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Chandigarh News: ऐसा विकास कैसा, जिसमें कुछ मरें और कुछ लोग अरबपति बन जाएंः सोनम वांगचुक
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चंडीगढ़। 26 दिनों की पैदल यात्रा तय कर इंजीनियर और इनोवेटर सोनम वांगचुक शुक्रवार को करीब 100 लद्दाखी लोगों के साथ चंडीगढ़ पहुंचे। वे सभी लद्दाख से पैदल निकले हैं और दिल्ली जाना चाहते हैं। सोनम ने कहा कि केंद्र सरकार उनकी बातों को नहीं सुन रही है, इसलिए वह खुद दिल्ली जाकर कारण जानना चाहते हैं। उन्होंने पर्यावरण को लेकर कई चिंताएं जाहिर कीं और कहा कि ऐसा विकास कैसा, जिसमें कुछ मरें और कुछ लोग अरबपति बन जाएं।
सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख में पर्यावरण की सुरक्षा, लोकतंत्र की बहाली और छठी अनुसूची सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए यह पदयात्रा कर रहे हैं। वह एक सितंबर से करीब 150 लोगों के साथ लद्दाख से निकले हैं। वह शांतिपूर्ण तरीके से गांधी जी के दिखाएं रास्ते पर चलते हुए पैदल दिल्ली के लिए निकले हैं। कहा कि वह दिल्ली जाकर सरकार से पूछना चाहते हैं कि चुनाव के दौरान जो वादे किए गए थे, सरकार के साथ जो वार्ता चल रही थी, वग थम सी क्यों गई है। उन्होंने कहा कि वह दो अक्तूबर को दिल्ली के राजघाट जाएंगे। वे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, नेता प्रतिपक्ष से मिलेंगे और अपनी बात रखेंगे। बताया कि उनके साथ महिलाएं, पूर्व सैनिक व 80 से ज्यादा उम्र के लोग व अन्य चल रहे हैं। उनके पैर में छाले हैं लेकिन मुस्कुरा रहे हैं। उनके मन में कोई गुस्सा नहीं है। बस दिल्ली जाकर सरकार से पूछना चाहते हैं कि उन वादों का क्या हुआ। सोनम ने कहा कि आधे से ज्यादा यात्रा पूरी हो चुकी है। पहले हरियाणा में रुकते हुए जाना था लेकिन वहां चुनाव है, इसलिए वह सीधे दिल्ली जाएंगे। बताया कि वे शनिवार को भी चंडीगढ़ में ही रहेंगे और पंजाब यूनिवर्सिटी के एक विभाग के ऑडिटोरियम में दोपहर 12 बजे छात्रों से मिलेंगे।
हिमालय कराह रहा, पीड़ा सुनने की जरूरत
सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख में पिछले कुछ साल से प्रकृति के साथ काफी छेड़छाड़ हुई है। विकास के नाम पर विनाश हो रहा है। बड़े-बड़े हाइड्रो पावर और सोलर जैसे प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसका नुकसान लद्दाख के लोगों को हो रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। क्लाइमेट चेंज हो रहा है। स्थानीय लोग बहुत बुरी तरह से प्रभावित है। अगर अभी इसे नहीं रोका गया तो आने वाले समय में विनाश निश्चित है। ऐसा विकास कैसा, जिसमें कुछ मरें और कुछ लोग अरबपति बन जाएं। ये समझने की जरूरत है कि हिमालय कराह रहा है। उसकी पीड़ा सुननी चाहिए। स्थानीय लोगों को सशक्त करने की जरूरत है। लद्दाख के यूटी बनने के बाद ग्रुप ए की पिछले पांच साल में भर्ती नहीं निकली। युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।
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लगातार चलने से कई लोगों के पैरों में पड़े छाले
सीमा पर सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों को सुरक्षा मजबूत करने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उसके नाम पर कुछ भी बेच देना और शोषण और दोहन करना ठीक नहीं है। सोनम के साथ चल रहे कई लोगों के पैरों में छाले पड़ चुके हैं। उन्होंने पट्टियां बांधी हुई हैं। शुक्रवार को सेक्टर-38 के गुरुद्वारे में भी वह अपने जख्मों को देखते नजर आए। कई लोगों ने बताया कि वह रोजाना करीब 25 किमी पैदल चलते हैं। उन्हें दिल्ली तक कुल करीब 900 से 1000 किमी चलना है। लगातार चलने से कई लोगों की सेहत खराब हुई है। महिलाओं को भी तकलीफ हो रही है लेकिन हौसला बहुत मजबूत है। कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से चलते जा रहे हैं और दिल्ली जाकर ही राहत की सांस लेंगे।
-- - लोगों से बातचीत -- -
पीड़ा-दर्द में हैं लेकिन रुकना नहीं चाहते
हम पिछले काफी समय से चल रहे हैं। खुद को दर्द देकर अपनी मांगों को मनवाना चाहते हैं। कई लोग पीड़ा में हैं, दर्द में हैं लेकिन रुकना नहीं चाहते। लद्दाख की स्थिति खराब है। जलवायु परिवर्तन से सब बर्बाद हो जाएगा। तुरंत जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। - त्सेरिंग तानबा, पूर्व सैनिक
हिमालय को बचाने की जरूरत
ग्लेशियर पिघल रहे हैं। हिमालय को बचाने की जरूरत है। अब मौसम का पता नहीं चलता। कभी बहुत गर्मी होती है तो कभी बहुत सर्दी। वहां रहने वाले लोग बहुत बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। हमारी मांग है कि सरकार ने जो वादे किए थे, वो पूरे किए जाएं। - सोनम वांगडूस, किसान
इधर-उधर प्लास्टिक न फैलाएं पर्यटक
