एचसीएस भर्ती घोटाला: मूल उत्तर पुस्तिकाओं की मांग लेकर विजिलेंस पहुंची उच्च न्यायालय, पढ़ें- हाईकोर्ट की चार बड़ी खबरें
अब विजिलेंस ने चयनित 35 एचसीएस अधिकारियों की 54 उत्तर पुस्तिकाओं की मूल कॉपी मांगी है। अर्जी में विजिलेंस ने हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया कि लैब में इनकी जांच के बाद सुपुर्द कर दिया जाएगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा सरकार द्वारा 2005 में की गई एचसीएस भर्ती से जुड़े घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस अब मूल उत्तर पुस्तिकाएं फॉरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गई है। विजिलेंस द्वारा दाखिल की गई अर्जी पर हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई होगी। विजिलेंस ने अपनी अर्जी में बताया कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए मूल उत्तर पुस्तिकाओं की जरूरत है।
उत्तर पुस्तिकाओं में काट छांट, जोड़ना-घटाना, स्याही आदि की जांच फॉरेंसिक लैब में होगी तो जांच को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा। इस विवाद के हाईकोर्ट में आने के बाद इन उत्तर पुस्तिकाओं की मूल कॉपी हाईकोर्ट में मंगवा ली गई थी। 2009 में विजिलेंस के अनुरोध पर इनकी फोटोकॉपी विजिलेंस को उपलब्ध करवाई गई थी। अब विजिलेंस ने चयनित 35 एचसीएस अधिकारियों की 54 उत्तर पुस्तिकाओं की मूल कॉपी मांगी है। अर्जी में विजिलेंस ने हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया कि लैब में इनकी जांच के बाद सुपुर्द कर दिया जाएगा।
2- पूर्व जेल अधीक्षक ने निलंबन के आदेश को दी हाईकोर्ट में चुनौती
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हिसार सेंट्रल जेल के पूर्व अधीक्षक शमशेर सिंह दहिया की याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न याची के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी जाए। अगली सुनवाई पर हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट में वे दस्तावेज सौंपने होंगे, जिनके आधार पर निलंबन किया गया था।
दहिया ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया कि उसके खिलाफ लगे आरोप निराधार हैं और एकतरफा जांच के बाद उसे निलंबित किया गया है। याची ने बताया कि उस पर जेल में कैदी अनुरोध से 5 लाख रुपये मांगने का आरोप है। अनुरोध पर हत्या के दो मामलों में हथियार सप्लाई करने का आरोप था। अनुरोध की मां ने 5 लाख रुपये की मांग को लेकर हाईकोर्ट, मानवाधिकार आयोग और सरकार को शिकायत दी थी। मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में जांच का जिम्मा एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज को सौंपी। जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने दहिया को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
3- वेटेरिनरी यूनिवर्सिटी के वीसी की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती
डॉक्टर जगवीर रावत द्वारा लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटेरिनरी एंड एनिमल साईंसेज के वीसी के रूप में डॉक्टर विनोद वर्मा की नियुक्ति को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
डॉक्टर जगवीर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि 25 मार्च 2021 को यूनिवर्सिटी के वीसी का कार्यकाल खत्म हो गया था। कार्यकाल खत्म होने के बाद नियमित वीसी की नियुक्ति होने तक उन्हें एक्सटेंशन दे दिया गया। 21 जनवरी 2022 को बैठक का आयोजन किया गया जिसमें डॉक्टर विनोद वर्मा को सर्वसम्मति से वीसी चुनने की बात कही गई।
याची ने बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च में एनिमल साईंसेज के डिप्टी डायरेक्टर जनरल भी इस बैठक का हिस्सा थे। वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक में शामिल हुए थे। तकनीकी कारणों से उनका माइक काम नहीं कर रहा था और उन्होंने विनोद वर्मा की नियुक्ति का विरोध किया था। बैठक के बाद उन्होंने इस संबंध में ई मेल के माध्यम से भी विरोध जताया।
याची ने कहा कि जब एक सदस्य विरोध दर्ज कर रहा है तो वीसी की नियुक्ति का फैसला सर्वसम्मति से नहीं माना जा सकता। सर्वसम्मति न होने की स्थिति में नियुक्ति की प्रक्रिया अलग होती है। ऐसे में चांसलर सरकार के साथ विमर्श करके वीसी की नियुक्ति करते हैं। ऐसे में यह नियुक्ति मनमाने तरीके से की गई है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
4- सीएम उम्मीदवार के लिए ‘आप’ के सर्वे की सत्यता की जांच की मांग खारिज
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री के रूप में किसे चुना जाए, इसके लिए आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा कराए गए सर्वे को प्रोपेगंडा बतातेे हुए इसकी सत्यता की जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। मोहाली के गुरविंदर सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करते हुए आम आदमी पार्टी के सर्वे को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया।
याची ने कहा कि यह पार्टी का चुनावी पैंतरा था। इस बारे में याची ने आरटीआई से सूचना मांगी थी। आरटीआई के बावजूद सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। याची ने कहा कि इस सर्वे में पारदर्शिता नाम की कोई चीज नहीं थी। याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि इस मामले की निगरानी वह खुद करे और जांच पारदर्शी तरीके से करवाई जाए ताकि लोग सच जान सकें।
हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची को चुनाव आयोग के समक्ष इस मांग को रखना चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि यदि ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो कानून के अनुरूप उस पर जल्द निर्णय ले।