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सुखना मामले में यूटी प्रशासन ने खड़े किए हाथ, अब पंजाब-हरियाणा करेंगे मदद
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 10 Dec 2016 09:29 AM IST
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सुखना लेक को लेकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश
- फोटो : फाइल फोटो
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सुखना लेक के गिरते स्तर को लेकर दिए गए सुझावों के मामले में यूटी प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर की ओर से दिए गए पत्र में एक -एक कर सभी प्रस्तावों में आने वाली खामियों को बताते हुए अपनी विवशता जाहिर कर दी है। हाईकोर्ट ने इस पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिव, चंडीगढ़ से प्रशासक के सलाहकार, तीनों के चीफ इंजीनियर तथा चंडीगढ़ के मुख्य वन संरक्षक को 22 दिसंबर को बैठककर समस्याओं और उनके समाधान पर विचार करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 दिसंबर को होगी।
शुक्रवार को यूटी प्रशासन की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया कि सेक्टर 28 स्थित पंपिंग स्टेशन में मौजूद पानी इतनी गुणवत्ता का नहीं बनाया जा सकता है, जिसे सुखना लेक में डाला जा सके। इसके चलते इन सुझाव को सुखना के लिए सही नहीं करार दिया गया है। इसके बाद लेक के एक्सपर्ट सतविंदर पाल सिंह रंधावा की रंधावा ब्रोसंस इंटरप्राइजेज की तरफ से टीटी वाटर ट्रीट करने के लिए सेक्टर 28 के पंपिंग स्टेशन पर हुई बैठक की जानकारी दी गई। बताया गया कि बैठक में रंधावा ने प्रजेंटेशन दी है।
उन्होंने एरिएशन सिस्टम को इंस्टाल करने की संभावना के बारे में बात की है, जो सेक्टर 28 में मौजूद अंडर ग्राउंड रिजर्वर के लिए है। इसके बारे में भी एसई ने संशय जाहिर करते हुए कहा है कि यह केवल ट्रायल बेस है। इसके सटीक परिणामों के बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। इसके बाद आईआईटी रुड़की और सेंट्रल पावर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट अमृतसर द्वारा लेक में पानी का स्तर बढ़ाने के लिए दिए गए सुझावों का ब्यौरा दिया गया। एमसी और इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से बैठक आयोजित की गई।
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शुक्रवार को यूटी प्रशासन की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया कि सेक्टर 28 स्थित पंपिंग स्टेशन में मौजूद पानी इतनी गुणवत्ता का नहीं बनाया जा सकता है, जिसे सुखना लेक में डाला जा सके। इसके चलते इन सुझाव को सुखना के लिए सही नहीं करार दिया गया है। इसके बाद लेक के एक्सपर्ट सतविंदर पाल सिंह रंधावा की रंधावा ब्रोसंस इंटरप्राइजेज की तरफ से टीटी वाटर ट्रीट करने के लिए सेक्टर 28 के पंपिंग स्टेशन पर हुई बैठक की जानकारी दी गई। बताया गया कि बैठक में रंधावा ने प्रजेंटेशन दी है।
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उन्होंने एरिएशन सिस्टम को इंस्टाल करने की संभावना के बारे में बात की है, जो सेक्टर 28 में मौजूद अंडर ग्राउंड रिजर्वर के लिए है। इसके बारे में भी एसई ने संशय जाहिर करते हुए कहा है कि यह केवल ट्रायल बेस है। इसके सटीक परिणामों के बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। इसके बाद आईआईटी रुड़की और सेंट्रल पावर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट अमृतसर द्वारा लेक में पानी का स्तर बढ़ाने के लिए दिए गए सुझावों का ब्यौरा दिया गया। एमसी और इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से बैठक आयोजित की गई।
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हाईकोर्ट ने इन सभी सुझावों पर एक साथ विचार करने के लिए दिए निर्देश
