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यूजीसी का बड़ा फैसला, अब स्कूलों में भी बनाए जाएंगे एंटी रैगिंग सेल और लागू होंगे ये सभी नियम
Fri, 31 May 2019 12:29 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 31 May 2019 12:29 PM IST
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एंटी रैगिंग सेल
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने एंटी रैगिंग नियमों का स्कूलों में विस्तार करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी स्कूलों में एंटी रैगिंग सेल बनाए जांएगे। यूजीसी ने इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी है। इस बाबत 27 मई को दिल्ली स्थित यूजीसी हेडक्वार्टर में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एक बैठक बुलाई गई और उन्हें इसकी जानकारी दी गई। चंडीगढ़ समेत सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने इसको लेकर हामी भर दी है। स्कूलों में बनने वाले सेल एंटी रैगिंग सेल कॉलेज की तर्ज पर ही काम करेंगे।
सूत्रों की मानें तो सत्र 2019-20 में ही इसे लागू किया जा सकता है। चंडीगढ़ की तरफ से एनएसएस के एसएलओ बिक्रम राणा दिल्ली में हुई बैठक में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि देश के कई स्कूलों में हुईं घटनाओं को लेकर यूजीसी चाहता है कि यूनिवर्सिटी, कॉलेजों के एंटी रैगिंग के नियमों को स्कूलों में भी लागू किया जाए। हालांकि स्कूलों में एंटी रैगिंग नियमों को कौन लागू करेगा, इसको लेकर आखिरी फैसला मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) करेगा।
क्योंकि कॉलेजों में एंटी रैगिंग सेल की निगरानी खुद यूजीसी करता है, ऐसे में स्कूलों में इसकी निगरानी सीबीएसई करेगा या कोई और इसको लेकर फैसला होना बाकी है। साथ ही स्कूली विद्यार्थी 18 वर्ष से कम उम्र के होते है, इसलिए इसे लागू करने में काफी कानूनी अड़चनें हैं, जिनको लेकर यूजीसी की तरफ से काम किया जा रहा है।
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सूत्रों की मानें तो सत्र 2019-20 में ही इसे लागू किया जा सकता है। चंडीगढ़ की तरफ से एनएसएस के एसएलओ बिक्रम राणा दिल्ली में हुई बैठक में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि देश के कई स्कूलों में हुईं घटनाओं को लेकर यूजीसी चाहता है कि यूनिवर्सिटी, कॉलेजों के एंटी रैगिंग के नियमों को स्कूलों में भी लागू किया जाए। हालांकि स्कूलों में एंटी रैगिंग नियमों को कौन लागू करेगा, इसको लेकर आखिरी फैसला मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) करेगा।
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क्योंकि कॉलेजों में एंटी रैगिंग सेल की निगरानी खुद यूजीसी करता है, ऐसे में स्कूलों में इसकी निगरानी सीबीएसई करेगा या कोई और इसको लेकर फैसला होना बाकी है। साथ ही स्कूली विद्यार्थी 18 वर्ष से कम उम्र के होते है, इसलिए इसे लागू करने में काफी कानूनी अड़चनें हैं, जिनको लेकर यूजीसी की तरफ से काम किया जा रहा है।
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स्कूलों में परेशान करना अभी माना जाता है ‘अनुशासनहीनता’
स्कूलों में एंटी रैगिंग सेल नहीं होती है, अगर कोई सीनियर स्टूडेंट अपने जूनियर को परेशान भी करता है तो अनुशासनहीना की श्रेणी में आते हैं और स्कूल की अनुशासन कमेटी मारपीट या बोलचाल को बदसलूकी की श्रेणी में ही मानती है। इसी कारण स्कूल में होने वाली रैगिंग को अभी तक बदसलूकी ही माना जाता है, न कि रैगिंग। रैगिंग जैसे मामले कॉलेजों में ही माने जाते हैं। वहां फ्रेशर्स से परिचय लेने की प्रक्रिया ही रैगिंग है और इसमें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना शामिल है। इसे रोकने के लिए वहां एंटी रैगिंग सेल बनाए गए है, लेकिन स्कूलों में सीनियर जूनियर या फ्रेशर्स के बीच ऐसा कुछ नहीं होता इसलिए स्कूलों में एंटी रैगिंग सेल बनाने जैसा कोई नियम ही नहीं है और न ही सरकार ने ऐसे कोई दिशा निर्देश जारी किए हैं।
