{"_id":"5ca866fcbdec222dcc577f0a","slug":"visual-artists-honoured-by-lalit-kala-academy-chandigarh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ः विजुअल आर्ट के महारथियों को किया गया सम्मानित, एक को मरणोपरांत मिला पुरस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ः विजुअल आर्ट के महारथियों को किया गया सम्मानित, एक को मरणोपरांत मिला पुरस्कार
Sat, 06 Apr 2019 02:19 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 06 Apr 2019 02:19 PM IST
विज्ञापन
विजुअल आर्टिस्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ पंजाब ललित कला अकादमी ने नामी गिरामी कलाकारों को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह का आयोजन पंजाब कला भवन में किया गया। पंजाब ललित कला अकादमी के चेयरमैन दीवान माना, हिस्टोरियन डा. बीएन गोस्वामी मौजूद थे। इस मौके पर मुंबई के प्रसिद्ध आर्टिस्ट अतुल डोडिया भी मौजूद रहे। पंजाब और चंडीगढ़ के कलाकारों को यह सम्मान रचनात्मकता और सामाजिक मुद्दों को अपने स्किल के माध्यम से अलग अलग माध्यमों में दर्शाने के लिए दिया गया। यहां दस आर्टिस्टों को विजुअल आर्ट और एक आर्टिस्ट को आर्ट क्रिटिक के लिए सम्मानित किया गया।
इस मौके पर दिवंगत मलकीत सिंह को मरणोपरांत सम्मान दिया गया। ग्यारह लोगों को एक सिंगल प्लेटफार्म पर पंजाबी विजुअल आर्ट वर्ल्ड पर यह चांस दिया गया। इस सम्मान के दौरान एक प्रशस्ति पत्र, प्लाक और शाल के साथ एक 51 हजार रुपये का चेक दिया गया। इस मौके पर बलदेव गंभीर, बासुदेब बिस्वास, जसपाल एस, मदन लाल, दिवंगत मलकीत सिंह, निरुपमा दत्त, प्रभइंदर लाल, सिद्धार्थ, सतवंत सिंह, सुरजीत कौर और ठुकराल और टागरा शामिल को पुरस्कार दिया गया।
विश्वास जिनका जादू चढ़कर बोलता है
स्कल्पचर तैयार करने में बासुदेव बिस्वास का जवाब नहीं। उनकी पेंटिंग्स को देखकर कोई भी आसानी से कह देता है कि यह स्कल्पचर इतिहास को बयां करती हैं। उनकी लकड़ी, प्लास्टिक के साथ ही कई अन्य माध्यमों से तैयार स्कल्पचर सभी का दिल जीत लेता है। उन्होंने बताया कि यह प्रेरणा उनको अपने घर से ही मिली। मां से ही उन्होंने काफी कुछ सीखा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस मौके पर दिवंगत मलकीत सिंह को मरणोपरांत सम्मान दिया गया। ग्यारह लोगों को एक सिंगल प्लेटफार्म पर पंजाबी विजुअल आर्ट वर्ल्ड पर यह चांस दिया गया। इस सम्मान के दौरान एक प्रशस्ति पत्र, प्लाक और शाल के साथ एक 51 हजार रुपये का चेक दिया गया। इस मौके पर बलदेव गंभीर, बासुदेब बिस्वास, जसपाल एस, मदन लाल, दिवंगत मलकीत सिंह, निरुपमा दत्त, प्रभइंदर लाल, सिद्धार्थ, सतवंत सिंह, सुरजीत कौर और ठुकराल और टागरा शामिल को पुरस्कार दिया गया।
विज्ञापन
विश्वास जिनका जादू चढ़कर बोलता है
स्कल्पचर तैयार करने में बासुदेव बिस्वास का जवाब नहीं। उनकी पेंटिंग्स को देखकर कोई भी आसानी से कह देता है कि यह स्कल्पचर इतिहास को बयां करती हैं। उनकी लकड़ी, प्लास्टिक के साथ ही कई अन्य माध्यमों से तैयार स्कल्पचर सभी का दिल जीत लेता है। उन्होंने बताया कि यह प्रेरणा उनको अपने घर से ही मिली। मां से ही उन्होंने काफी कुछ सीखा।
विज्ञापन
पेंटिंग्स और मूर्ति कला का जवाब नहीं
