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पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम समेत 4 दोषी करार, 17 जनवरी को सुनाई जाएगी सजा

Fri, 11 Jan 2019 03:36 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Fri, 11 Jan 2019 03:36 PM IST
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Verdict on Ram Rahim in Chhatrapati Murder Case, Dera Sacha Sauda
रामचंद्र छत्रपति

सोलह साल चली लंबी न्याय की जंग के बाद छत्रपति परिवार को शुक्रवार को इंसाफ मिला। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट ने डेरामुखी राम रहीम सहित तीन अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। दोषी करार दिए गए तीन अन्य आरोपियों में डेरा प्रबंधक कृष्णलाल और मुख्य अनुयायी निर्मल सिंह व कुलदीप सिंह शामिल हैं। 

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अब इन चारों आरोपियों को 17 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि साध्वी यौन शोषण मामले में सीबीआई कोर्ट पहले ही बाबा को सजा दे चुकी है। वर्तमान में बाबा सुनारिया जेल में बंद है। शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान जहां गुरमीत राम रहीम सुनारिया जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ। वहीं, तीनों अन्य आरोपी कड़ी सुरक्षा में पंचकूला कोर्ट में पेश हुए। 

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 इन धाराओं में ठहराया दोषी 
कोर्ट ने चारों को 302 और 120 बी आईपीसी के तहत दोषी करार दिया है। इसके साथ ही निर्मल को सेक्शन-25 ऑफ आर्म्स एक्ट और कृष्ण लाल को सेक्शन 29 ऑफ आर्म्स एक्ट के तहत भी दोषी करार दिया गया है।
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कोर्ट ने अपना फैसला दोपहर बाद करीब तीन बजे सुनाया। गुरमीत राम रहीम फैसला सुनते ही सदमे में आ गया। कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद कुलदीप, कृष्ण लाल और निर्मल को हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद तीनों को कड़ी सुरक्षा में अंबाला जेल भेज दिया गया। इस दौरान परिसर में पुलिस का कड़ा पहरा रहा। किसी भी व्यक्ति को कोर्ट परिसर के आसपास भी फटकने नहीं दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहे और जवानों को दिशा-निर्देश देते रहे।


छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई की ओर से कुल 46 गवाह और बचाव पक्ष की ओर 21 गवाह पेश किए गए। हत्या के चश्मदीद रामचंद्र के बेटे अंशुल और अदिरमन थे। जिन्होंने कोर्ट में आंखों देखी बयां की थी। इसके अलावा हत्या के षड्यंत्र के बारे में गवाह खट्टा सिंह ने कोर्ट में बयान दिए थे। साथ ही डॉक्टरों की भी गवाही हुई थी।

बचाव पक्ष की दलीलें

Verdict on Ram Rahim in Chhatrapati Murder Case, Dera Sacha Sauda
रामचंद्र छत्रपति

बचाव पक्ष की दलीलें थी कि राम रहीम का पहली बार 2007 में केस में सामने आया था। साथ ही किसी भी आरोपी की पहचान नहीं हुई थी। मामले की जांच डीएसपी सतीश डागर और डीआईजी एम नारायणन ने की थी। कोर्ट में केस को साबित करने के लिए एडवोकेट एचपीएस वर्मा ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

खट्टा सिंह की गवाही अहम रही
गुरमीत राम रहीम के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह ने गवाही में कहा था कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या करने के लिए डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने कृष्ण लाल, कुलदीप और निर्मल सिंह को आदेश दिया था। गुरमीत राम रहीम 23 अक्टूबर 2002 को जालंधर के एक सत्संग से वापस सिरसा पहुंचा तो उसे कृष्ण लाल ने अखबार दिखाया, जिसमें साध्वियों के यौन शोषण के बारे में खबर छपी थी।

खबर पढ़ते ही गुरमीत तिलमिला उठा। उसने मेरे सामने कृष्ण लाल, कुलदीप और निर्मल को आदेश दिया कि रामचंद्र छत्रपति को मौत के घाट उतार दो। 24 अक्टूबर 2002 को रामचंद्र छत्रपति को उसके घर के बाहर गोलियों से भून दिया गया था।

