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Chandigarh News: सचिवालय में दृष्टिबाधितों का हंगामा
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मांगपत्र देने अंदर जाने की कोशिश पर पुलिस से धक्कामुक्की
सीएम के प्रधान सचिव ने गेट पर पहुंचकर लिया ज्ञापन, आश्वासन के बाद लौटे प्रदर्शनकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में मंगलवार को दृष्टिबाधितों ने पंजाब सचिवालय में हंगामा किया। नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड, पंजाब ब्रांच और भारत नेत्रहीन सेवक समाज लुधियाना के बैनर तले बड़ी संख्या में दृष्टिबाधित ढोल बजाते हुए सचिवालय पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान या वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को मांगपत्र सौंपने के लिए सचिवालय भवन में प्रवेश करने की कोशिश की। इस पर सीआईएसएफ जवानों ने उन्हें रोक दिया और चंडीगढ़ पुलिस को मौके पर बुलाया गया।
दृष्टिबाधित दोबारा ढोल बजाते हुए अंदर जाने लगे तो पुलिस के साथ उनकी धक्कामुक्की हो गई। स्थिति बिगड़ती देख पंजाब के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को मौके पर बुलाया गया। उन्होंने गेट पर ही प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया। आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी लौट गए।
साढ़े चार साल से मांगों को लेकर संघर्ष
संगठन के प्रधान गुरप्रीत सिंह और महासचिव बलविंदर सिंह चाहल ने कहा कि दृष्टिबाधित और दिव्यांग वर्ग पिछले साढ़े चार साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर अपने अधिकारों की मांग कर रहा है। इसके बावजूद उन्हें अनदेखी और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
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संगठनों ने सरकार के सामने सात प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें दृष्टिबाधितों के लिए आरक्षित खाली पदों को विशेष भर्ती अभियान चलाकर तत्काल भरना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1500 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 5000 रुपये प्रति माह करना और नेत्रहीन सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को बिना भेदभाव समय पर पदोन्नति देना शामिल है।
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सीएम के प्रधान सचिव ने गेट पर पहुंचकर लिया ज्ञापन, आश्वासन के बाद लौटे प्रदर्शनकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में मंगलवार को दृष्टिबाधितों ने पंजाब सचिवालय में हंगामा किया। नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड, पंजाब ब्रांच और भारत नेत्रहीन सेवक समाज लुधियाना के बैनर तले बड़ी संख्या में दृष्टिबाधित ढोल बजाते हुए सचिवालय पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान या वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को मांगपत्र सौंपने के लिए सचिवालय भवन में प्रवेश करने की कोशिश की। इस पर सीआईएसएफ जवानों ने उन्हें रोक दिया और चंडीगढ़ पुलिस को मौके पर बुलाया गया।
दृष्टिबाधित दोबारा ढोल बजाते हुए अंदर जाने लगे तो पुलिस के साथ उनकी धक्कामुक्की हो गई। स्थिति बिगड़ती देख पंजाब के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को मौके पर बुलाया गया। उन्होंने गेट पर ही प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया। आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी लौट गए।
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साढ़े चार साल से मांगों को लेकर संघर्ष
संगठन के प्रधान गुरप्रीत सिंह और महासचिव बलविंदर सिंह चाहल ने कहा कि दृष्टिबाधित और दिव्यांग वर्ग पिछले साढ़े चार साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर अपने अधिकारों की मांग कर रहा है। इसके बावजूद उन्हें अनदेखी और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
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संगठनों ने सरकार के सामने सात प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें दृष्टिबाधितों के लिए आरक्षित खाली पदों को विशेष भर्ती अभियान चलाकर तत्काल भरना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1500 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 5000 रुपये प्रति माह करना और नेत्रहीन सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को बिना भेदभाव समय पर पदोन्नति देना शामिल है।