सोशल मीडिया में दावाः इस पानी से ठीक होता है शुगर, लेकिन लैब रिपोर्ट पढ़ आपके होश उड़ जाएंगे
रेवाड़ी के गुजरीवास गांव में एक ट्यूबवेल के पानी से शुगर समेत अन्य बीमारियों के ठीक होने की अफवाह की सत्यता के लिए गठित कमेटी के पास पानी की रिपोर्ट आ गयी है।
प्रदेश के अलावा निकटवर्ती राज्यों से भारी संख्या में यहां लोगों के पहुंचने के मद्देनजर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इसकी जांच की मांग की थी। जनस्वास्थ्य विभाग के करनाल और रेवाड़ी लैब से रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों का कहना है कि यह पानी पीने तो क्या नहाने के लायक भी नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार पानी में मैग्नीज (एमएन) और क्रोमियम (सीआर) की मात्रा शुगर कम करने में सहायक होती है लेकिन इस ट्यूबवेल के पानी में इन तत्वों की मात्रा न के बराबर है। इतना ही नहीं पानी में खनिज की जितनी जरूरत होती है रिपोर्ट में उतनी मात्रा भी नहीं मिली है। पानी के सैंपल को 19 मानकों पर जांचा गया लेकिन सभी फेल निकले हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस पानी में बैक्टीरिया भी मानक से बहुत ज्यादा सात एमपीएन है जबकि इसे 0-3 एमपीएन होना चाहिए। अब लोगों के विश्वास को ध्यान में रखकर प्रशासन रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों की मांग पर डीसी अशोक शर्मा ने गुरुवार को एक कमेटी का गठन कर अध्यक्ष एडीसी प्रदीप दहिया को बनाया था। इसमें कार्यकारी अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग बावल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी रेवाड़ी और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी बावल को सदस्य बनाया गया था। जानकारी के अनुसार टीडीएस की मात्रा 500 के मुकाबले 2669 है। पानी पीने लायक है या नहीं उसके टीडीएस से पता किया जाता है।
गुजरीवास के ट्यूबवेल के पानी में टोटल डिजोल्व सॉल्वेंट (टीडीएस) की मात्रा 2669 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली है। इसकी स्वीकार्यता 500 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। इंडियन स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन 2012 के अनुसार किसी भी कीमत पर टीडीएस की मात्रा 2000 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
कैल्शियम कार्बोनेट 910, नहाने के लिए भी ठीक नहीं
पानी की कठोरता (हार्डनेस) उसमें कैल्शियम कार्बोनेट की मात्रा से नापी जाती है। पेयजल में इसकी मात्रा 200 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए लेकिन शुगर ठीक करने वाले इस पानी में इसकी मात्रा 910 एमजीएल है।
क्षारीय इतना कि तेजी से नमी सोख लेगा
चिकित्सकों के अनुसार मानव शरीर में पीएच वैल्यू का बड़ा महत्व होता है। अम्लीय या क्षारीय होने पर पूरे शरीर का तंत्र बिगड़ जाता है। लेकिन गुजरीवास के शुगर ठीक करने वाले पानी में 200 के मुकाबले 1050 मिलीग्राम प्रति लीटर क्षारीय है। ऐसे पैर यदि थोड़ी देर इस पानी में रखा जाए तो सफेद पड़ जाएगा अर्थात ये पानी शरीर की नमी को तेजी से सोखता है।
जिंक जरूरत के हिसाब से भी कम
गुजरीवास के पानी को त्वचा के रोगों के लिए भी लाभदायक बताया जा रहा था। पेयजल में 5 मिलीग्राम प्रति लीटर जरूरी है लेकिन यहां के पानी ये मात्रा महज .056 मिलीग्राम प्रति लीटर ही पाई गई है। ऐसे में त्वचा रोग ठीक करने की बात अफवाह से ज्यादा कुछ भी नहीं है।
पानी की जांच में पाया गया है कि यह पीने लायक नहीं है। इसमें बैक्टीरिया बहुत ज्यादा मिले हैं। इसकी रिपोर्ट एडीसी प्रदीप दहिया को सौंपी गई है। - डॉ. किशन कुमार, सीएमओ
जानलेवा हो सकता है ये पानी : डॉक्टर
शहर के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. विजयपाल यादव का कहना है कि जांच रिपोर्ट से स्पष्ट है कि लगातार इस पानी को पीने से जानलेवा बीमारी हो सकती है। जांच रिपोर्ट में एक भी ऐसा तत्व नहीं है जो शुगर को ठीक करने में सहायक हो। ये पानी पेयजल के लिए तो दूर नहाने के भी उपयुक्त नहीं है। ऐसे में इस पानी के सेवन से बचना जरूरी है।