सिंचाई घोटाला: हाईकोर्ट में विजिलेंस ने कहा- निवेदन के बाद भी सरकार नहीं दे रही केस चलाने की अनुमति
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को चार सप्ताह की मोहलत देते हुए निर्णय लेने का आदेश दिया था। आदेश का पालन न होने पर अब अवमानना याचिका दाखिल की गई है।
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2017 के सिंचाई घोटाले में दो पूर्व मंत्री, उनके पीए और तीन आईएएस को करोड़ों रुपये की रिश्वत मामले में इन पर केस चलाने की अनुमति की मांग पर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद निर्णय नहीं लेने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर सुनवाई के दौरान विजिलेंस ने बताया कि बार-बार अनुमति मांगने के बावजूद सरकार ने केस चलाने की अनुमति नहीं दी है।
बठिंडा निवासी हरमीत सिंह व अन्य ने बताया कि गुरिंदर सिंह ने बयान देते हुए इन वीआईपी लोगों का नाम लिया था। इस बयान के बाद भी सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याची ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याची की शिकायत पर पंजाब सरकार को कानून के अनुरूप निर्णय लेने का आदेश दिया था।
आदेश का पालन न होने के चलते अर्जी दाखिल कर बताया कि इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने कहा था कि जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को चार सप्ताह की मोहलत देते हुए निर्णय लेने का आदेश दिया था। आदेश का पालन न होने पर अब अवमानना याचिका दाखिल की गई है।
विजिलेंस ने सुनवाई के दौरान बताया कि इस मामले में विजिलेंस ने वाईआईपी लोगों के खिलाफ केस चलाने की सरकार से अनुमति मांगी थी। बार-बार इस बारे में सरकार को लिखा गया लेकिन अनुमति नहीं मिली। पंजाब सरकार ने इस पर अपना पक्ष रखने के लिए मोहलत मांगी। इस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी।
यह था मामला
बठिंडा निवासी हरमीत सिंह एवं अन्य ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट को बताया कि इस घोटाले के मुख्य आरोपी गुरिंदर सिंह ने 2017 में पुलिस को दिए बयान में दो पूर्व मंत्रियों व उनके पीए तथा तीन आईएएस अधिकारियों को टेंडर के बदले करोड़ों रुपये देने की बात कुबूली थी। मुख्य आरोपी के इस बयान के बावजूद सरकार ने अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
याची ने बताया कि उसने गत वर्ष 30 जून को पंजाब के मुख्य सचिव सहित विजिलेंस विभाग को लीगल नोटिस भेज नामित किए गए सभी रसूखदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। साथ ही यह भी मांग की थी कि इस मामले में जांच सीबीआई को सौंपी जाए क्योंकि मामला हाई प्रोफाइल लोगों से जुड़ा हुआ है।