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वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील: ढींगरा आयोग की रिपोर्ट CBI को सौंपने की तैयारी

Sun, 20 Nov 2016 12:31 AM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 20 Nov 2016 12:31 AM IST
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Vadra-DLF land deal, Dhingra Commission report preparing to hand over to CBI
रॉबर्ट वाड्रा - फोटो : file photo
राबर्ट वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील की जांच को गठित ढींगरा आयोग की रिपोर्ट को हरियाणा सरकार सीबीआई को सौंपने की तैयारी कर रही है। सरकार ने अंदरखाते इसकी तैयारी पूरी कर ली है। किसी भी समय इसका खुलासा किया जा सकता है। सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साफ किया है कि सरकार ने आयोग की रिपोर्ट के अध्ययन के बाद सीएलयू का अधिकार अधिकारियों को देकर पारदर्शिता बरती है।
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आयोग ने कुछ और सिफारिशें भी की हैं, जिसमें आगे जांच की जरूरत है। लिहाजा, सरकार यह सोच रही है कि किस एजेंसी से अब इस मामले की जांच करवाई जाए। आगामी विधानसभा सत्र में यह रिपोर्ट सदन के पटल पर आ जाएगी, क्योंकि छह माह में रिपोर्ट सार्वजनिक करनी आवश्यक है। 
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सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में गुड़गांव के दो सेक्टरों पर सवालिया निशान लगाया गया है। इन सेक्टरों को काटे जाने पर सवाल उठाया गया है। इसके साथ ही सीएलयू देने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा किया गया है। अब सरकार ने सीएलयू देने की प्रक्रिया में तो पारदर्शिता बरती है, लेकिन अभी तक रिपोर्ट के अन्य पहलू उजागर नहीं किए हैं।
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विधानसभा के आगामी सत्र में सार्वजनिक होगी ढींगरा आयोग की रिपोर्ट

Vadra-DLF land deal, Dhingra Commission report preparing to hand over to CBI
vadra dhingra - फोटो : File Photo
मुझे अपनी रिपोर्ट में जो सिफारिश देनी थी वह दे दी हैं। अब यह सरकार देखेगी कि उसे आगे क्या करना है। -जस्टिस एसएन ढींगरा

खेमका ने किया था खुलासा
ढींगरा आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक होने का इंतजार सबसे ज्यादा हरियाणा के आईएएस अशोक खेमका को है। खेमका ने इस पूरे प्रकरण में आवाज उठाई थी। उन्होंने वाड्रा डीएलएफ लैंड डील पर सवाल खड़ा किया था, जिसके बाद भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस मामले में आयोग बिठाया था।

मुख्यमंत्री ने किया कटाक्ष
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पूर्व समय के दौरान हरियाणा में रहे मुख्यमंत्रियों पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा है कि वर्ष 1991 से लेकर अभी तक सीएलयू व लाइसेंस से जुड़ी तमाम फाइलें मुख्यमंत्री कार्यालय तक आ रही थीं। इस परंपरा को किसी भी सरकार के समय रोका नहीं गया। मौजूदा सरकार ने एक नवंबर, 2016 से सीएलयू व लाइसेंस के अधिकार विभाग के निदेशक को सौंप दिए हैं।
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