पंजाब सरकार का फैसला: मंडियों में गेहूं की आमद हुई कम, पांच मई से बंद करेगी खरीद
इस साल गेहूं की खेती का रकबा 2021 के मुकाबले कम रहा है। पिछले साल गेहूं का रकबा 35.14 लाख हेक्टेयर था जो इस साल 35.02 लाख हेक्टेयर रहा। 2008 के बाद यह दूसरा मौका है जब गेहूं की पैदावार में इतनी बड़ी गिरावट दिखाई पड़ रही है।
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पंजाब की मंडियों में गेहूं की आमद कम होने के कारण सरकार ने गेहूं खरीद बंद करने का फैसला किया है। पांच मई से राज्य की सभी मंडियों में गेहूं खरीद पर विराम लग जाएगा। सूबे में अब 93 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीद की जा चुकी है। सरकार ने 132 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया था।
मंडियों में गेहूं खरीद बंद करने की अधिसूचना मंडी बोर्ड करेगा। वैश्विक स्तर पर गेहूं की कीमतों में तेजी के बाद ज्यादातर राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद में भारी गिरावट देखी गई लेकिन केंद्रीय पूल में गेहूं की सबसे बड़ी मात्रा में योगदान देने में पंजाब ने एक बार फिर देश का नेतृत्व किया।
राज्य ने अब तक 93 लाख टन से अधिक गेहूं की खरीद की है। सरकार ने किसानों को अब तक ही गेहूं खरीद के लिए 16606.85 करोड़ रुपये निर्गत किया जा चुके हैं। मंडियों में वर्तमान में औसतन सात हजार मीट्रिक टन गेहूं की आमद हो रही है। पंजाब के खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई है।
इस साल कम रहा गेहूं का रकबा
इस साल गेहूं की खेती का रकबा 2021 के मुकाबले कम रहा है। पिछले साल गेहूं का रकबा 35.14 लाख हेक्टेयर था जो इस साल 35.02 लाख हेक्टेयर रहा। 2008 के बाद यह दूसरा मौका है जब गेहूं की पैदावार में इतनी बड़ी गिरावट दिखाई पड़ रही है। 2008 में बड़ी गिरावट के कारण तत्कालीन केंद्र सरकार ने प्राइवेट खरीद पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी लेकिन बाद में बड़ी कंपनियों के दबाव में केंद्र सरकार ने केवल 25 हजार टन गेहूं खरीदने की इजाजत दी थी।
सरकार की ओर से राज्य में गेहूं की खरीद की महीने भर की कवायद में शामिल किसानों, आढ़तियों, मंडी मजदूरों, ट्रांसपोर्टरों और सरकारी अधिकारियों को धन्यवाद। खरीद की गति और एमएसपी बकाया के सीधे किसानों के बैंक खातों में तेजी से वितरण कार्य बेहतर रहा। यह खराब मौसम से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के अधिकांश हिस्सों में अनाज सिकुड़ गया था। - लाल चंद कटारूचक, खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री, पंजाब सरकार।