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Chandigarh News: महिला कांस्टेबल के बेटे ने दुनिया के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत पर फहराया तिरंगा
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चंडीगढ़। शहर के एक पुलिस कांस्टेबल के बेटे ने दुनिया के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत को रिकॉर्ड 22 घंटे में फतह कर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ सेक्टर-26 के अंकित मलिक उर्फ टाइगर अब उन चुनिंदा भारतीयों में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची उहुरू चोटी पर तिरंगा लहराया है। अंकित के नाम इससे पहले 1070 किमी दौड़ने और अकेले चंडीगढ़ से कन्याकुमारी तक साइकिल चलाने की उपलब्धि दर्ज है।मजबूत इरादे के साथ दक्षिण अफ्रीका के किलिमंजारो पर्वत की सबसे ऊंची चोटी उहुरू (5895 मीटर) पर तिरंगा लहराकर अंकित ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं। अंकित 22 अप्रैल को शहर से दक्षिण अफ्रीका के लिए निकले थे और वह अभी वहीं पर हैं। उन्होंने फोन पर अमर उजाला को बताया कि उहुरू चोटी पर चढ़ना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। लगातार बर्फबारी हो रही थी और अन्य पस्थितियां भी ठीक नहीं थीं लेकिन महीनों की ट्रेनिंग काम आई और उन्होंने 22 घंटे में चढ़ाई पूरी की है।
28 साल के अंकित सेक्टर-39 थाने में तैनात दीपक कुमारी के बेटे हैं। उन्होंने पिछले साल 16 अक्तूबर को माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर तिरंगा फहराया था। अंकित ने कहा कि उनकी प्रेरणा उनके परिजन हैं, जो हमेशा नई चीजें करने की प्रेरणा देते हैं। कहा कि काम के बीच हमें अपनी फिटनेस के लिए अवश्य समय निकालना चाहिए।
1070 किमी का रेगिस्तानी सफर दौड़कर किया था पूरा
इससे पहले अंकित ने 18 दिन में 1070 किमी का रेगिस्तानी सफर दौड़ लगाकर पूरा किया था। यह सफर उन्होंने सूरतगढ़ से पाकिस्तान और भारत की सीमा पर स्थित नडाबेट तक का किया था। उन्होंने बताया कि रेगिस्तान में दौड़ लगाना खतरे से खाली नहीं था। बावजूद इसके वह रोजाना 50 से 60 किलोमीटर का सफर दौड़ते थे। वहीं, वर्ष 2021 में उन्होंने चंडीगढ़ से कन्याकुमारी तक का 3200 किमी लंबा सफर लगभग दो सप्ताह में अकेले ही साइकिल से तय किया था। अंकित ने बताया कि उन्होंने स्कूल के दिनों से ही शारीरिक अभ्यास शुरू कर दिया था। बॉडी बनाने के शौक के चलते वह अपनी फिटनेस पर खास ध्यान देते हैं। उन्होंने बताया कि वह खुद एक फिटनेस ट्रेनर भी हैं।
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28 साल के अंकित सेक्टर-39 थाने में तैनात दीपक कुमारी के बेटे हैं। उन्होंने पिछले साल 16 अक्तूबर को माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर तिरंगा फहराया था। अंकित ने कहा कि उनकी प्रेरणा उनके परिजन हैं, जो हमेशा नई चीजें करने की प्रेरणा देते हैं। कहा कि काम के बीच हमें अपनी फिटनेस के लिए अवश्य समय निकालना चाहिए।
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1070 किमी का रेगिस्तानी सफर दौड़कर किया था पूरा
इससे पहले अंकित ने 18 दिन में 1070 किमी का रेगिस्तानी सफर दौड़ लगाकर पूरा किया था। यह सफर उन्होंने सूरतगढ़ से पाकिस्तान और भारत की सीमा पर स्थित नडाबेट तक का किया था। उन्होंने बताया कि रेगिस्तान में दौड़ लगाना खतरे से खाली नहीं था। बावजूद इसके वह रोजाना 50 से 60 किलोमीटर का सफर दौड़ते थे। वहीं, वर्ष 2021 में उन्होंने चंडीगढ़ से कन्याकुमारी तक का 3200 किमी लंबा सफर लगभग दो सप्ताह में अकेले ही साइकिल से तय किया था। अंकित ने बताया कि उन्होंने स्कूल के दिनों से ही शारीरिक अभ्यास शुरू कर दिया था। बॉडी बनाने के शौक के चलते वह अपनी फिटनेस पर खास ध्यान देते हैं। उन्होंने बताया कि वह खुद एक फिटनेस ट्रेनर भी हैं।
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