कॉलेजों की तर्ज पर स्कूलों में यह व्यवहार माना जाएगा रैगिंग
1. अगर स्कूल में किसी स्टूडेंट (छात्र या छात्रा) को उसके रंग रूप या पहनावे के आधार पर टिप्पणी की जाए। उसे अजीबोगरीब नाम लेकर पुकारने और प्रताड़ित करने को भी रैगिंग माना जाएगा।
2. किसी स्टूडेंट को उसकी क्षेत्रीयता, भाषा या जाति के आधार पर अपमानजनक नाम लेकर पुकारना और प्रचलित करना भी रैगिंग की श्रेणी में आएगा।
3. स्टूडेंट की नस्ल या पारिवारिक अतीत या आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर उसे लज्जित करना और अपमान करना रैगिंग माना जाएगा।
4. छात्राओं खासकर नई छात्राओं को अजीबोगरीब नियमों के तहत परेशान करना या अपमान जनक टास्क देना भी रैगिंग माना जाएगा।
5. यदि धर्म, जाति या क्षेत्रीयता के आधार पर किसी छात्र को मजाक से भी अपमानजनक लगता है तो उसे रैगिंग की श्रेणी में माना जाएगा।
कॉलेजों की तर्ज पर स्कूलों में यह व्यवहार माना जाएगा रैगिंग
1. अगर स्कूल में किसी स्टूडेंट (छात्र या छात्रा) को उसके रंग रूप या पहनावे के आधार पर टिप्पणी की जाए। उसे अजीबोगरीब नाम लेकर पुकारने और प्रताड़ित करने को भी रैगिंग माना जाएगा।
2. किसी स्टूडेंट को उसकी क्षेत्रीयता, भाषा या जाति के आधार पर अपमानजनक नाम लेकर पुकारना और प्रचलित करना भी रैगिंग की श्रेणी में आएगा।
3. स्टूडेंट की नस्ल या पारिवारिक अतीत या आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर उसे लज्जित करना और अपमान करना रैगिंग माना जाएगा।
4. छात्राओं खासकर नई छात्राओं को अजीबोगरीब नियमों के तहत परेशान करना या अपमान जनक टास्क देना भी रैगिंग माना जाएगा।
5. यदि धर्म, जाति या क्षेत्रीयता के आधार पर किसी छात्र को मजाक से भी अपमानजनक लगता है तो उसे रैगिंग की श्रेणी में माना जाएगा।
दंड को लेकर विचार विमर्श
स्कूलों में रैगिंग करने वालों छात्रों को दंड देने के मामले पर अभी पेंच फंसा हुआ है। क्योंकि कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र बालिग होते हैं, जबकि स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी नाबालिग होते हैं। ऐसे में दोषी पाए जाने पर उन्हें क्या दंड दिया जाए, इसको लेकर अभी विचार विमर्श किया जा रहा है। दूसरी ओर, कॉलेजों में रैगिंग के खिलाफ सबसे कड़ी सजा दोषी को तीन साल तक सश्रम कैद है।
पिछले 7 सालों में देशभर में रैगिंग के 4,696 मामले
यूजीसी के एंटी रैगिंग वेबसाइट के आंकड़ों की मानें तो 18 अप्रैल 2012 से 30 मई 2019 तक रैगिंग के 4,696 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 4,628 मामले सॉल्व किए जा चुके हैं। 52 केस अब भी कॉल सेंटर में, 2 मामले मॉनिटरिंग एजेंसी में और 14 केस यूजीसी के पास लंबित हैं। दरअसल, हर साल यूजीसी सभी यूनिवर्सिटी को एंटी रैगिंग गाइडलाइंस भेजती है। एंटी रैगिंग कमेटी बनाने के लिए सर्कुलर भी भेजा जाता है। 2017 से तो वेबसाइट के जरिये सीधे यूजीसी को भी शिकायत करने की सुविधा छात्रों को दी गई है, लेकिन रैगिंग के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे।
पिछले 7 सालों में देशभर में रैगिंग के 4,696 मामले
यूजीसी के एंटी रैगिंग वेबसाइट के आंकड़ों की मानें तो 18 अप्रैल 2012 से 30 मई 2019 तक रैगिंग के 4,696 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 4,628 मामले सॉल्व किए जा चुके हैं। 52 केस अब भी कॉल सेंटर में, 2 मामले मॉनिटरिंग एजेंसी में और 14 केस यूजीसी के पास लंबित हैं। दरअसल, हर साल यूजीसी सभी यूनिवर्सिटी को एंटी रैगिंग गाइडलाइंस भेजती है। एंटी रैगिंग कमेटी बनाने के लिए सर्कुलर भी भेजा जाता है। 2017 से तो वेबसाइट के जरिये सीधे यूजीसी को भी शिकायत करने की सुविधा छात्रों को दी गई है, लेकिन रैगिंग के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे।