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राम रहीम पर फैसले से 24 घंटे पहले लिख दी थी हिंसा की स्क्रिप्ट

Sun, 27 Aug 2017 11:27 AM IST
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़ Updated Sun, 27 Aug 2017 11:27 AM IST
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violence after gurmeet ram rahim verdict was planned 24 hours earlier
पंचकूला में हिंसा - फोटो : अमर उजाला
डेरामुखी को दोषी करार देने के बाद हुई भयावह हिंसा की स्क्रिप्ट फैसला आने से चौबीस घंटे पहले वीरवार को फाइनल हो गई थी। इसे राम रहीम के गुर्गों ने दिन-रात में बखूबी लिखा और सीबीआई की विशेष अदालत से एक किलोमीटर दूर जमा डेरा प्रेमियों को इसकी रूपरेखा भी समझा दी।
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विभिन्न सेक्टरों के पार्कों व सड़क किनारे जमा युवाओं और महिलाओं को पुलिस की ओर से होने वाले एक्शन के बाद के रिएक्शन के दिशा-निर्देश कोर्डवर्ड में दिए गए थे। समर्थकों के लिए खाना, पानी, चाय ला रहे पंजाब-हरियाणा के डेरामुखी के गुर्गों पर हर आधे घंटे बाद मुख्य स्थलों पर पहुंचकर पल-पल बदल रही रणनीति से अवगत कराने का भी जिम्मा था।
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फैसले के बाद समझाई हिंसा की प्लानिंग !

violence after gurmeet ram rahim verdict was planned 24 hours earlier
पंचकूला में हिंसा - फोटो : अमर उजाला
पंजाब-हरियाणा नंबर की गाड़ियों में पांच से दस की संख्या में भरकर आ रहे ये गुर्गे जहां समर्थकों को मीडिया से दूरी बनाने के डेरे के आदेशों से अवगत करा रहे थे, वहीं फैसला आने के बाद की प्लानिंग भी समझा दी थी। इसेदेखते हुए डेरा प्रेमियों ने वीरवार रात तक पंचकूला को हिंसा में झोंकने का साजो-सामान जुटा लिया था। 

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि डेरा प्रेमियों के पास वाहनों को आग लगाने के लिए केमिकल, प्लास्टिक बोतलों में डीजल-पेट्रोल और देसी कट्टे कहां से आए।

पुलिस को यह भी भनक नहीं लग पाई कि वीरवार को ही डेरा समर्थक महिलाओं को यह बताया जा चुका था कि पुलिस के कार्रवाई करने या जबरन उठाने पर उन्हें आगे होकर मोर्चा संभालना है, जबकि समर्थक पीछे रहेंगे।

अब रडार पर सरकारी कर्मी और उपद्रवी

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राम रहीम के बाद सिरसा में डेरे पर गाज
उन्हें चिल्लाते हुए सड़कों पर लेटने और हंगामा करने के भी निर्देश थे। सूत्रों के अनुसार पुलिस के पास इसकी पूरी सूचना थी, फिर भी प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों ने सारी रात सड़कों की खाक छानते हुए गुजार दी, लेकिन डेरा प्रेमियों को शहर से बाहर नहीं निकाला।

हिंसा के बाद सरकार ने वीडियोग्राफी व सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। इसमें यह तलाशा जा रहा है कि किन लोगों ने हिंसा भड़काने में अहम भूमिका निभाई। किन-किन सरकारी कर्मियों के परिवार के सदस्य डेरा प्रेमियों में शामिल थे और कौन कर्मचारी धरना स्थलों पर पहुंचे थे। वीडियोग्राफी की जांच में इनकी पहचान सार्वजनिक होने पर कार्रवाई की जाएगी।

डीजीपी के दावे टायं-टायं फिस्स
डीजीपी बीएस संधू के दावे भी टाय-टाय फिस्स हो गए। सरकार चाहती तो सिरसा की तरह पंचकूला में भी वीरवार शाम से ही कर्फ्यू लगाकर हिंसा को टाल सकती थी। अब चौतरफा उंगलियां उठने के बाद अधिकारी अपनी खाल बचाने के लिए सफाई देते नहीं थक रहे।
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