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UPSC CSE Final Result 2020: चंडीगढ़ की डॉ. अक्षिता ने पाई 69 रैंक, राजेश कुमार को भी मिली सफलता

Fri, 24 Sep 2021 11:56 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 24 Sep 2021 11:56 PM IST
सार

चंडीगढ़ की रहने वाली डॉ. अक्षिता ने पहले प्रयास में 69वीं रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन कर दिया। सेक्टर- 39 के रहने वाले डॉ. राजेश कुमार मोहन ने भी 102वीं रैंक हासिल की है। वहीं सेक्टर- 7 की रहने वाली अंकिता पंवार को 321वीं रैंक मिली है।  

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UPSC CSE Final Result 2020 Dr Akshita from Chandigarh got 69 rank in first Attempt
अपने माता-पिता के साथ अंकिता पंवार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने शुक्रवार की शाम सिविल सर्विसेज के अंतिम परिणाम जारी कर दिए हैं। टॉप 100 में चंडीगढ़ के सेक्टर 32 निवासी डॉ. अक्षिता गुप्ता ने जगह बनाई है। उन्हें 69वीं रैंक मिली है। वहीं शहर के ही सेक्टर-39 निवासी डॉ. राजेश कुमार मोहन ने 102वीं रैंक पाई है। सेक्टर-सात निवासी अंकिता पंवार को 321वीं रैंक मिली है। इस बार भी सरकारी मॉडल स्कूलों ने सिविल सेवा में बेहतर प्रदर्शन किया है।

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सिविल सेवा के परिणाम शाम को जारी हुए तो कुछ देर तक वेबसाइट हैंग रही। हालांकि कुछ देर में ही परिणाम आने शुरू हो गए। ओवरऑल परिणाम की बात करें तो यूपीएससी ने 761 विद्यार्थियों को बेहतर पाया है। रैंक के मुताबिक उन्हें पद दिए जाएंगे। चंडीगढ़ की डॉ. अक्षिता गुप्ता ने पहली ही बार में यह परीक्षा पास कर ली। उन्होंने सेल्फ स्टडी की थी। इसी तरह पंचकूला निवासी अंकिता गुप्ता ने दूसरी बार परीक्षा दी थी। उन्होंने भी सेल्फ स्टडी की थी।
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एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान की तैयारी, तीन साल में मिली सफलता: अक्षिता
सिविल सेवा में 69 रैंक पाने वाली डॉ. अक्षिता को तीन साल पहले एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान आईएएस बनने का ख्याल आया और उसके बाद सिविल सेवा की तैयारी में जुट गईं तीन ही साल में उन्होंने मंजिल पा ली। कहती हैं कि आईएएस बनकर शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करेंगी। उनके पिता पवन गुप्ता पंचकूला के सेक्टर-12ए स्थित मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। उनकी माता मीना गुप्ता गवनर्मेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल रामगढ़ पंचकूला में गणित की लेक्चरर (प्रवक्ता) हैं। 

माता-पिता बेटी की सफलता पर खुश हैं। कहते हैं कि बेटी ने 10वीं की पढ़ाई यमुनानगर के स्वामी विवेकानंद स्कूल से की थी और कक्षा 12 गवनर्मेंट मॉडल स्कूल सेक्टर-33 चंडीगढ़ से की। उसके बाद नीट में बाजी मारी और जीएमसीएच-32 से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू कर दी। 

तृतीय वर्ष में सिविल सेवा में जाने का ख्याल आया और पढ़ाई शुरू की तो रुचि जगती गई। कहती हैं कि कोरोना के कारण घर में रहना हुआ और पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिल गया। युवा टाइम टेबल बनाकर नोट्स तैयार करें और नियमित अध्ययन करें। उनका भाई आईआईटी बांबे से पढ़ाई करके इंजीनियर बना है।  

जो पद मिलेगा, स्वीकार करते हुए आईएएस की तैयारी करूंगी: अंकिता
चंडीगढ़ के सेक्टर सात निवासी अंकिता पंवार ने सेल्फ स्टडी करते हुए 321वीं रैंक पाई है। उन्होंने दूसरे प्रयास में यह मंजिल पाई है। उनके पिता भूप सिंह पंचकूला स्थित साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग हरियाणा में साइंटिफिक इंजीनियर हैं। उनकी माता कमलेश पंवार गृहिणी हैं। माता-पिता बेटी की सफलता पर खुश हैं। कहते हैं कि बेटी ने नाम कर दिया। 

अंकिता का कहना है कि उनका सपना आईएएस बनने का है। रैंक के मुताबिक जो भी पद मिलेगा, उस पर काम करते हुए आईएएस की तैयारी करेंगी। उन्होंने कक्षा 12 की पढ़ाई गवनर्मेंट मॉडल स्कूल सेक्टर-19 चंडीगढ़ से की है। उसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से बीटेक किया और वर्ष 2017 से 2019 तक बंगलूरू में इंजीनियर बनकर जॉब की।

उन्होंने वर्ष 2019 में भी सिविल सेवा की परीक्षा दी लेकिन सफल नहीं हो सकी। उसके बाद जॉब छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गई और दूसरी बार में मंजिल पाई। कहती हैं कि कोरोना ने पढ़ाई प्रभावित नहीं की। उन्होंने युवाओं से कहा है कि कड़ी मेहनत से ही सफलता मिलती है, बस अध्ययन लगातार होना चाहिए। 

आईपीएस बनने का लक्ष्य, पांचवे चरण में सफलता मिली: डॉ. राजेश

                                                         राजेश कुमार मोहन

जीएमसीएच-32 से एमबीबीएस की पढ़ाई करके डॉक्टर बने राजेश कुमार मोहन का लक्ष्य आईपीएस बनने का है जो पूरा हुआ। उन्हें 102वीं रैंक मिली है। कहते हैं कि पांच साल से तैयारी कर रहे थे। पांचवी बार में सफलता मिली है। उनके पिता राज कंवर हरियाणा सचिवालय में काम करते हैं। पिता बेटे की सफलता से खुश हैं। डॉ. राजेश का कहना है कि वर्ष 2009 से 2014 तक एमबीबीएस की पढ़ाई की। उसके बाद ऑर्डिनेंस केबल फैक्ट्री चंडीगढ़ में मेडिकल ऑफिसर बने। वहां से नौकरी छोड़ने के बाद तिहाड़ जेल दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं।

दिल्ली में वह कोविड ड्यूटी पर हैं। उन्होंने कक्षा आठ से 12 तक की पढ़ाई मॉडल स्कूल चंडीगढ़ सेक्टर-16 से की है। डॉ. राजेश कहते हैं कि कोरोना हुआ और ठीक हुआ लेकिन तैयारी प्रभावित नहीं होने दी। कहते हैं कि साक्षात्कार का अभ्यास दर्पण के सामने खड़े होकर कई बार किया। गाइडेंस भी लिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि नियमित अध्ययन करें और अभ्यास करते रहें। उन्होंने बताया कि वह मूलत: हरियाणा के रोहतक जिले के गांव भराण के रहने वाले हैं। वह चंडीगढ़ के सेक्टर-39 में रहकर की पढ़ाई करते रहे। सिविल सर्विस की कोचिंग ऑनलाइन ली थी। 

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