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दाखिला रद्द होने पर छात्रों की पूरी फीस रद्द करें विश्वविद्यालय : यूजीसी
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चंडीगढ़। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी शिक्षण संस्थानों को आदेश जारी किए हैं कि जिन विद्यार्थियों के दाखिले रद्द किए जाएं या किसी कारणवश रद्द हो जाएं तो उनकी पूरी फीस लौटाएं। उसमें से किसी भी मद की रकम न काटी जाए। यह आदेश कोरोना काल को देखते हुए यूजीसी ने दिया है। इस आदेश से पीयू व 220 कॉलेजों के दो हजार से अधिक विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, क्योंकि हर साल इतने ही विद्यार्थियों के दाखिले किसी न किसी कारणवश रद्द होते हैं।
आंकड़ों को देखें तो पीयू व उससे संबद्ध 220 कॉलेजों में स्नातक व परास्नातक प्रथम वर्ष में एक लाख से अधिक दाखिले होते हैं। दाखिलों के लिए नियम बनाए गए हैं। साथ ही काउंसलिंग आदि के दौरान विद्यार्थियों को अभिलेखों की जांच करानी होती है। अभिलेख अपूर्ण होने या अन्य कमियां होने के कारण दो हजार से अधिक विद्यार्थियों के दाखिले रद्द हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षण संस्थान पूरा शुल्क छात्रों को वापस नहीं करते। यूजीसी का मानना है कि इस समय कोरोना काल चल रहा है और आर्थिक परेशानियां तमाम परिवारों को हैं। दाखिला रद्द करने के बाद छात्र वैसे ही तनाव में आ जाते हैं और शुल्क में कटौती होने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है, इसलिए शिक्षण संस्थान फीस में किसी प्रकार की कोई कटौती न करें। यूजीसी का यह आदेश पीयू समेत सभी शिक्षण संस्थानों को मिल गया है।
छात्र खुद दाखिला रद्द करवाएंगे, तब भी यह आदेश लागू
कई विद्यार्थी ऐसे हैं जो पसंदीदा विश्वविद्यालय व कॉलेज में नंबर आने पर पहले से पढ़ रहे शिक्षण संस्थानों को छोड़ देते हैं। ऐसे में जिस संस्थान को वे छोड़ते हैं तो उन्हें फीस वापस नहीं मिलती। यूजीसी का नया आदेश ऐसी स्थिति पर भी लागू होगा। सैकड़ों विद्यार्थियों को इससे राहत मिलेगी।
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आंकड़ों को देखें तो पीयू व उससे संबद्ध 220 कॉलेजों में स्नातक व परास्नातक प्रथम वर्ष में एक लाख से अधिक दाखिले होते हैं। दाखिलों के लिए नियम बनाए गए हैं। साथ ही काउंसलिंग आदि के दौरान विद्यार्थियों को अभिलेखों की जांच करानी होती है। अभिलेख अपूर्ण होने या अन्य कमियां होने के कारण दो हजार से अधिक विद्यार्थियों के दाखिले रद्द हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षण संस्थान पूरा शुल्क छात्रों को वापस नहीं करते। यूजीसी का मानना है कि इस समय कोरोना काल चल रहा है और आर्थिक परेशानियां तमाम परिवारों को हैं। दाखिला रद्द करने के बाद छात्र वैसे ही तनाव में आ जाते हैं और शुल्क में कटौती होने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है, इसलिए शिक्षण संस्थान फीस में किसी प्रकार की कोई कटौती न करें। यूजीसी का यह आदेश पीयू समेत सभी शिक्षण संस्थानों को मिल गया है।
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छात्र खुद दाखिला रद्द करवाएंगे, तब भी यह आदेश लागू
कई विद्यार्थी ऐसे हैं जो पसंदीदा विश्वविद्यालय व कॉलेज में नंबर आने पर पहले से पढ़ रहे शिक्षण संस्थानों को छोड़ देते हैं। ऐसे में जिस संस्थान को वे छोड़ते हैं तो उन्हें फीस वापस नहीं मिलती। यूजीसी का नया आदेश ऐसी स्थिति पर भी लागू होगा। सैकड़ों विद्यार्थियों को इससे राहत मिलेगी।
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