सीबीआई ने साबित किया किशनलाल की रिवाल्वर थी
सीबीआई ने चश्मदीदों के अलावा कोर्ट में यह भी साबित किया कि जिस रिवाल्वर से रामचंद्र को गोली मारी गई थी, वह आरोपी किशन लाल की लाइसेंसी रिवाल्वर थी। किशन लाल ने 23 अक्टूबर को यह रिवाल्वर आरोपी निर्मल सिंह और कुलदीप को दी थी। इस तथ्य को सीबीआई ने ब्लैस्टिक एक्सपर्ट से भी कोर्ट में साबित करवाया। एक्सपर्ट ने कोर्ट में बताया था कि गोली उसी रिवाल्वर से चली थी, जो कि किशन लाल के नाम पर रजिस्टर्ड थी।

एक बार गवाही देने के बाद मुकर गया था खट्टा सिंह

Verdict on Ram Rahim in Chhatrapati Murder Case, Dera Sacha Sauda
Ram Rahim - फोटो : File Photo

खट्टा सिंह एक बार मामले में अपने बयान से मुकर गया था। राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में सजा होने के बाद एक बार फिर खट्टा सामने आया और उसने सीबीआई कोर्ट में अपने बयान दर्ज करवाए और अपना पुराना बयान दोहराया। 

खट्टा सिंह ने कहा था कि वर्ष 2012 से 2018 तक वह डेरा प्रमुख के खिलाफ इसलिए सामने नहीं आया था, क्योंकि डेरा प्रमुख खुलेआम घूम रहा था। उसके परिवार को जान का खतरा था। खट्टा ने सीबीआइ अदालत में बताया था कि यदि वह डेरा प्रमुख के खिलाफ पहले बयान दे देता तो उसे और उसके बेटे को डेरा प्रमुख जान से मरवा सकता था। इसकी मुझे धमकियां मिली थीं।

विजय चिह्न दिखाकर अंशुल ने जाहिर की खुशी
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति का बेटा अंशुल छत्रपति कोर्ट का फैसला आने के बाद वह अपनी खुशी को रोक नहीं पाया और बाहर आते ही विजय चिह्न दिखाकर खुशी का इजहार किया। अंशुल ने बताया कि जज भगवान के रूप में आए और वह आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा सुनाई। 

इसी के साथ वह उन सभी लोगों का धन्यवाद करते हैं जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। अंशुल ने गवाहों का भी आभार जताया है जिन्होंने कोर्ट के समक्ष मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे।

उम्र कैद या फिर हो सकती है फांसी की सजा

सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा ने कहा कि कोर्ट दोषियों को कम से कम उम्र कैद और अधिक से अधिक फांसी की सजा सुना सकती है। कोर्ट कहां सजा सुनाएगी इसकी जानकारी 17 जनवरी से पहले दे दी जाएगी। क्योंकि अभी पुलिस और प्रशासन की तरह से कुछ कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जाना है इसी के मद्देनजर कोर्ट ने सजा के लिए 17 तारीख सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि सजा पर बहस होना बाकी है।   

ऐसी सजा मिले कि लोगों को नसीहत मिले
गुरमीत राम रहीम के ड्राइवर खट्टा सिंह ने कहा कि कोर्ट से वह ऐसी सजा की मांग करते हैं कि भविष्य में कोई व्यक्ति इस तरह की वारदात को अंजाम देने से पहले सौ बार सोचे। खट्टा सिंह ने कहा कि हत्या के बाद से आज तक कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। वह जिंदा हैं इसके लिए श्री दरबार साहिब अरदास करने के लिए जाएंगे।

क्या है मामला
24 अक्तूबर 2002 में सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को घर के बाहर गोलियों से भून दिया गया था। जिसके बाद उसके बेटे अंशुल ने बताया कि उसके पिता लगातार डेरे में रह रही साध्वियों के साथ हुए यौन शोषण संबंधी खबरों को प्रकाशित कर रहे थे। जिससे डेरामुखी नाराज थे। इसलिए डेरामुखी के कहने पर ही उनके पिता की हत्या की गई। मामले की सीबीआई जांच शुरू हुई लंबी चली जांच के बाद यह मामला 2007 में सीबीआई कोर्ट में पहुंचा। 

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