UPSC result: करनाल की चंद्रीमा ने हासिल किया 72वां स्थान, विक्रम दहिया को भी मिली सफलता
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करनाल के गांव अरडाना की चंद्रीमा अत्री ने पहली कोशिश में ही यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया में 72वां रैंक पाया है। बचपन से चंद्रीमा को उसके दादा स्व. बीएल अत्री (इनकम टैक्स विभाग से डीटीओ रिटायर्ड) ने आईएएस बनने का सपना दिखाया था। चंद्रीमा ने बताया कि उसने ग्रेजुएशन दिल्ली से की और वहीं से एलएलबी की। साथ ही यूपीएससी की तैयारी की।
बचपन से ही दादा ने अखबार, मैगजीन व स्कूली सेलेबस से बाहर की तैयारी करवानी शुरू कर दी थी। परिवार ने भी पूरा साथ दिया। इसी सहयोग से उसने पहली ही कोशिश में 72वां अंक हासिल किया। पिता राजेश अत्री बिजनेसमैन हैं। माता गृहिणी हैं। उसके परिवार में उसकी दादी के अलावा भाई भी है। पूरा परिवार अब पानीपत के मॉडल टाउन में रहता है।
रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर के बेटे ने पास की यूपीएससी की परीक्षा
कुछ बातें हमारे जीवन को बदल सकती हैं। बस उन्हें मन में घर कर जाने के बाद मेहनत करनी पड़ती है। करनाल के सेक्टर सात निवासी विक्रम दहिया का जीवन भी उसके पिता की बातों ने बदल दिया। अब वह यूपीएससी की परीक्षा में 562वां रैंक प्राप्त की। विक्रम के पिता केएस दहिया फूड एंड सप्लाई विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पद से रिटायर्ड हैं।
विक्रम का कहना है कि पिता जब ड्यूटी से आते थे तो आफिस की बातें बताते थे कि किस तरह आईएएस और आईपीएस अफसर काम करते हैं, कैसे निर्णय लेते हैं। उनके एक फैसले से समाज में बदलाव आता है। बस पिता की यही कहानियां उसके मन में घर कर गई और उसने खुद ऐसा अफसर बनने का सपना सजोकर मेहनत शुरू कर दी। आज दिन रात मेहनत के बल पर उसने मुकाम पा लिया है। उसका कहना है कि कानून का सख्ती से पालन कराने के लिए वह काम करेगा। मौका मिला तो हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर के लिए भी काम करेंगे।
भोपाल से बीटेक फिर चार कंपनियों में की नौकरी
विक्रम ने बताया कि उसने करनाल के ही प्राइवेट स्कूलों से 12वीं तक पढ़ाई की। इसके बाद एनआईटी भोपाल से उसने बीटेक किया। फिर आईएम रोहतक से एमबीए करने के बाद चार प्राइवेट कंपनियों में नौकरी की। लास्ट जॉब लावा इंटरनेशनल मुंबई में की थी। इसी दौरान उसने यूपीएससी की परीक्षा पास की। लगातार मेहनत के बल पर पहली बार इंटरव्यू राउंड में पहुंचे और सफलता मिली।
कुछ बनने की वजह ही हमें मोटिवेशन देती है
युवाओं को अपने संदेश में विक्रम ने कहा कि वे अपना लक्ष्य तय करें। गाइडेंस पर चलें, मिस गाइड न हों। लाइफ में अप डाउन तो होता ही रहता है। जब डाउन होता है तो ज्यादा मोटिवेशन की जरूरत होती है। सबसे बड़ा फैक्टर तो यह है कि आप कुछ क्यों करना चाहते हैं? अगर आपके पास उसकी वजह है तो वह आपको मोटिवेट करके रखेगी। पर अगर सिर्फ पावर के लिए करना चाहते हो तो वह छोटा मोटिवेशन होगा। दीर्घकालीन मोटिवेशन होना बहुत जरूरी है।
ढोल बजाकर मनाया जश्न, दिनभर रहा बधाई का दौर
बेटे की उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। करनाल पहुंचने पर परिवार वालों ने ढोल बजाकर स्वागत किया। आरती उतारने के बाद उसका मुंह मीठा कराया। अपनी सफलता का श्रेय विक्रम ने परिवार को दिया। विक्रम के भाई विश्वजीत दहिया एडवोकेट हैं। उन्होंने बताया कि दिनरात विक्रम पढ़ाई करता था। कभी किसी भी स्थिति को उसने खुद पर हावी नहीं होने दिया।