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बजट 2019: अर्थशास्त्री सतीश वर्मा बोले- 1.50 लाख करोड़ की भरपाई का बोझ मध्य वर्ग ही झेलेगा

Sat, 06 Jul 2019 12:00 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 06 Jul 2019 12:00 PM IST
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union budget 2019, reaction of economist satish verma
बजट 2019, निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
अर्थशास्त्री एवं आरबीआई चेयर प्रोफेसर क्रिड चंडीगढ़ डॉ. सतीश वर्मा कहते हैं कि डेढ़ लाख करोड़ की भरपाई का बोझ तो मध्य वर्ग ही झेलेगा। बजट में इंडिया को एजुकेशन हब बनाने की बजट में जो बात कही गई है, वह सही है लेकिन इसका लाभ पब्लिक सेक्टर को मिलेगा या निजी सेक्टर को, इसकी परिभाषा साफ की जानी चाहिए थी। किसानों के लिए उत्पादक संघों की स्थापना का कदम सराहनीय है लेकिन किसानों की आत्महत्या आदि रोकने के लिए उनकी सालाना आय दर को बढ़ाने की कोशिश नहीं की गई।
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महिलाओं को एक लाख रुपये तक का कर्ज देने का फैसला सही है लेकिन यह महिलाओं के समूह को मिलेगा या एकल। यह गाइड लाइन के बाद साफ हो पाएगा। अर्थशास्त्री डॉ. सतीश वर्मा कहते हैं कि जीएसटी का कलेक्शन इस बार 1.50 लाख करोड़ कम हुआ है। इसकी भरपाई के लिए सरकार ने पेट्रोल व डीजल पर सेस लगाकर 40 हजार करोड़ रुपये वसूलने की बात कही है। इसी तरह 12 हजार करोड़ रुपये कस्टम ड्यूटी से लिए जाएंगे। अन्य स्रोत भी सरकार ने बताए हैं लेकिन जब पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ेंगे तो इसका सीधा असर मध्य वर्ग पर पड़ेगा।
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सीनियर सिटीजन व रिटायर्ड लोगों का पैसा बैंक में है। एक तो उनकी ब्याज दर कम हुई है, ऊपर से इनकम टैक्स स्लैब में रियायत नहीं मिली है। यानी उनको इससे कुछ लाभ नहीं हुआ। उन्हें बजट से राहत नहीं मिली। रेलवे में सर्वाधिक लोग यात्रा करते हैं। गरीबों का सफर इसी में होता है लेकिन इसे पीपीपी मोड पर दिए जाने से किराए में इजाफा होगा। गरीबों पर मार पड़ेगी। रोजगार का बंदोबस्त इस बजट में भी नहीं किया गया है। हालांकि स्टार्टअप को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
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रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना से रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा लेकिन इसके रास्ते में बाधा नहीं आनी चाहिए।  डॉ. सतीश वर्मा कहते हैं कि पिछले जितने बजट आए उनमें टारगेट होता था कि कब तक वह इसे पूरा करेंगे लेकिन इस बजट में तिथि नहीं दी गई है।  बजट हर सरकार पेश करती है लेकिन उसमें बेसिक फंडामेंटल का ध्यान नहीं रखा जाता। इस बार भी वही हुआ है। विलेज इकोनॉमी के लिए सरकार को काम करना होगा। गरीबों के लिए योजनाएं बनानी होंगी। 
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