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Chandigarh News: यादों के झरोखे में झांका तो छलक उठीं आंखें

Sun, 07 May 2023 02:07 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 07 May 2023 02:07 AM IST
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When I peeped into the window of memories, my eyes were filled with tears.When I peeped into the window of memories, my eyes were filled with tears.
चंडीगढ़। इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड सेक्टर-26 के स्कूल में गोल्डन जुबली का समापन समारोह आयोजित किया गया। इसमें स्कूल से पढ़ाई करने के बाद देश के विभिन्न शहरों में नौकरी करने वाले पूर्व छात्र पहुंचे। वर्षों बाद एक-दूसरे से गले मिलते हुए हाल पूछा और भावुक भी हो गए। इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल जेएस जायड़ा जोकि खुद भी दिव्यांग हैं इन पूर्व छात्रों का गर्मजोशी के साथ हौसला बढ़ाने के लिए अपने स्टॉफ के साथ वहां मौजूद रहे। कार्यक्रम में ब्लाइंड स्कूल के छात्रों ने पंजाबी गानों के साथ कव्वाली में अपनी शानदार प्रस्तुति देकर तालियां बटोरीं। पूर्व छात्र अनुज शर्मा और कुलविंदर सिंह की ओर से आईएफटीबी एलुमनी डॉट ओआरजी नाम से बनाई वेबसाइट को लांच किया गया। इस वेबसाइट के जरिए यहां से पढ़ाई कर चुके पूर्व छात्र एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे वहीं, स्कूल के छात्रों को पूर्व छात्र उनके भविष्य के लिए मार्गदर्शन भी करेंगे।
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जिस कक्षा में जाने से लगता था डर, उसी में महारत हासिल की
इस स्कूल से वर्ष 2016 से पासआउट हुए गजानंद ने बताया जब वह यहां पढ़ाई करते थे, तब कंप्यूटर की कक्षा में जाने से डरते थे। हर बार बहाना बनाने के चक्कर में रहते थे, लेकिन आज उसी कंप्यूटर में मैंने महारत हासिल कर ली है। उन्होंने बताया कि वह इसी महीने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में सहायक मैनेजर का पद संभालने वाले हैं।
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एक साथ पढ़ाई करते हुए दोस्त बने, आज पति पत्नी
इस स्कूल से वर्ष 2005 से पासआउट हुए मनदीप सिंह पंजाब स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन में काम करते हैं। उनकी पत्नी पूजा इसी स्कूल से पासआउट हैं और पंजाब नेशनल बैंक में मैनेजर के पद पर हैं। उन्होंने बताया कि पहले वह इस स्कूल में पढ़ाई करते-करते एक दूसरे के दोस्त बने। आज पति-पत्नी की भूमिका इसी स्कूल की वजह से निभा रहे हैं।
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शिक्षकों ने अपने बच्चों की तरह प्यार दिया
स्कूल में वर्ष 2001 की पास आउट मंजू हरियाणा के बरवाला में मंडी सुपरवाइजर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि आज जिस मुकाम तक मैं पहुंची हूं वह इसी स्कूल की देन है। यह मेरे लिए मंदिर की तरह है। शिक्षकों ने हमें अपने बच्चों की तरह प्यार देते हुए पढ़ाई कराई।
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