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गजब का डिवाइस, 12 हजार में होने वाला इलाज कर देगा सिर्फ 50 रुपये में
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 22 Feb 2017 06:00 PM IST
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पीजीआई के डॉक्टर्स ने बनाया अनोखा डिवाइस
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एक ऐसा गजब का डिवाइस तैयार किया गया है, जिससे 12 हजार में होने वाला इलाज सिर्फ 50 रुपये में हो जाएगा। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
ये डिवाइस उन मरीजों में काम आती है, जिनके नीचे के दांत टूटने से ऊपर वाले दांत नीचे आ जाते हैं। डिवाइस की मदद से उन्हें पुराने रूप में लाने में मदद मिलती है। इसमें करीब तीन से चार महीने का वक्त लगता है। इससे मरीज के दांतों की सुंदरता भी बढ़ती है।
एसएसए नामक इस डिवाइस को पीजीआई के ओरल हेल्थ डिपार्टमेंट के डॉ. सोमबीर सिंह, डॉ. अशोक जीना व डॉ. एसपी सिंह ने तैयार किया है। इस डिवाइस को हाल में ही बीएचयू में आयोजित 21वीं एनुअल स्टूडेंट पीजी कन्वेंशन में इनोवेशन कैटेगरी में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
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ये डिवाइस उन मरीजों में काम आती है, जिनके नीचे के दांत टूटने से ऊपर वाले दांत नीचे आ जाते हैं। डिवाइस की मदद से उन्हें पुराने रूप में लाने में मदद मिलती है। इसमें करीब तीन से चार महीने का वक्त लगता है। इससे मरीज के दांतों की सुंदरता भी बढ़ती है।
एसएसए नामक इस डिवाइस को पीजीआई के ओरल हेल्थ डिपार्टमेंट के डॉ. सोमबीर सिंह, डॉ. अशोक जीना व डॉ. एसपी सिंह ने तैयार किया है। इस डिवाइस को हाल में ही बीएचयू में आयोजित 21वीं एनुअल स्टूडेंट पीजी कन्वेंशन में इनोवेशन कैटेगरी में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
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पहले आता था 12 से 35 हजार का खर्चा
पीजीआई के डॉक्टर्स ने बनाया अनोखा डिवाइस
पीजीआई के ओरल हेल्थ सेंटर के सीनियर रेजिडेंट डॉ. सोमबीर ने बताया कि ऊपर वाले दांतों को फिट करने के लिए डिवाइस से पहले माइक्रो इंप्लांट तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था। एक इंप्लांट का खर्च तीन हजार रुपये आता है।
किसी मरीज में तीन का इस्तेमाल किया जाता है तो किसी में चार का। इसके अलावा कुछ डॉक्टर रूट कैनाल ट्रीटमेंट का प्रयोग करते हैं। इसमें भी करीब 30 से 35 हजार रुपये का खर्च आता है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए तो मरीज को आगे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पेटेंट की तैयारी में पीजीआई
डॉक्टरों ने बताया कि यह डिवाइस एक स्टील के तार से बनाया गया है, जिसकी कीमत न के बराबर है। स्टील का तार कहीं से भी मिल सकता है। इसके रिजल्ट भी सौ प्रतिशत सही रहे हैं।
अब पीजीआई के डॉक्टर इसे पेटेंट करने की तैयारी है। इस वजह से उन्होंने डिवाइस की फोटो अखबार में पब्लिश करने से मना कर दिया है। यदि डिवाइस को पेटेंट मिलता है तो यह पीजीआई के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
किसी मरीज में तीन का इस्तेमाल किया जाता है तो किसी में चार का। इसके अलावा कुछ डॉक्टर रूट कैनाल ट्रीटमेंट का प्रयोग करते हैं। इसमें भी करीब 30 से 35 हजार रुपये का खर्च आता है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए तो मरीज को आगे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पेटेंट की तैयारी में पीजीआई
डॉक्टरों ने बताया कि यह डिवाइस एक स्टील के तार से बनाया गया है, जिसकी कीमत न के बराबर है। स्टील का तार कहीं से भी मिल सकता है। इसके रिजल्ट भी सौ प्रतिशत सही रहे हैं।
अब पीजीआई के डॉक्टर इसे पेटेंट करने की तैयारी है। इस वजह से उन्होंने डिवाइस की फोटो अखबार में पब्लिश करने से मना कर दिया है। यदि डिवाइस को पेटेंट मिलता है तो यह पीजीआई के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।