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अनोखा गांवः सहूलियतें नहीं मिली, पर मतदान के लिए जज्बा हैरान करने वाला
संजीव कुमार बख्शी/अमर उजाला, तक्खनी (शामचौरासी)
Updated Sun, 05 Feb 2017 01:47 AM IST
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कई लोग मतदान करने के लिए नहीं जाते हैं। इसके उल्ट इस गांव के लोगों को सुविधाएं नहीं मिली, फिर भी यहां रहने वाले वोट डालने से नहीं चूके। ये बाशिंदे हैं होशियारपुर के गांव तक्खनी घट्टी के। गांव के करीब 20 परिवारों के 70 से ज्यादा वोटर हैं।
आजादी के इतने साल बाद भी कंडी इलाके के नीम पहाड़ी आंचल में बसे गांव तक्खनी घट्टी में पीने का साफ पानी और ढंग का रास्ता नहीं है। इसके बावजूद गांव के लोग वोट देने जरूर जाते हैं।
सड़क तो है लेकिन घट्टी तक पहुंचने का रास्ता कुछ ऐसा कि बरसात हो तो ढलान पर चढ़ना-उतरना दोनों मुश्किल है। महिलाएं डेढ़ दो किलोमीटर तक सिर पर घड़े उठाए या निचले इलाके में लोगों के निजी नलकों से पानी लाती हैं और या फिर पंचायत की ओर से लगे नलके से पानी भरा जाता है।
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फिर भी पानी ऐसा कि न पीते बने न छोड़ते। कई चुनाव आए और गए, हर बार नेताओं से अपनी व्यथा कही, सबने सुनी और हर हाल में पानी का मसला हल करने के वादे भी किए लेकिन पूरा किसी ने नहीं किया। एक प्राइमरी स्कूल है, वो भी गांव से दूरी पर है।
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आजादी के इतने साल बाद भी कंडी इलाके के नीम पहाड़ी आंचल में बसे गांव तक्खनी घट्टी में पीने का साफ पानी और ढंग का रास्ता नहीं है। इसके बावजूद गांव के लोग वोट देने जरूर जाते हैं।
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सड़क तो है लेकिन घट्टी तक पहुंचने का रास्ता कुछ ऐसा कि बरसात हो तो ढलान पर चढ़ना-उतरना दोनों मुश्किल है। महिलाएं डेढ़ दो किलोमीटर तक सिर पर घड़े उठाए या निचले इलाके में लोगों के निजी नलकों से पानी लाती हैं और या फिर पंचायत की ओर से लगे नलके से पानी भरा जाता है।
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फिर भी पानी ऐसा कि न पीते बने न छोड़ते। कई चुनाव आए और गए, हर बार नेताओं से अपनी व्यथा कही, सबने सुनी और हर हाल में पानी का मसला हल करने के वादे भी किए लेकिन पूरा किसी ने नहीं किया। एक प्राइमरी स्कूल है, वो भी गांव से दूरी पर है।
नेता लोग भूल जाते, पर कभी तो सुनवाई होगी
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गांव के संजीव कुमार कहते हैं कि हर बार नेता आते हैं और वादा कर जाते हैं और फिर पांच साल के लिए भूल जाते हैं लेकिन लोकराज के प्रति हमारा विश्वास कम नहीं होता। हम हर बार वोट जरूर देते हैं इसी उम्मीद में कि आखिर कभी तो हमारी सुनवाई होगी ही।
गांव की पंच सीमा रानी ने बताया कि इस बार में सभी दलों के नेता आए और वादे भी किए। मौजूदा अकाली विधायक महिंदर कौर जोश से भी पानी को लेकर सवाल किया तो उनका फिर वही जवाब था कि एक बार और मौका दे दो तो सबसे पहला काम पानी के लिए गहरा बोर करवाने का ही होगा।
सीमा का कहना था कि माना कि सहूलियतें नहीं मिल रहीं लेकिन अगर वोट नहीं देंगे तो हमारी सुनवाई कैसे होगी। सुरजीत कुमार का कहना था कि घट्टी के लोग पानी के लिए तकलीफ तो झेल रहे हैं और आज तक नेताओं ने उनकी सुनी भी नहीं लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि वोट की अहमियत कम हो गई। वोट देंगे और जरूर देंगे क्योंकि यही वोट हमें एक दिन हमारा हक दिला कर रहेगा।
गांव की पंच सीमा रानी ने बताया कि इस बार में सभी दलों के नेता आए और वादे भी किए। मौजूदा अकाली विधायक महिंदर कौर जोश से भी पानी को लेकर सवाल किया तो उनका फिर वही जवाब था कि एक बार और मौका दे दो तो सबसे पहला काम पानी के लिए गहरा बोर करवाने का ही होगा।
सीमा का कहना था कि माना कि सहूलियतें नहीं मिल रहीं लेकिन अगर वोट नहीं देंगे तो हमारी सुनवाई कैसे होगी। सुरजीत कुमार का कहना था कि घट्टी के लोग पानी के लिए तकलीफ तो झेल रहे हैं और आज तक नेताओं ने उनकी सुनी भी नहीं लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि वोट की अहमियत कम हो गई। वोट देंगे और जरूर देंगे क्योंकि यही वोट हमें एक दिन हमारा हक दिला कर रहेगा।