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कांट्रैक्ट टीचरों को कैट ने दी राहत, पे स्केल और महंगाई भत्ता देने के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 02 Mar 2017 09:53 AM IST
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Central Administrative Tribunal
- फोटो : File Photo
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यूटी में विभिन्न सरकारी कॉलेजों में तैनात कांट्रैक्ट टीचरों को केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने राहत दी है। बुधवार को 166 याचिकाकर्ताओं के मामले की सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने यूटी प्रशासन को सभी कॉन्ट्रैक्ट लेक्चरर को उचित पे स्केल और महंगाई भत्ता देने के आदेश दिए हैं। इससे पहले 2011 और बाद में अक्तूबर 2016 में ट्रिब्यूनल ने यूटी प्रशासन को 580 के करीब याचिकाकर्ताओं (कॉन्ट्रैक्ट लेक्चरर) को उचित पे स्केल और महंगाई भत्ता देने के आदेश दिए थे।
यूटी प्रशासन की ओर से सुनवाई के दौरान दाखिल एफिडेविट में कहा गया कि वह महंगाई भत्ते के तौर पर अब तक 2.42 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं। साथ ही बताया गया कि प्रशासन ट्रिब्यूनल के 24 मार्च 2011 के आदेश का पूरी तरह से पालन कर रहा है। वहीं ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि अगर प्रशासन की ओर से उन्हें डीए और उचित सैलरी को भुगतान नहीं किया जाता है तो वह नई याचिका दायर कर सकते हैं।
अप्रैल 2013 में शालिनी वाधवा और 165 अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर एग्जीक्यूशन पिटीशन में कहा गया था कि यूटी प्रशासन ट्रिब्यूनल के मार्च 2011 के आदेश का पालन नहीं कर रहा है। इसलिए पिछले उनकी प्रापर्टी अटैच करने के आदेश दिए जाएं। इस पर 1 सितंबर 2016 को ट्रिब्यूनल ने एजुकेशन सेक्रेटरी और डायरेक्टर हायर एजुकेशन को ‘सुओ मोटो नोटिस’ जारी किया था। साथ ही उनसे पूछा कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने 7 अक्तूबर को एजुकेशन सेक्रेटरी और डायरेक्टर हायर एजुकेशन की प्रापर्टी अटैच करने के आदेश दिए थे। मामले में प्रशासन की ओर से अदालत में पेश न होने पर प्रतिवादी पक्ष पर 10 हजार रुपये ‘कॉस्ट’ भी लगाई गई थी।
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इसके बाद 25 अक्तबूर 2016 को ट्रिब्यूनल ने यूटी प्रशासन को कांट्रेक्ट लेक्चरर्स को दो सप्ताह में पैसे जारी करने के आदेश दिए थे। साथ ही आदेश न मानने पर सरकारी प्रापर्टी अटैच करने के आदेश दिए थे। इस पर प्रशासन ने ट्रिब्यूनल में कांट्रैक्ट टीचरों को जल्द ही पैसे जारी करने की बात कही थी।
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यूटी प्रशासन की ओर से सुनवाई के दौरान दाखिल एफिडेविट में कहा गया कि वह महंगाई भत्ते के तौर पर अब तक 2.42 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं। साथ ही बताया गया कि प्रशासन ट्रिब्यूनल के 24 मार्च 2011 के आदेश का पूरी तरह से पालन कर रहा है। वहीं ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि अगर प्रशासन की ओर से उन्हें डीए और उचित सैलरी को भुगतान नहीं किया जाता है तो वह नई याचिका दायर कर सकते हैं।
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अप्रैल 2013 में शालिनी वाधवा और 165 अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर एग्जीक्यूशन पिटीशन में कहा गया था कि यूटी प्रशासन ट्रिब्यूनल के मार्च 2011 के आदेश का पालन नहीं कर रहा है। इसलिए पिछले उनकी प्रापर्टी अटैच करने के आदेश दिए जाएं। इस पर 1 सितंबर 2016 को ट्रिब्यूनल ने एजुकेशन सेक्रेटरी और डायरेक्टर हायर एजुकेशन को ‘सुओ मोटो नोटिस’ जारी किया था। साथ ही उनसे पूछा कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने 7 अक्तूबर को एजुकेशन सेक्रेटरी और डायरेक्टर हायर एजुकेशन की प्रापर्टी अटैच करने के आदेश दिए थे। मामले में प्रशासन की ओर से अदालत में पेश न होने पर प्रतिवादी पक्ष पर 10 हजार रुपये ‘कॉस्ट’ भी लगाई गई थी।
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इसके बाद 25 अक्तबूर 2016 को ट्रिब्यूनल ने यूटी प्रशासन को कांट्रेक्ट लेक्चरर्स को दो सप्ताह में पैसे जारी करने के आदेश दिए थे। साथ ही आदेश न मानने पर सरकारी प्रापर्टी अटैच करने के आदेश दिए थे। इस पर प्रशासन ने ट्रिब्यूनल में कांट्रैक्ट टीचरों को जल्द ही पैसे जारी करने की बात कही थी।