पंजाबः केंद्र सरकार के बजट से एनआरआई खुश, राहत न मिलने से स्पोर्ट्स इंडस्ट्री हताश
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को बजट में विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए बड़ा एलान किया है। अब एनआरआई को भारत आते ही आधार कार्ड की सुविधा मिलेगी। साथ ही अब उन्हें 180 दिनों तक भारत में रहने की जरूरत नहीं है। इससे विदेश में बसे भारतीय मूल के करोड़ों लोगों को सहूलियत होगी।
विदेश में बसे भारतीय उद्यमियों का कहना है कि अगर भारत सरकार एनआरआई की तरफ एक कदम बढ़ाएगी तो हमारी तरफ से भी दस कदम बढ़ाए जाएंगे।
इससे भारत में निवेश करने के लिए एनआरआई खुलकर सामने आएंगे। भारतीय खासकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात के करोड़ों लोग विदेश में बसे हुए हैं। अमेरिका, कनाडा, यूके में भारतीय मूल के लोगों का खासा दबदबा है।
सरकार की तरफ से एनआरआई पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थी, जिस कारण वह भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा नहीं बन पाते थे। इसी वजह से पिछले कुछ साल से एनआरआई ने भारत में निवेश से कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए थे।
कनाडा में ब्रैंपटन के सांसद रमेश संघा का कहना है कि भारत सरकार ने यह एक सराहनीय कदम उठाया है। भारतीय मूल के लोग तो अपने वतन से जुड़े रहना चाहते हैं। केंद्र को एनआरआई की प्रॉपर्टी की रक्षा भी करनी होगी। इससे निश्चित तौर पर निवेश भी बढ़ेगा।
टोरंटो के प्रसिद्ध कारोबारी परम सिद्धू का कहना है कि भारत सरकार एनआरआई के प्रति सकारात्मक सोच रखती है, यही अच्छा है। आशा है कि एनआरआई को आगे भी कई सहूलियत प्रदान की जाएंगी। वैंकूवर से पूजा फूड्स के एमडी अमृतपाल सिंह का कहना है कि अब एनआरआई के लिए भारत में 180 दिन रहना जरूरी नहीं है, यह भी एक अच्छा कदम है। इससे एनआरआई अपने वतन से नाता नहीं तोड़ेंगे।
बजट में राहत न मिलने से स्पोर्ट्स इंडस्ट्री हताश
जालंधर की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री बजट से निराश है। स्पोर्ट्स उद्यमियों का कहना है कि हमारी इंडस्ट्री चीन से जंग लड़ रही है। इसको राहत मिलनी चाहिए थी।
खेल उद्योग संघ के अध्यक्ष रविंदर धीर का कहना है कि स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के यूनिट माइक्रो, स्माल एंड मीडियम कैटेगरी के हैं। इन्होंने छोटे-छोटे परिवारों को सहारा दिया है।
नागरिकों की अच्छी सेहत के लिए खेल जरूरी हैं। सरकार खुद सामान खरीदकर खेल प्रतियोगिताएं करवाती है। खेलों का सामान लग्जरी आइटम नहीं है। इस पर नॉमिनल टैक्स लगना चाहिए लेकिन हम 18 फीसदी जीएसटी के दायरे में हैं। दूसरी मार चीन की तरफ से पड़ रही है। हमारी स्पोर्ट्स इंडस्ट्री का अधिकतर सामान तो चीन से आयात हो रहा है, जिसने छोटी स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को तबाह कर दिया है।
स्पोर्ट्स कारोबारी अजय का कहना है कि जो उद्योग चला रहे हैं, सरकार उनकी पीठ नहीं ठोक रही है जबकि नए उद्योग को लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिजनेस करते हैं। जहां पर क्वालिटी प्राथमिकता है लेकिन खेल उद्योग अच्छी क्वालिटी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला नहीं कर पा रहा है।
डीजल के दाम से टूटेगी कमर...
फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन के प्रधान नरिंदर सग्गू और हैंड टूल एसोसिएशन के प्रधान गुरशरण सिंह का कहना है कि हमारी इंडस्ट्री को दिया कुछ नहीं बल्कि डीजल का दाम बढ़ाकर कमर तोड़ने की तैयारी कर दी है।
हम बॉर्डर इलाके में हैं और कच्चा माल भिलाई व अन्य स्थानों से आता है और माल को तैयार कर वापस देश के हिस्सों में सप्लाई करते हैं, जिसमें मुख्य ट्रांसपोर्ट ट्रक है। इसके अलावा इंडस्ट्री के भीतर भट्ठियां भी डीजल से ऑपरेट होती हैं। इससे हमारी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी।