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समुद्र के अंदर 30 फीट नीचे युवक का गजब का कारनामा, देख आंखें फटी रह जाएंगी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Feb 2017 09:25 PM IST
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समुद्र में 30 फीट नीचे चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर ने चलाई साइकिल
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एक जगह, जहां सांस लेना मुश्किल और चारों तरफ पानी ही पानी होता है। वहां एक युवक ने वो गजब का कारनामा कर दिखाया, देखकर आपकी आंखें फटी रह जाएंगी। समुद्र के 30 फीट नीचे, हाथों में साइकिल थी और 110 मीटर की दूरी तय करनी थी। साथ ही साइकिल चलाते-चलाते केला खाने की भी चुनौती थी। एक युवक ने कुल 35 मिनट में इस चुनौती को पूरा किया और समुद्र से बाहर निकले।
ये हैं पंजाब पुलिस के क्राइम ब्रांच में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर दलजिंदर सिंह। इन्होंने अपनी टीम के साथ इस साहसिक काम को पूरा किया और हाल ही में चंडीगढ़ लौटे हैं। दलजिंदर ने यह काम कर्नाटक के मुरुदेश्वर मंदिर के पास समुद्र में किया। अपनी इस सफलता को पत्रकारों से साझा करते हुए दलजिंदर ने बताया कि यह पहली बार नहीं था कि उन्होंने समुद्र के अंदर साइकिल चलाई हो।
इससे पहले भी उन्होंने गोवा में साल 2016 में भी समुद्र के 16.4 फीट नीचे 50 मीटर साइकिल चलाई थी। उस दौरान इनके साथ आठ लोगों की टीम थी, लेकिन केला खाना पहली बार था। साइकिल चलाते हुए केले को छीलकर फिर उसे खाने की हमने काफी प्रैक्टिस की। हमने ऑक्सीजन सिलेंडर लगाए थे। ऐसे में केला खाते वक्त हमारे मुंह में पानी न चला जाए तो हमने सावधानी से पहले सांस रोक कर केला खाया और फिर मुंह बंद करके सांस लेने की प्रक्रिया शुरू की। खाने के दौरान पानी अगर पेट में जाता तो यह काफी जानलेवा साबित होता।
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ये हैं पंजाब पुलिस के क्राइम ब्रांच में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर दलजिंदर सिंह। इन्होंने अपनी टीम के साथ इस साहसिक काम को पूरा किया और हाल ही में चंडीगढ़ लौटे हैं। दलजिंदर ने यह काम कर्नाटक के मुरुदेश्वर मंदिर के पास समुद्र में किया। अपनी इस सफलता को पत्रकारों से साझा करते हुए दलजिंदर ने बताया कि यह पहली बार नहीं था कि उन्होंने समुद्र के अंदर साइकिल चलाई हो।
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इससे पहले भी उन्होंने गोवा में साल 2016 में भी समुद्र के 16.4 फीट नीचे 50 मीटर साइकिल चलाई थी। उस दौरान इनके साथ आठ लोगों की टीम थी, लेकिन केला खाना पहली बार था। साइकिल चलाते हुए केले को छीलकर फिर उसे खाने की हमने काफी प्रैक्टिस की। हमने ऑक्सीजन सिलेंडर लगाए थे। ऐसे में केला खाते वक्त हमारे मुंह में पानी न चला जाए तो हमने सावधानी से पहले सांस रोक कर केला खाया और फिर मुंह बंद करके सांस लेने की प्रक्रिया शुरू की। खाने के दौरान पानी अगर पेट में जाता तो यह काफी जानलेवा साबित होता।
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स्कूबा डाइविंग के दौरान आया अंडर वाटर साइक्लिंग का विचार
समुद्र में 30 फीट नीचे चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर ने चलाई साइकिल
दलजिंदर बताते हैं कि मुझे एडवेंचर का शौक है। इसलिए अब मैं अगले चरण में एवरेस्ट को पार करना चाहता हूं, जिसकी चढ़ाई अप्रैल में शुरू होगी। दलजिंदर ने बताया कि वह माउंटेनियरिंग का एडवांस कोर्स भी कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने देशभर की विभिन्न चोटियों में ट्रैकिंग भी की। गोवा में स्कूबा डाइविंग करते हुए उन्हें यह खयाल आया कि क्यों न समुद्र के अंदर साइक्लिंग की जाए।
पहला विचार जो दिमाग में आया वो यह कि क्या यह संभव है। इसके लिए समुद्र से 20 किलोमीटर की दूरी में जाकर साइकिल को अंदर तक ले जाने का चैलेंज लिया। टायरों से हवा निकालने के बाद साइकिल को नीचे ले जाया गया। इसके बाद पैडल चलाने की प्रैक्टिस की। साल 2016 में पहली बार समुद्र में साइक्लिंग की। इसे यूनिक बुक ऑफ रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ।
इस कार्य के बाद हमें काफी सराहना मिली। इसलिए एक बार फिर से कुछ नया करने की सोची, लेकिन गोवा में पानी साफ न होने के कारण, हमने इस बार कर्नाटक के समुद्र में यह गतिविधि करने की सोची। ऐसे समय में हमने गहराई और साइकिल चलाने की दूरी, दोनों को ही दोगुना कर दिया। साथ ही केला खाने को भी शामिल किया।
पहला विचार जो दिमाग में आया वो यह कि क्या यह संभव है। इसके लिए समुद्र से 20 किलोमीटर की दूरी में जाकर साइकिल को अंदर तक ले जाने का चैलेंज लिया। टायरों से हवा निकालने के बाद साइकिल को नीचे ले जाया गया। इसके बाद पैडल चलाने की प्रैक्टिस की। साल 2016 में पहली बार समुद्र में साइक्लिंग की। इसे यूनिक बुक ऑफ रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ।
इस कार्य के बाद हमें काफी सराहना मिली। इसलिए एक बार फिर से कुछ नया करने की सोची, लेकिन गोवा में पानी साफ न होने के कारण, हमने इस बार कर्नाटक के समुद्र में यह गतिविधि करने की सोची। ऐसे समय में हमने गहराई और साइकिल चलाने की दूरी, दोनों को ही दोगुना कर दिया। साथ ही केला खाने को भी शामिल किया।