रामदेव ने क्यों ठुकराया मंत्री पद, जानिए अंदर की बात
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आखिर वही हुआ, जिसका अनुमान पहले से था। बाबा रामदेव ने हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री का दर्जा लेने से इंकार कर दिया। इसके पीछे बाबा भले ही तर्क दे रहे हों कि वे फकीर हैं, उन्हें बाबा ही रहनें दे।
लेकिन इसके पीछे अंदर की बात कुछ और ही बातों की ओर इशारा कर रही है। हरियाणा सरकार ने जबसे योग गुरु बाबा रामदेव को ब्रांड अंबेसडर के साथ कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने की बात कही थी, तभी से उसपर काम भी शुरू हो गया था।
सरकार की तैयारियों के मुताबिक आज सोनीपत में ही रामदेव को कैबिनेट रैंक का तोहफा दिया जाना तय था, लेकिन अफसरों की ओर से कैबिनेट रैंक के नोटिफिकेशन को फाइनल तक नहीं किया गया। रामदेव को कैबिनेट रैंक की सुविधाएं किस तरह से दी जानी हैं इसका ड्रॉफ्ट भी तैयार नहीं हुआ।
बीच का रास्ता निकालने में जुटे थे अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक, सरकार के अधिकारी इस संदर्भ में हरियाणा के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों की पॉलिसी का अध्ययन करने में जुटे थे। रामदेव को कैबिनेट रैंक की सुविधा सिर्फ उनके हरियाणा दौरे में देने की बात चल रही थी। केंद्र सरकार की तरफ से रामदेव को पहले से ही जेड श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।
लिहाजा सरकार के अधिकारी इस मामले में बीच का रास्ता निकाल रहे हैं। रामदेव को मिलने वाली सुविधाएं केवल हरियाणा में मान्य होंगी या बाहर भी जारी रहेंगी, इस पर अभी तक फैसला नहीं हो सका था।
नोटिफिकेशन फाइनल न होना भी एक कारण
ब्रांड अंबेसडर बनने के बाद पहली बार हरियाणा के सोनीपत में आ रहे रामदेव को आज कैबिनेट रैंक का तोहफा दिया जाना तय था, लेकिन अफसरों की ओर से कैबिनेट रैंक के नोटिफिकेशन को फाइनल नहीं किए जाने से मामला लटक गया है।