लद्दाख की जितनी जनसंख्या है, उससे कई गुना ज्यादा पर्यटक पहुंच रहे हैं। हमें उनसे समस्या नहीं है लेकिन स्थानीय प्रशासन के मिस-मैनेजमेंट से परेशानी है। लद्दाख बहुत बड़ा है, पर्यटकों को फैलाना चाहिए ताकि सारा दबाव लेह पर न पड़े। पर्यटक भी इधर-उधर प्लास्टिक न फैलाएं। - रिग्जिन वांगडूस, किसान
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सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख में पर्यावरण की सुरक्षा, लोकतंत्र की बहाली और छठी अनुसूची सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए यह पदयात्रा कर रहे हैं। वह एक सितंबर से करीब 150 लोगों के साथ लद्दाख से निकले हैं। वह शांतिपूर्ण तरीके से गांधी जी के दिखाएं रास्ते पर चलते हुए पैदल दिल्ली के लिए निकले हैं। कहा कि वह दिल्ली जाकर सरकार से पूछना चाहते हैं कि चुनाव के दौरान जो वादे किए गए थे, सरकार के साथ जो वार्ता चल रही थी, वग थम सी क्यों गई है। उन्होंने कहा कि वह दो अक्तूबर को दिल्ली के राजघाट जाएंगे। वे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, नेता प्रतिपक्ष से मिलेंगे और अपनी बात रखेंगे। बताया कि उनके साथ महिलाएं, पूर्व सैनिक व 80 से ज्यादा उम्र के लोग व अन्य चल रहे हैं। उनके पैर में छाले हैं लेकिन मुस्कुरा रहे हैं। उनके मन में कोई गुस्सा नहीं है। बस दिल्ली जाकर सरकार से पूछना चाहते हैं कि उन वादों का क्या हुआ। सोनम ने कहा कि आधे से ज्यादा यात्रा पूरी हो चुकी है। पहले हरियाणा में रुकते हुए जाना था लेकिन वहां चुनाव है, इसलिए वह सीधे दिल्ली जाएंगे। बताया कि वे शनिवार को भी चंडीगढ़ में ही रहेंगे और पंजाब यूनिवर्सिटी के एक विभाग के ऑडिटोरियम में दोपहर 12 बजे छात्रों से मिलेंगे।
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हिमालय कराह रहा, पीड़ा सुनने की जरूरत
सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख में पिछले कुछ साल से प्रकृति के साथ काफी छेड़छाड़ हुई है। विकास के नाम पर विनाश हो रहा है। बड़े-बड़े हाइड्रो पावर और सोलर जैसे प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसका नुकसान लद्दाख के लोगों को हो रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। क्लाइमेट चेंज हो रहा है। स्थानीय लोग बहुत बुरी तरह से प्रभावित है। अगर अभी इसे नहीं रोका गया तो आने वाले समय में विनाश निश्चित है। ऐसा विकास कैसा, जिसमें कुछ मरें और कुछ लोग अरबपति बन जाएं। ये समझने की जरूरत है कि हिमालय कराह रहा है। उसकी पीड़ा सुननी चाहिए। स्थानीय लोगों को सशक्त करने की जरूरत है। लद्दाख के यूटी बनने के बाद ग्रुप ए की पिछले पांच साल में भर्ती नहीं निकली। युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।
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लगातार चलने से कई लोगों के पैरों में पड़े छाले
सीमा पर सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों को सुरक्षा मजबूत करने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उसके नाम पर कुछ भी बेच देना और शोषण और दोहन करना ठीक नहीं है। सोनम के साथ चल रहे कई लोगों के पैरों में छाले पड़ चुके हैं। उन्होंने पट्टियां बांधी हुई हैं। शुक्रवार को सेक्टर-38 के गुरुद्वारे में भी वह अपने जख्मों को देखते नजर आए। कई लोगों ने बताया कि वह रोजाना करीब 25 किमी पैदल चलते हैं। उन्हें दिल्ली तक कुल करीब 900 से 1000 किमी चलना है। लगातार चलने से कई लोगों की सेहत खराब हुई है। महिलाओं को भी तकलीफ हो रही है लेकिन हौसला बहुत मजबूत है। कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से चलते जा रहे हैं और दिल्ली जाकर ही राहत की सांस लेंगे।
पीड़ा-दर्द में हैं लेकिन रुकना नहीं चाहते
हम पिछले काफी समय से चल रहे हैं। खुद को दर्द देकर अपनी मांगों को मनवाना चाहते हैं। कई लोग पीड़ा में हैं, दर्द में हैं लेकिन रुकना नहीं चाहते। लद्दाख की स्थिति खराब है। जलवायु परिवर्तन से सब बर्बाद हो जाएगा। तुरंत जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। - त्सेरिंग तानबा, पूर्व सैनिक
हिमालय को बचाने की जरूरत
ग्लेशियर पिघल रहे हैं। हिमालय को बचाने की जरूरत है। अब मौसम का पता नहीं चलता। कभी बहुत गर्मी होती है तो कभी बहुत सर्दी। वहां रहने वाले लोग बहुत बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। हमारी मांग है कि सरकार ने जो वादे किए थे, वो पूरे किए जाएं। - सोनम वांगडूस, किसान
इधर-उधर प्लास्टिक न फैलाएं पर्यटक
लद्दाख की जितनी जनसंख्या है, उससे कई गुना ज्यादा पर्यटक पहुंच रहे हैं। हमें उनसे समस्या नहीं है लेकिन स्थानीय प्रशासन के मिस-मैनेजमेंट से परेशानी है। लद्दाख बहुत बड़ा है, पर्यटकों को फैलाना चाहिए ताकि सारा दबाव लेह पर न पड़े। पर्यटक भी इधर-उधर प्लास्टिक न फैलाएं। - रिग्जिन वांगडूस, किसान