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
इस दौरान एमसी चंडीगढ़ के चीफ इंजीनियर ने बताया कि गोल्फ कोर्स के नजदीक बने सात ट्यूबवैल को सर्दियों के दौरान सुखना में पानी लाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जब पानी की मांग कम हो। इस पर भी एईई ने कहा कि यहां प्राथमिकता पीने के पानी की उपलब्धता होगी। इन ट्यूबवेल से 1.25 से 1.5 मिलियन गैलन प्रतिदिन पानी प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में सुखना के लिए समर्पित नई लाइन गोल्फकोर्स के नजदीक इंजीनियरिंग विभाग को बिछानी होगी, जिससे पानी को सुखना में ले जाया जा सके। इसके साथ ही वर्तमान में ट्यूबवेलों की मशीनरी को भी अपग्रेड करने की जरूरत बताई गई।
रज्जीपुर कैचमेंट एरिया में मौजूद चो पर प्रशासन की ओर से संशय जता दिया गया। एसई ने पत्र में कहा कि अभी यहां से पाने ले जाने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए इस बारे में विस्तृत स्टडी जरूरी है। इसके साथ ही इससे सुखना के बीच एक छोटे पहाड़ का भी जिक्र किया गया। कहा गया कि इस पहाड़ से एक टनल बनानी होगी, ताकि पानी को दूसरी ओर लेकर जाया जा सके। इसके लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी और यह मामला इंटर स्टेट भी हो जाएगा, क्योंकि सुझाव के अनुसार जिस पहाड़ में टनल बनानी है वह हरियाणा में पड़ता है। सिसवां डैम से पानी लाने की संभावना पर प्रशासन की ओर से दूरी का हवाला दिया गया। प्रशासन ने कहा कि सिसवां डैम से सुखना की दूरी 15 किमी की है। इसके साथ ही यहां से पानी मिले इसे पंजाब सरकार को सुनिश्चित करना होगा।
इन सभी पक्षों पर अपनी दलील देने के बाद अब यूटी प्रशासन ने गेंद हरियाणा और पंजाब के पाले में डाल दी है। हाईकोर्ट ने इस पत्र को देखने के बाद कहा है कि अब तीनों को मिलकर काम करना होगा, ताकि सुखना को बचाया जा सके। इन सभी प्रपोजल पर चर्चा के लिए तीनों साथ बैठे। हाईकोर्ट ने आदेश जारी किए कि 22 दिसंबर को दोनों राज्यों के मुख्य सचिव, चंडीगढ़ से प्रशासक के सलाहकार, तीनों के चीफ इंजीनियर तथा चंडीगढ़ के मुख्य वन संरक्षक हाईकोर्ट में एकत्रित होंगे और मीटिंग रूम में चर्चा कर 23 दिसंबर को होने वाली सुनवाई पर इस बारे में सूचित करेंगे।
रज्जीपुर कैचमेंट एरिया में मौजूद चो पर प्रशासन की ओर से संशय जता दिया गया। एसई ने पत्र में कहा कि अभी यहां से पाने ले जाने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए इस बारे में विस्तृत स्टडी जरूरी है। इसके साथ ही इससे सुखना के बीच एक छोटे पहाड़ का भी जिक्र किया गया। कहा गया कि इस पहाड़ से एक टनल बनानी होगी, ताकि पानी को दूसरी ओर लेकर जाया जा सके। इसके लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी और यह मामला इंटर स्टेट भी हो जाएगा, क्योंकि सुझाव के अनुसार जिस पहाड़ में टनल बनानी है वह हरियाणा में पड़ता है। सिसवां डैम से पानी लाने की संभावना पर प्रशासन की ओर से दूरी का हवाला दिया गया। प्रशासन ने कहा कि सिसवां डैम से सुखना की दूरी 15 किमी की है। इसके साथ ही यहां से पानी मिले इसे पंजाब सरकार को सुनिश्चित करना होगा।
इन सभी पक्षों पर अपनी दलील देने के बाद अब यूटी प्रशासन ने गेंद हरियाणा और पंजाब के पाले में डाल दी है। हाईकोर्ट ने इस पत्र को देखने के बाद कहा है कि अब तीनों को मिलकर काम करना होगा, ताकि सुखना को बचाया जा सके। इन सभी प्रपोजल पर चर्चा के लिए तीनों साथ बैठे। हाईकोर्ट ने आदेश जारी किए कि 22 दिसंबर को दोनों राज्यों के मुख्य सचिव, चंडीगढ़ से प्रशासक के सलाहकार, तीनों के चीफ इंजीनियर तथा चंडीगढ़ के मुख्य वन संरक्षक हाईकोर्ट में एकत्रित होंगे और मीटिंग रूम में चर्चा कर 23 दिसंबर को होने वाली सुनवाई पर इस बारे में सूचित करेंगे।