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किसानों पर मौसम की मार: मार्च में ही मई वाली गर्मी से बिगड़ी गेहूं की सेहत, पैदावार में 10 फीसदी कमी का अनुमान
Sun, 20 Mar 2022 06:48 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 20 Mar 2022 06:48 PM IST
सार
खेतीबाड़ी माहिर व भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह के मुताबिक इस बार गेहूं की फसलों की पैदावार 10 फीसदी तक कम रह सकती है। आंकड़ों के अनुसार जिले में दो लाख 34 हजार हेक्टेयर रकबे पर गेहूं की खेती होती है।
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गेहूं की फसल
- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
पंजाब में इस साल मार्च में ही तेज गर्मी पड़ने से गेहूं की फसल मुरझा गई है। इस गर्मी से जहां आम आदमी परेशान है, वहीं गेहूं के लिए भी यह गर्मी नुकसानदायक मानी जा रही है। खेतीबाड़ी माहिरों के मुताबिक तेज गर्मी से गेहूं की पैदावार 10 फीसदी तक कम रहने की संभावना है। मौसम की इस मार से किसान काफी निराश हैं। किसानों ने पंजाब सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है।
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पटियाला के मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी जसवंत राय ने बताया कि गर्मी के कारण मिट्टी की नमी सूख चुकी है। फसल जल्दी पकने से दाने का विकास नहीं हो पा रहा है। जल्द ही नुकसान संबंधी रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी जाएगी, जिससे पीड़ित किसानों को जल्द मुआवजा मिल सके। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मार्च में पंजाब में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय न होने कारण बारिश नहीं हुई। हालांकि मार्च के पहले व दूसरे हफ्ते में उत्तर भारत में तीन बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ लेकिन इसका केवल हिमाचल व उत्तराखंड जैसे पहाड़ी इलाकों में प्रभाव पड़ा।
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पंजाब में मार्च में अब तक बारिश न होने से मिट्टी की नमी काफी कम हो गई है। ऐसे में जब मिट्टी में नमी बेहद कम है तो उस पर सूर्य की रोशनी पड़ने से मिट्टी गर्मी ज्यादा सोख रही है। मौसम विभाग के मुताबिक इस समय दिन व रात का तापमान सामान्य से अधिक है। ऐसे में अप्रैल के बजाय इस साल मार्च में ही गर्मी बढ़ने से गेहूं की फसलों को नुकसान हो रहा है। गर्मी की वजह से फसलें जल्दी पक रही हैं, जिस कारण बालियों में दानों का पूरी तरह से विकास नहीं हो पा रहा है। दाना छोटा रहने से गेहूं की पैदावार कम रहने का अनुमान है।
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प्रति एकड़ डेढ़ क्विंटल तक पैदावार में होगी कमी
खेतीबाड़ी माहिर व भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह के मुताबिक इस बार गेहूं की फसलों की पैदावार 10 फीसदी तक कम रह सकती है। आंकड़ों के अनुसार जिले में दो लाख 34 हजार हेक्टेयर रकबे पर गेहूं की खेती होती है। आमतौर पर प्रति एकड़ 18 से 22 क्विंटल गेहूं की पैदावार होती है लेकिन अप्रैल के बजाय मार्च में ही ज्यादा गर्मी पड़ने से प्रति एकड़ डेढ़ क्विंटल तक पैदावार कम हो सकती है। किसान नेता ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह किसानों की मदद करे, ताकि वह अपना खेती का खर्च निकाल सकें। अन्यथा किसानों के लिए इस बार आर्थिक दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
पहले का मुआवजा नहीं दिया तो अब क्या देंगे: किसान नेता टहल सिंह
किसान नेता टहल सिंह ने कहा कि पहले जनवरी में हुई बारिश ने गेहूं की फसलों का काफी नुकसान किया। अब रही सही कसर इस गर्मी ने पूरी कर दी। सरकार ने जब पहले नुकसान का अब तक मुआवजा नहीं दिया तो इसका क्या देगी। किसान नेता ने कहा कि इस बार उनके लिए खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। किसानों की हालत इस समय काफी खराब है।