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नगर निगम सदन में फिर गरमाएगा उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट का मामला
ब्यूरो, अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Mon, 27 Jun 2016 09:39 PM IST
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चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक
- फोटो : amar ujala
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मनीमाजरा स्थित उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट मामला सदन में एक बार फिर से गरमाने के आसार हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत 15 फीसदी ईडब्ल्यूएस के फ्लैट्स का निर्माण शर्त के अनुसार नहीं किया गया था। बुधवार को सदन की होने वाली बैठक में यह मुद्दा फिर उठने जा रहा है।
भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार हैं। भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने इस प्रोजेक्ट से संबंधित कुछ सवाल पूछे थे, इनके जवाब पर चर्चा होगी। मालूम हो कि उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट में जमीन अलॉटमेंट की शर्त के अनुसार बनने वाले 15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस के फ्लैट्स का निर्माण नहीं हुआ है। इसको लेकर प्रशासन और नगर निगम के पूर्व अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की।
इस मामले में सीबीआई भी जांच कर चुकी है। एजेंसी ने वर्ष 2012 में जांच करके प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी थी, इसमें तीन अधिकारियों पर विभागीय जांच की सिफारिश की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
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सीबीआई ने जांच में पाया था कि 15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस के फ्लैट्स न बनने के बावजूद इस प्रोजेक्ट को संपदा विभाग की ओर से कंपलिशन प्रमाणपत्र दिया गया और निगम के अधिकारियों ने वर्ष 2010 से 2011 तक 34 फ्लैट्स के ट्रांसफर की एनओसी दी। नगर निगम ने 6 दिसंबर, 2005 को 108 करोड़ रुपये में जमीन उप्पल हाउसिंग को बेची थी। कुल 5.34 एकड़ जमीन है।
कोट
15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस के फ्लैट्स न बनने पर उप्पल हाउसिंग के पूरे प्रोजेक्ट को रिजयूम करना चाहिए। प्रशासन भी कंपनी के रिवाइज प्लान को खारिज कर चुकी है, पता नहीं अब तक कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। इस मामले पर सदन की बैठक में अधिकारियों से सवाल पूछे जाएंगे। इस प्रोजेक्ट में कई अधिकारियों के भी फ्लैट हैं। इनमें चंद अधिकारी ऐसे भी हैं, जो पूर्व में चंडीगढ़ प्रशासन में काम कर चुके हैं।
- सतिंदर सिंह, पार्षद।
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भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार हैं। भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने इस प्रोजेक्ट से संबंधित कुछ सवाल पूछे थे, इनके जवाब पर चर्चा होगी। मालूम हो कि उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट में जमीन अलॉटमेंट की शर्त के अनुसार बनने वाले 15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस के फ्लैट्स का निर्माण नहीं हुआ है। इसको लेकर प्रशासन और नगर निगम के पूर्व अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की।
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इस मामले में सीबीआई भी जांच कर चुकी है। एजेंसी ने वर्ष 2012 में जांच करके प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी थी, इसमें तीन अधिकारियों पर विभागीय जांच की सिफारिश की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
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सीबीआई ने जांच में पाया था कि 15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस के फ्लैट्स न बनने के बावजूद इस प्रोजेक्ट को संपदा विभाग की ओर से कंपलिशन प्रमाणपत्र दिया गया और निगम के अधिकारियों ने वर्ष 2010 से 2011 तक 34 फ्लैट्स के ट्रांसफर की एनओसी दी। नगर निगम ने 6 दिसंबर, 2005 को 108 करोड़ रुपये में जमीन उप्पल हाउसिंग को बेची थी। कुल 5.34 एकड़ जमीन है।
कोट
15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस के फ्लैट्स न बनने पर उप्पल हाउसिंग के पूरे प्रोजेक्ट को रिजयूम करना चाहिए। प्रशासन भी कंपनी के रिवाइज प्लान को खारिज कर चुकी है, पता नहीं अब तक कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। इस मामले पर सदन की बैठक में अधिकारियों से सवाल पूछे जाएंगे। इस प्रोजेक्ट में कई अधिकारियों के भी फ्लैट हैं। इनमें चंद अधिकारी ऐसे भी हैं, जो पूर्व में चंडीगढ़ प्रशासन में काम कर चुके हैं।
- सतिंदर सिंह, पार्षद।