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Hindi News ›   Chandigarh ›   Village Kane ka bada of Punjab defeat Corona With Kadha And Haldi Milk

#ladengecoronase: सुबह काढ़ा, रात को हल्दी वाला दूध.. इस गांव ने ऐसे रोकी कोरोना की एंट्री

Tue, 08 Jun 2021 11:34 AM IST
निवेदिता वर्मा वेद प्रकाश, संवाद न्यूज एजेंसी, नयागांव (पंजाब)
वेद प्रकाश, संवाद न्यूज एजेंसी, नयागांव (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 08 Jun 2021 11:34 AM IST
सार

इस गांव ने कोरोना काल में रिश्तेदारी में आने-जाने पर पूरी तरह से रोक लगाई। यह बात सबसे मुश्किल थी क्योंकि पीजीआई में अक्सर रिश्तेदार आते रहते हैं, लेकिन महामारी से बचने के लिए गांव वालों ने यह बात पक्के तौर पर लागू की। 

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Village Kane ka bada of Punjab defeat Corona With Kadha And Haldi Milk
गांव काने का बाड़ा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

भले ही कोरोना की दस्तक के बाद चंडीगढ़ में पहली मौत नयागांव क्षेत्र के बुजुर्ग की हुई थी, लेकिन यहां से मात्र पांच किलोमीटर दूर स्थित गांव काने का बाड़ा में अभी तक कोई संक्रमित नहीं हुआ है। इसका श्रेय गांव के लोगों को ही जाता है। इलाके में कोई सरकारी डिस्पेंसरी नहीं है, लेकिन लोगों ने पहले जहां सुबह काढ़ा और रात को हल्दी वाला दूध पीने के अलावा दिशानिर्देशों का पालन कर कोरोना की एंट्री रोकी, वहीं अब सैंपलिंग और टीकाकरण करवाकर महामारी को मात देने में जुटे हुए हैं।

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काने का बाड़ा गांव के अधिकतर लोग काम धंधों के लिए चंडीगढ़ पर निर्भर हैं। गांव की जनसंख्या करीब 1600 है। गांववासियों ने बताया कि जब से कोरोना महामारी का प्रकोप शुरू हुआ है तब से सभी गांव वासियों ने मिलकर कुछ नियम तय किए थे। इसके तहत सुबह हर व्यक्ति एक गिलास काढ़ा पीएगा और रात को हल्दी वाला दूध पीने की आदत बनाई गई। कोरोना काल में रिश्तेदारी में आने-जाने पर पूरी तरह से रोक लग गई। लोगों ने बताया कि यह बात सबसे मुश्किल थी क्योंकि पीजीआई में अक्सर रिश्तेदार आते रहते हैं, लेकिन महामारी से बचने के लिए उन्होंने यह बात पक्के तौर पर लागू की। 
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मिशन फतेह के तहत हुआ सर्वेक्षण, टीकाकरण शिविर भी लगा
पंजाब सरकार ने कुछ दिन पहले मिशन फतेह के तहत गांव का सर्वेक्षण करवाया था। गांव में जाकर सेहत विभाग की टीम ने खांसी-जुकाम वाले लोगों की पहचान की थी। इसमें गांव के सारे लोग तंदुरुस्त पाए गए थे। इसके अलावा गांव में एक बार टीकाकरण शिविर लगा, जिसमें मात्र 145 लोगों ने टीका लगवाया था। हालांकि गांववासी नयागांव और अन्य जगहों पर लगने वाले शिविरों में हिस्सा लेते हैं।

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सख्त निर्णय लेकर किया सख्ती से पालन

कोरोना काल शुरू होते ही गांव में बैठक की गई। इसमें फैसला किया कि गांव का कोई भी व्यक्ति अपनी किसी भी रिश्तेदारी में नहीं जाएगा और न ही किसी का रिश्तेदार गांव में आएगा। नियम सख्त थे, यह सब बोलना जितना आसान है, करना उतना ही मुश्किल था।- सुच्चा सिंह, पंच, गांव काने का बाड़ा

भीड़ में जाने से बचते हैं
गांव के सभी लोग शाम को हल्दी वाला दूध और सुबह एक गिलास काढ़ा जरूर पीते हैं। इससे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इस कारण ही हमारे गांव में कोरोना दस्तक नहीं दे पाया है। इसके अलावा बाहरी खाने से भी परहेज किया जा रहा है और भीड़वाले इलाकों में जाने से बचते हैं। -जोगिंदर पाल, ग्रामीण

सेहत केंद्र नहीं फिर भी बीमारी से निपटे
गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। लोगों को दवाई लेने के लिए नयागांव या चंडीगढ़ जाना पड़ता है। ऐसे में लोगों ने सूझबूझ से काम लिया। कोरोना से निपटने के लिए नियम बनाए गए और सभी ने इन नियमों का पालन भी किया। लोगों के सहयोग के साथ ही आज गांववासी कोरोना से बचे हुए हैं। -पाल राम, ग्रामीण

रिश्तेदारों से अब फोन पर ही बात
गांव की महिलाएं और बुजुर्ग घर से बाहर नहीं निकलते हैं। बुजुर्गों का खासकर ध्यान रखा जाता है। शाम को सभी को हल्दी का दूध दिया जाता है। गांववासियों को अपने रिश्तेदारों से मिले हुए एक साल से ज्यादा का समय हो गया है। अब फोन पर बात या वीडियो कॉल से ही संपर्क होता है। - सुलिन्द्र देवी, ग्रामीण
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