका उपचार नहीं हुआ, जबकि इस दिन डॉक्टरों ने उसका आपरेशन करने की बात कही थी। मरीज ने बताया कि उपचार न होने से उसके पैर का अंगूठा काला पड़ गया था। उसने आरोप लगाया कि डॉ. बिमला गौरी ने अंगूठे को ऊपर से काट दिया, लेकिन जख्म ठीक नहीं हुआ।
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इसके बारे में जानकारी देने पर डॉ. गौरी ने 12 सितंबर को सर्जरी कराने को कहा और दूसरे डाक्टर के माध्यम से 5 हजार रुपये मांगे, लेकिन उसने 3 हजार रुपये दिए। शिव ने बताया कि इसके बाद उसे बिना उपचार के 18 सितंबर को चंडीगढ़ रेफर कर दिया। पीड़ित के अनुसार कार्यकारी एमएस डॉ. सुरेंद्र राणा को उसने 29 सितंबर को बिमला गौरी के खिलाफ शिकायत दी। शिकायत पर अधिकारी द्वारा 3322 नंबर भी लगाया गया।
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शिवकुमार ने मेडिकल सुपरिटेडेंट को दी लिखित शिकायत में लिखा है कि डाक्टरों ने इलाज के नाम पर पैसे लिए है और अब उसका उपचार भी नहीं किया जा रहा। शिव कुमार ने डॉ. बिमला गौरी के खिलाफ कार्रवाई करने और उसके पैसे भी वापस दिलाने की मांग की है।
इस संबंध में डा. बिमला गौरी ने फोन पर बताया कि उन पर लगाया जा रहा आरोप निराधार है। उन्होंने कहा कि अभी वे आउट ऑफ स्टेशन है, वापस लौट कर ही बात कर पाएंगी।
एमएस डॉ. सुरेंद्र राणा ने बताया कि उन्होंने यह शिकायत प्राप्त कर नियमित मेडिकल सुपरिटेडेंट को मार्क कर दी है। कार्यकारी एमएस होने के नाते उन्होंने शिकायत ले ली थी, अब अगली कार्रवाई अस्पताल में तैनात अधिकारी के हाथ में हैं।
मंगलवार को हो सकती है कार्रवाई : एमएस
मेडिकल सुपरिटेडेंट डॉ. मुकेश ने कहा कि अभी यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। शेड्यूल व्यस्त और छुट्टियां होने के कारण उन्हें इस बारे में पता नहीं चला। कार्यालय पहुंचकर वे शिकायत देखेंगे। उन्होंने कहा कि मंगलवार को इस मामले पर कार्रवाई हो सकती है।
निष्पक्षता से जांच के बाद होेगी कार्रवाई : सीएमओ
सिविल सर्जन डा. जेएस ग्रेवाल ने कहा कि मामले की निष्पक्षता से जांच होगी। सरकारी अस्पताल में उपचार के बदले रुपये लेना गैर कानूनी है और यदि ऐसा हुआ है, तो कार्रवाई जरुर की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यदि मरीज सीधा उनके पास आता, तो वे तभी कार्रवाई कर देते।