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गजब है! फ्री इलाज कराने के लिए यहां जेल जाना पसंद करते लोग
पवन तिवारी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 22 Oct 2016 10:33 AM IST
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बुड़ैल मॉडल जेल चंडीगढ़
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क्या आप इस जेल के बारे में जानते हैं, जहां पर लोग जमानत लेना नहीं बल्कि रहना पसंद करते हैं। इसके पीछे का कारण जानकर आपको हैरानी होगी। दरअसल, चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में सजा काट रहे लोग जमानत ही नहीं लेना चाहते। इसकी वजह है, जेल में उन्हें मिल रहा फ्री इलाज।
इस मॉडल जेल में सजा काट रहे कैदियों के इलाज पर प्रशासन पांच-पांच लाख रुपये तक खर्च कर रहा है। जेल में मिल रहे फ्री इलाज और सुख सुविधाओं के कारण कई कैदी जमानत के लिए अर्जी ही नहीं देते, बल्कि जेल प्रशासन खुद उनकी जमानत के लिए अधिकारियों को लिखता है।
पिछले साल जेल प्रशासन ने एक कैदी के कानों के इलाज में पांच लाख खर्च किए है। अधिकारियों का कहना है कि हर साल कैदियों के इलाज में लगभग 25 लाख रुपये तक का खर्च होता है। वहीं वर्ष कैदियों के इलाज में 28.61 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
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जेल प्रशासन का कहना है कि पहले तो जेल परिसर में एक अस्पताल बनाने का प्लान था, लेकिन जेल में बढ़ते नशे के कैदियों की संख्या को देखते हुए जल्द ही जेल में नशा मुक्ति केंद्र खोला जाएगा।
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इस मॉडल जेल में सजा काट रहे कैदियों के इलाज पर प्रशासन पांच-पांच लाख रुपये तक खर्च कर रहा है। जेल में मिल रहे फ्री इलाज और सुख सुविधाओं के कारण कई कैदी जमानत के लिए अर्जी ही नहीं देते, बल्कि जेल प्रशासन खुद उनकी जमानत के लिए अधिकारियों को लिखता है।
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पिछले साल जेल प्रशासन ने एक कैदी के कानों के इलाज में पांच लाख खर्च किए है। अधिकारियों का कहना है कि हर साल कैदियों के इलाज में लगभग 25 लाख रुपये तक का खर्च होता है। वहीं वर्ष कैदियों के इलाज में 28.61 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
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जेल प्रशासन का कहना है कि पहले तो जेल परिसर में एक अस्पताल बनाने का प्लान था, लेकिन जेल में बढ़ते नशे के कैदियों की संख्या को देखते हुए जल्द ही जेल में नशा मुक्ति केंद्र खोला जाएगा।
इलाज में 40 हजार से 5 लाख तक खर्च किए जेल ने
बुड़ैल मॉडल जेल चंडीगढ़
जेल प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष-2015-16 में कैदियों के इलाज पर कुल खर्च 28 लाख 61 हजार रुपये आया था। जिसमें सबसे ज्यादा खर्च एक कैदी के कान के इलाज पर हुआ। अधिकारियों ने बताया जेल में पिछले साल एक कैदी के कान का ऑपरेशन पीजीआई से करवाया गया था।
डाक्टरों ने कैदी के कान का ऑपरेशन कर अंदर एक सुनने वाली मशीन लगाई थी जिस पर पांच लाख रुपये का खर्च आया था जो जेल प्रशासन की ओर से वहन किया गया। इसके बाद एक युवक स्नैचिंग के आरोप में जेल में आया। वह नशे का आदि है। जेल में ही उसे पेट से संबंधित बिमारी हो गई।
