Mahashivratri 2022: इस बार बना बेहद श्रेष्ठ योग, ये उपाय करने पर बरसेगी भगवान शिव की कृपा
गंगाजल व बेलपत्र चढ़ाने से यमलोक का भय नहीं रहता। जल में काले तिल मिलाकर जल चढ़ाने से शनि व राहु का दोष समाप्त हो जाता है। गन्ने के रस द्वारा अभिषेक करने से लक्ष्मी की बढ़ोतरी होती है।
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महाशिवरात्रि का महापर्व एक मार्च को है। इस बार यह पर्व भौमवासरी धनिष्ठा नक्षत्र, परिध और शिव योग में संपन्न होगी। यह बहुत ही श्रेष्ठ योग है। परिध योग शत्रुओं का नाश करने वाला है और शिवयोग कल्याण प्रद है। यह कहना है श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री का।
उन्होंने बताया कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात्रि को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। शिव का अर्थ है कल्याण एवं रात्रि का अर्थ है रात, शिवरात्रि यानी कल्याण की रात्रि। उन्होंने कहा कि जो साधक अपने मनोरथ पूर्ण करना चाहते हैं एवं अपना कल्याण चाहते हैं उन्हें महाशिवरात्रि का व्रत एवं महादेव जी की पूजा व अभिषेक करना चाहिए।
चतुर्दशी एक मार्च को प्रात: तीन बजकर 17 मिनट पर प्रारंभ होगी और एक मार्च देर रात एक बजकर एक मिनट तक रहेगी। देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि शिवलिंग पर गाय का दूध चढ़ाने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
गंगाजल व बेलपत्र चढ़ाने से यमलोक का भय नहीं रहता। जल में काले तिल मिलाकर जल चढ़ाने से शनि व राहु का दोष समाप्त हो जाता है। गन्ने के रस द्वारा अभिषेक करने से लक्ष्मी की बढ़ोतरी होती है। चंदन व अक्षत चढ़ाने से महादेव भौतिक सुख साधन प्रदान करते हैं। दीपक अर्पित करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है।
महाशिवरात्रि ये अवश्य करें
- दिन में उपवास करना चाहिए।
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें।
- प्रात: काल मंदिर में जाकर महादेव को गंगाजल, दूध, बेलपत्र, फूल, फला आदि अर्पित करने चाहिए।
- महाशिवरात्रि को दिन और रात दोनों समय ओम नम: शिवाय का जाप करना चाहिए।
- इस दिन व्रत करने वाले भक्त को अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए, केवल दूध और फल का आहार लें।
चार प्रहर की पूजा का महत्व और समय
ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि का उपवास करने के साथ-साथ रात्रि में चार प्रहर की पूजा भी करनी चाहिए। इस पूजा की बड़ी भारी महिमा बताई गई है। चार प्रहर की पूजा में चार बार भगवान महादेव जी का शिवलिंग के रूप में अभिषेक किया जाता है। चार प्रहर की पूजा महाशिवरात्रि के व्रत के साथ जुड़ी हुई है।
शिव पुराण के अनुसार गुरुद्रुह नामक शिकारी से अनजाने में महाशिवरात्रि को शिवजी की चार प्रहर की पूजा हो गई और उस पूजा से प्रसन्न होकर महादेव जी ने उस शिकारी को साक्षात दर्शन दिए। तब से रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विधान है। जो महाशिवरात्रि के दिन रात्रि में चार प्रहर की पूजा करते हैं भगवान उन पर प्रसन्न होते हैं।
चार पहर की पूजा का समय
प्रथम प्रहर की पूजा
- 1 मार्च, 2022
- शाम 6:21 मिनट से रात्रि 9:27 मिनट तक
द्वितीय प्रहर की पूजा
- 1 मार्च रात्रि 9:27 बजे से
- 12: 33 बजे तक
तृतीय प्रहर की पूजा
- 1 मार्च रात्रि 12:33 बजे से सुबह 3 :39 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा
- 2 मार्च सुबह 3:39 बजे से 6:45 बजे तक।
- व्रत पारण का शुभ समय
- 2 मार्च प्रात: 06:58 बजे