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यूटी इंटर डिपार्टमेंटल पॉलिसी अवैध करार, कैट ने पॉलिसी के तहत हुए सभी ट्रांसफर को किया रद्द
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 08 Apr 2017 12:49 AM IST
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यूटी इंटर डिपार्टमेंटल पॉलिसी अवैध करार
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केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव द्वारा बनवाई गई इंटर डिपार्टमेंटल ट्रांसफर पॉलिसी को अवैध करार दिया है। शुक्रवार को ट्रिब्यूनल ने यूटी इंप्लाइज की ओर से दायर केस पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं। साथ ही इस पॉलिसी के तहत अब तक हुए सभी ट्रांसफर को रद्द (क्वैश) कर दिया है। इस आदेश के बाद यूटी प्रशासन के कई कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
बता दें कि यूटी प्रशासन ने इस साल फरवरी में 289 और पिछले साल मई में 348 कर्मचारी-अधिकारियों को इंटर डिपार्टमेंट ट्रांसफर पॉलिसी के तहत ट्रांसफर किया था। ट्रिब्यूनल के इस आदेश के बाद सभी ट्रांसफर रद्द हो जाएंगे और सभी कर्मचारी अपने विभाग में वापस आ जाएंगे।
इससे पहले शुक्रवार को मामले पर बहस करते हुए याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि प्रशासन ने जो ट्रांसफर किए हैं वह संवैधानिक तौर पर सही नहीं है। प्रशासन बिना कर्मियों को उनकी सहमति के उन्हें उनके कैडर के बाहर ट्रांसफर नहीं कर सकता। इसके अलावा यह कैडर रूल के खिलाफ है। वहीं यूटी प्रशासन की ओर से पेश हुए काउंसिल ने ट्रिब्यूनल में दलील दी कि इंटर डिर्पाटमेंटल पॉलिसी प्रशासन ने 2015 में यूटी प्रशासक की अनुमति के बाद बनाई थी। यह पूरी तरह से संवैधानिक है। इसी के तहत कर्मियों को इंटर डिपार्टमेंट ट्रांसफर किया गया था।
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बता दें कि यूटी प्रशासन ने इस साल फरवरी में 289 और पिछले साल मई में 348 कर्मचारी-अधिकारियों को इंटर डिपार्टमेंट ट्रांसफर पॉलिसी के तहत ट्रांसफर किया था। ट्रिब्यूनल के इस आदेश के बाद सभी ट्रांसफर रद्द हो जाएंगे और सभी कर्मचारी अपने विभाग में वापस आ जाएंगे।
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इससे पहले शुक्रवार को मामले पर बहस करते हुए याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि प्रशासन ने जो ट्रांसफर किए हैं वह संवैधानिक तौर पर सही नहीं है। प्रशासन बिना कर्मियों को उनकी सहमति के उन्हें उनके कैडर के बाहर ट्रांसफर नहीं कर सकता। इसके अलावा यह कैडर रूल के खिलाफ है। वहीं यूटी प्रशासन की ओर से पेश हुए काउंसिल ने ट्रिब्यूनल में दलील दी कि इंटर डिर्पाटमेंटल पॉलिसी प्रशासन ने 2015 में यूटी प्रशासक की अनुमति के बाद बनाई थी। यह पूरी तरह से संवैधानिक है। इसी के तहत कर्मियों को इंटर डिपार्टमेंट ट्रांसफर किया गया था।
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पूर्व एडवाइजर देव ने बनवाई थी पॉलिसी
पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव ने इंटर डिपार्टमेंटल ट्रांसफर पॉलिसी बनवाई थी। पॉलिसी बनाने के पीछे उनका उद्देश्य काम में तेजी लाना और लोगों को कम से कम समय में सेवा उपलब्ध करवाना था। एस्टेट ऑफिस और दूसरे कई विभागों की शिकायत आती रही हैं। पॉलिसी बनने के बाद पर्सोनल विभाग ने सभी विभागों से कर्मचारियों और पदों का डाटा जुटाया। कई विभाग ऐसे मिले जहां कर्मचारी खाली बैठे हुए हैं, जबकि कई जगह वर्कलोड था। साथ ही कुछ लोग दशकों से एक ही सीट पर जमे हुए मिले। इन सब चीजों पर गौर करते हुए ट्रांसफर आर्डर हुए। इन ट्रांसफर के बाद कई कर्मचारियों में खुशी की लहर थी तो कुछ गम में थे।
637 कर्मी हुए थे ट्रांसफर
यूटी प्रशासन ने पिछले साल 10 मई को एक साथ 348 अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रांसफर किया था। इतने बड़े स्तर पर ट्रांसफर ऑर्डर आने के बाद यूटी सचिवालय सहित अन्य सभी विभागों में खलबली मच गई थी। यह सभी ट्रांसफर इंटर डिपार्टमेंट ट्रांसफर पॉलिसी के तहत किए गए थे। इन ट्रांसफर में सुपरिंटेंडेंट, सीनियर असिस्टेंट, सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर, जूनियर असिस्टेंट/क्लर्क और स्टेनो टाइपिस्ट शामिल थे।
इसके बाद यूटी प्रशासन ने इस साल 31 जनवरी को फिर से बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए इंटर डिपार्टमेंट ट्रांसफर पॉलिसी के तहत 289 कर्मियों को ट्रांसफर किया। प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ 82 कर्मी ट्रिब्यूनल पहुंच गए थे। ट्रिब्यूनल ने उन्हें राहत देते हुए अगले आदेश तक यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। शुक्रवार को ट्रिब्यूनल से राहत मिलने के बाद सभी कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
फोन पर होते रहे पल-पल के अपडेट
सुबह से ही ट्रिब्यूनल में यूटी प्रशासन के सौ से अधिक कर्मचारी ट्रिब्यूनल में मामले की सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। सुबह करीब 12 बजे से शुरू हुई सुनवाई शाम तक चली। इस दौरान कर्मचारियों में पल-पल हलचल मची रही। वहीं कई कर्मचारी फोन पर पल-पल की अपडेट अन्य कर्मचारियों को देते रहे। देर शाम ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद सभी कर्मचारियों में खुशी की लहर फैल गई और एक-दूसरे को फोन पर बधाइयां देते दिखे।