होशियारपुर के जसपाल की पेंटिंग और मूर्ति कला का जवाब नहीं। वास्तव में उनके पेंटिंग्स और स्कल्पचर की एक थीम होती है। मसलन आपके लिए आइसक्रीम खाने की बात होगी पर जसपाल की नजरों में यह मानव और इच्छा को कनेक्ट करती है। उन्होंने कहा कि एक्रेलिक की पेंटिंग्स के साथ उन्होंने इसी आइडिया को उतारा तो सभी ने इसे पसंद किया। उन्होंने कहा कि पहले वह कांसेप्ट तैयार करते हैं और उसके बाद शो। अब वह लोगों के गुडलक चांस की थीम को लेकर अपना शो तैयार कर रहे हैं।
कैक्टस देखा तो दिल खिल गए उनके
अमृतसर के रहने वाले बलदेव गंभीर ने बताया कि उनके घर के पास कैक्टस लगे थे। उन्होंने सोचा क्यों न कैक्टस पर काम किया जाए। उन्होंने कुछ कैक्टस को अपने ढंग से तैयार किया। थोड़ा प्रयास ज्यादा लगा पर उनका काम सभी को पसंद आया। उसके बाद तो उनका काम रुका नहीं और कैक्टस के काम के लिए उनको दुनिया जान गई। वह बताते हैं कि उन्होंने लाहौर, अमेरिका और अन्य जगह पर अपना काम दिखा चुके हैं।
आर्किटेक्चर इनवायरमेंट पर करते हैं काम
प्रभइंदर लाल का काम आर्किटेक्चर इनवायरमेंट पर है। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1995 में शुरू किया था। पहले की कला और अब नए बच्चों की कला में काफी अंतर आ गया है। उन्होंने कहा कि अब काम ज्यादा अच्छा हो रहा है। नए नए प्रयाग हो रहे हैं।
कैक्टस देखा तो दिल खिल गए उनके
अमृतसर के रहने वाले बलदेव गंभीर ने बताया कि उनके घर के पास कैक्टस लगे थे। उन्होंने सोचा क्यों न कैक्टस पर काम किया जाए। उन्होंने कुछ कैक्टस को अपने ढंग से तैयार किया। थोड़ा प्रयास ज्यादा लगा पर उनका काम सभी को पसंद आया। उसके बाद तो उनका काम रुका नहीं और कैक्टस के काम के लिए उनको दुनिया जान गई। वह बताते हैं कि उन्होंने लाहौर, अमेरिका और अन्य जगह पर अपना काम दिखा चुके हैं।
आर्किटेक्चर इनवायरमेंट पर करते हैं काम
प्रभइंदर लाल का काम आर्किटेक्चर इनवायरमेंट पर है। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1995 में शुरू किया था। पहले की कला और अब नए बच्चों की कला में काफी अंतर आ गया है। उन्होंने कहा कि अब काम ज्यादा अच्छा हो रहा है। नए नए प्रयाग हो रहे हैं।
एक बेहतरीन आर्टिस्ट और कार्टूनिस्ट
सतवंत सिंह एक बेहतरीन कार्टूनिस्ट होने के साथ आर्टिस्ट भी हैं। वह ज्यादा काम महिला और पुुरुष के संबंधों पर करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पेंटिंग्स में हाफ ह्यूमन और हाफ मैन का कांसेप्ट है। इसमें सारा काम मेंटल एवोल्यूशन पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे अभी वह जितनी दूरी पर पहुंच गए हों, पर उनका सपना अब तक पूरा नहीं हुआ है।
सिटी ब्यूटीफुल है मदनलाल की पेंटिंग्स का दीवाना
चंडीगढ़ के मदन मदन लाल की पेंटिग्स खास हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 1993 में पहला शो किया था। 1993 से बीस सोलो शो किए हैं। उन्होंने बताया कि वह ज्यादातर अपनी पेंटिंग्स में अलग अलग माध्यमों का प्रयोग करते हैं। यह थीम आधारित शो होता है। वह शहरीकरण पर भी काम करते हैं। इसमें पास्ट और फ्यूचर को देखते हैं।
सिटी ब्यूटीफुल है मदनलाल की पेंटिंग्स का दीवाना
चंडीगढ़ के मदन मदन लाल की पेंटिग्स खास हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 1993 में पहला शो किया था। 1993 से बीस सोलो शो किए हैं। उन्होंने बताया कि वह ज्यादातर अपनी पेंटिंग्स में अलग अलग माध्यमों का प्रयोग करते हैं। यह थीम आधारित शो होता है। वह शहरीकरण पर भी काम करते हैं। इसमें पास्ट और फ्यूचर को देखते हैं।