2.5 लाख रुपये खर्च कर जेल प्रशासन ने उसका पूरा इलाज कराया। वहीं एक कैदी के रीढ़ की हड्डी और हार्निया का ऑपरेशन भी जेल की ओर से करवाया गया। इसके अलावा डायबिटीज से पीड़ित कैदी के इलाज पर कुल 55 हजार और एचआईवी से ग्रसित कैदी के इलाज पर जेल ने पिछले साल 40 हजार रूपये खर्च किए हैं।
डाक्टरों ने कैदी के कान का ऑपरेशन कर अंदर एक सुनने वाली मशीन लगाई थी जिस पर पांच लाख रुपये का खर्च आया था जो जेल प्रशासन की ओर से वहन किया गया। इसके बाद एक युवक स्नैचिंग के आरोप में जेल में आया। वह नशे का आदि है। जेल में ही उसे पेट से संबंधित बिमारी हो गई।
2.5 लाख रुपये खर्च कर जेल प्रशासन ने उसका पूरा इलाज कराया। वहीं एक कैदी के रीढ़ की हड्डी और हार्निया का ऑपरेशन भी जेल की ओर से करवाया गया। इसके अलावा डायबिटीज से पीड़ित कैदी के इलाज पर कुल 55 हजार और एचआईवी से ग्रसित कैदी के इलाज पर जेल ने पिछले साल 40 हजार रूपये खर्च किए हैं।
कई कैदियों ने दी बीमारी का इलाज कराने को अर्जी
बुड़ैल मॉडल जेल चंडीगढ़
जेल अधिकारियों ने बताया कि जब किसी कैदी को पता चल जाता है कि उसकी बीमारी में बड़ा खर्चा आने वाला है तो वे जमानत अर्जी ही नहीं देते हैं। कई कैदियों ने तो दांत लगवाने, हेयर ट्रांसप्लांट करवाने व चेहरे की सर्जरी के लिए अर्जी दी है। लेकिन जेल प्रशासन इस तरह के कॉस्मेटिक इलाज नही करवाता है।
अधिकारियों का कहना है कि जेल में एक डिस्पेंसरी भी है जहां चौबीस घंटे एक फार्मासिस्ट मौजूद रहता है। साथ ही अलग-अलग अस्पतालों से डॉक्टर जेल में जांच के लिए आते हैं और जेल में एक डॉक्टर हमेशा ड्यूटी पर तैनात रहता है। कैदियों को अस्पताल ले जाने के लिए एक एंबुलेंस भी जेल परिसर में रहती है।
कैदियों को जेल में चिकित्सा से जुड़ी कोई दिक्कत नही आने दी जाती है। जिसको जैसा इलाज चाहिए होता है उसको जेल प्रशासन मुहैया करवाता है। चाहे वो खर्चा लाखों में ही क्यों न हो। पिछले वर्ष कई कैदियों के इलाज पर जेल प्रशासन ने एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक खर्च किया है। साथ ही जिस कैदी को जैसा डॉक्टर डाइट बताता है उसी हिसाब से उसको खाने का भी इंतजाम जेल की तरफ से किया जाता है।
- ए एस चीमा, आईजी, जेल
अधिकारियों का कहना है कि जेल में एक डिस्पेंसरी भी है जहां चौबीस घंटे एक फार्मासिस्ट मौजूद रहता है। साथ ही अलग-अलग अस्पतालों से डॉक्टर जेल में जांच के लिए आते हैं और जेल में एक डॉक्टर हमेशा ड्यूटी पर तैनात रहता है। कैदियों को अस्पताल ले जाने के लिए एक एंबुलेंस भी जेल परिसर में रहती है।
कैदियों को जेल में चिकित्सा से जुड़ी कोई दिक्कत नही आने दी जाती है। जिसको जैसा इलाज चाहिए होता है उसको जेल प्रशासन मुहैया करवाता है। चाहे वो खर्चा लाखों में ही क्यों न हो। पिछले वर्ष कई कैदियों के इलाज पर जेल प्रशासन ने एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक खर्च किया है। साथ ही जिस कैदी को जैसा डॉक्टर डाइट बताता है उसी हिसाब से उसको खाने का भी इंतजाम जेल की तरफ से किया जाता है।
- ए एस चीमा, आईजी, जेल