‘बिना दिमाग लगाए बना दिया मास्टर प्लान, जेब भरना चाहते हैं..’
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के मास्टर प्लान में अपार्टमेंट के प्रावधान और एक प्लाट को तीन यूनिट में बांटने वाली नीति स्पष्ट न होने के मामले में दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को खरी-खरी सुनाई।
हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ का मास्टर प्लान ऐसा है कि शहर के हर परिवार को कोर्ट के दरवाजे पर लाकर खड़ा कर देगा। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना इंफ्रास्ट्रक्चर को देखे कैसे इस प्रकार का फैसला ले लिया गया।
एक प्लाट के अनुसार पार्किंग सुविधा है और सीवरेज भी इसी के अनुरूप है तो कैसे तीन परिवारों के अनुरूप इसे ढाला जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अफसर क्लर्कों पर निर्भर रहना छोड़कर अपना दिमाग चलाएं, बिना दिमाग लगाए मास्टर प्लान बनाने से अच्छा होता कि यदि कोई बात समझ नहीं आ रही थी तो दूसरे स्थानों के मास्टर प्लान को देखकर समझ लेते।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए एसोसिएशन ने कहा कि चंडीगढ़ का मास्टर प्लान बनाते हुए एक बड़ी गलती की गई है। चंडीगढ़ को तीन फेज में बांटा गया है और इनमें से कुछ एरिया में अपार्टमेंट का प्रावधान किया गया है।
याची ने कहा कि जब चंडीगढ़ में अपार्टमेंट रूल ही नहीं हैं और ऐसा कोई एक्ट ही नहीं है तो कैसे मास्टर प्लान में अपार्टमेंट को शामिल किया जा सकता है। याची ने बताया कि चंडीगढ़ ने 2001 में अपार्टमेंट रूल अपनाए थे परंतु 2007 में इन्हें सर्कुलर के माध्यम से समाप्त कर दिया गया था। वर्तमान में एक इमारत एक परिवार के लिए का प्रावधान है।
'प्रॉपर्टी का हिस्सा बेचने का अधिकार, पर प्लॉट का बंटवारा संभव नहीं.. क्यों'
हाईकोर्ट ने इस पर याची से पूछा कि जब ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट एक इमारत में एक से अधिक परिवारों की अनुमति देता है तो इसमें याची को क्या आपत्ति है।
याची की ओर से अनुरोध किया गया कि इस मामले में यूटी प्रशासन को उनका पक्ष रखने को कहा जाए। यूटी प्रशासन ने कहा कि उनका इस बारे में जवाब तैयार है, लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों के प्लान इसमें संलग्न करने हैं। इसके लिए कुछ समय दिया जाए। हाईकोर्ट ने इस अपील को मंजूर करते हुए सुनवाई 16 जनवरी तक के लिए टाल दी।
प्रॉपर्टी का हिस्सा बेचने का अधिकार, पर प्लॉट का बंटवारा संभव नहीं क्यों
हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि यदि एक प्लाट के तीन फ्लोर हैं और एक भाई को पैसे की जरूरत है और दूसरे के पास उसे देने के लिए नहीं है। ऐसे में वह इसको बेच तो सकता है लेकिन कोई दूसरा इसका कब्जा तब तक नहीं ले सकता जब तक बंटवारा न हो।
चंडीगढ़ प्रशासन यूनिट के बंटवारे की अनुमति नहीं देता है। यह कैसी स्थिति है कि कोई अपनी जरूरत के लिए अपनी संपत्ति तक का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की दुविधा पैदा की गई है कि शहर के हर परिवार को कोर्ट आने को मजबूर कर दिया जाएगा।
यूटी की पॉलिसी में विरोधाभास
हाईकोर्ट ने इसकेसाथ ही लीज होल्ड प्रॉपर्टी को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक ओर लीज होल्ड प्रॉपर्टी की सेल के लिए नियम अलग हैं और दूसरी ओर सीधे तौर पर सेल के लिए एनओसी जारी की जा रही है।
अपनी ही पॉलिसी में प्रशासन ने विरोधाभास पैदा किए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि अपना हिस्सा बेचना अधिकार है और यदि इसको लेकर स्थिति स्पष्ट करनी है तो ऐसी स्थिति में स्पष्ट नीति सबसे ज्यादा जरूरी है।