हरियाणा में मारकंडा और यमुना नदी में उफान, सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न, भारी बारिश की भी चेतावनी
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मानसून के सक्रिय होने से जीटी बेल्ट समेत हरियाणा के कई इलाकों में भी रविवार दोपहर बाद से सोमवार तक मूसलाधार बारिश हुई। इस दौरान सबसे अधिक अंबाला में पांच इंच तो कुरुक्षेत्र में चार इंच से ज्यादा बारिश हुई। ताबड़तोड़ बारिश से जहां रोपाई तेज हो गई है, वहीं नदी-नालों के उफनाने से सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न हो गई हैं।
मौसम विभाग ने अगले तीन-चार दिनों में प्रदेश में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग की ओर से चंडीगढ़, पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल और उसके आसपास इलाकों में मंगलवार को भारी से भारी से भारी की ऑरेंज चेतावनी जारी लोगों को सतर्क किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक कमजोर मानसून की वजह से सीजन में हरियाणा अब भी जहां सामान्य से 52 प्रतिशत बारिश की कमी से जूझ रहा है वहीं बीते 24 घंटे में इतनी बारिश हुई है कि यमुनानगर और अंबाला ने सीजन में बारिश की कमी को पूरा कर लिया है।
यमुनानगर में सीजन में 14 जुलाई तक सामान्य तौर पर 234.2 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस अवधि में वहां 235.8 मिमी बारिश हो गई। मूसलाधार बारिश का आलम यह रहा कि अंबाला में सामान्य बारिश के करीब पहुंच गया। वहां सीजन में अब तक 245.6 मिमी पानी गिर चुका है।
सोमवार को अंबाला में 127.5, कुरुक्षेत्र में 120, करनाल में 15, चंडीगढ़ में 29.3, पंचकूला में 8.2, कैथल में 3.3, सिरसा 6.6 मिमी बरसात के साथ-साथ रोहतक, सिरसा, भिवानी, जींद में भी अच्छी बारिश हुई। अच्छी बारिश से यमुना का जलस्तर 8 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया है।
वहीं मारकंडा नदी के उफनाने से कई एकड़ फसलें जलमग्न हो गई हैं। जीटी बेल्ट के कई शहरों में जलभराव से बाढ़ जैसी स्थिति है। उधर, गुरुग्राम में लगभग दस दिन के बाद हुई शाम को मूसलाधार बारिश के बाद मौसम सुहाना हो गया।
बारिश से मिली धूल कणों से राहत
पिछले चार दिनों से राजस्थान से आई हवाओं के साथ धूल कण भी आए, जिसके चलते धूल का गुबार छाया हुआ था। सोमवार को हुई बारिश से लोगों को धूल कणों से पूरी तरह राहत मिल गई, जिस कारण हिसार में पीएम 2.5 का स्तर गिरकर 219 तक पहुंच गया।
चार एमएम बारिश में भीगा लाखों मीट्रिक टन गेहूं
भिवानी में चारा मंडी रखा लाखों मीट्रिक टन गेहूं दोपहर हुई बारिश में भिगता रहा मगर कोई तिरपाल तक ढकने के लिए नहीं पहुंचा। हालात ये थे कि बारिश के बाद बोरियों से पानी टपकने लगा था।
अलनीनो और साइक्लोन की वजह से मानसून देरी से आया। उसके बाद भी यह पूरी तरह से एक्टिव नहीं हो पाया था। अब इसकी सक्रियता बढ़ने से 19 जुलाई तक ठीक-ठाक बारिश की संभावना है। - डॉ. मदन खीचड़, मौसम वैज्ञानिक, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार।