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बजट 2019: पीजीआई चंडीगढ़ की झोली रह गई खाली, मांगे थे 1900 करोड़, मिले 1500 करोड़
Sat, 06 Jul 2019 12:43 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 06 Jul 2019 12:43 PM IST
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अंतरिम बजट की तरह इस बजट में भी पीजीआई को कोई खास सौगात नहीं मिली। पीजीआई को 1500 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि 1900 करोड़ की डिमांड की गई थी। इस हिसाब से संस्थान को 400 करोड़ कम मिले हैं। हालांकि, पीजीआई अधिकारियों का कहना है कि वे इससे निराश नहीं हैं, क्योंकि उनके सामने विकल्प खुले हुए हैं।
जब भी उन्हें किसी प्रोजेक्ट के लिए बजट की जरूरत होती है तो वे सरकार के सामने डिमांड रखते हैं और उनकी मांगें मान ली जाती हैं। ऐसे में कोई दिक्कत आने वाली नहीं। दरअसल, पीजीआई को समय-समय पर अतिरिक्त बजट भी मिलता रहता है। ऐसे में संस्थान के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है।
पीजीआई के इस समय कई प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं, जबकि एक प्रोजेक्ट लगभग तैयार हो चुका है। 250 बेड का हास्पिटल बनकर तैयार हो चुका है। मदर एंड चाइल्ड सेंटर, न्यूरोसाइंस सेंटर और जिराएटिक सेंटर का निर्माण होना बाकी है। चाइल्ड सेंटर और न्यूरोसाइंस सेंटर का बजट पहले से ही पास हो चुका है, इसलिए उसके निर्माण में कोई दिक्कत नहीं आने वाली।
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साल 2018-19 में कितना मिला था बजट
पीजीआई को साल 2018-19 में करीब 1474.98 करोड़ रुपये मिले। पहले बजट में उन्हें 1207 करोड़ आवंटित हुए। बाद में पीजीआई ने सरकार से 267 करोड़ रुपये की अतिरिक्त डिमांड की, जिसे भी सरकार ने मंजूर कर लिए। पीजीआई को बजट का एक बड़ा हिस्सा संस्थान के डॉक्टर व कर्मचारियों की सैलरी में जाता है।
पीजीआई हर साल करीब 150 करोड़ रुपये का बजट भी जेनरेट करता है। पीजीआई के अधिकारियों का कहना है कि वे अपने बजट से संतुष्ट हैं। यदि उन्हें जरूरत पड़ेगी तो वे बाद में फिर सरकार से बजट मांग लेंगे।
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जब भी उन्हें किसी प्रोजेक्ट के लिए बजट की जरूरत होती है तो वे सरकार के सामने डिमांड रखते हैं और उनकी मांगें मान ली जाती हैं। ऐसे में कोई दिक्कत आने वाली नहीं। दरअसल, पीजीआई को समय-समय पर अतिरिक्त बजट भी मिलता रहता है। ऐसे में संस्थान के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है।
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पीजीआई के इस समय कई प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं, जबकि एक प्रोजेक्ट लगभग तैयार हो चुका है। 250 बेड का हास्पिटल बनकर तैयार हो चुका है। मदर एंड चाइल्ड सेंटर, न्यूरोसाइंस सेंटर और जिराएटिक सेंटर का निर्माण होना बाकी है। चाइल्ड सेंटर और न्यूरोसाइंस सेंटर का बजट पहले से ही पास हो चुका है, इसलिए उसके निर्माण में कोई दिक्कत नहीं आने वाली।
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साल 2018-19 में कितना मिला था बजट
पीजीआई को साल 2018-19 में करीब 1474.98 करोड़ रुपये मिले। पहले बजट में उन्हें 1207 करोड़ आवंटित हुए। बाद में पीजीआई ने सरकार से 267 करोड़ रुपये की अतिरिक्त डिमांड की, जिसे भी सरकार ने मंजूर कर लिए। पीजीआई को बजट का एक बड़ा हिस्सा संस्थान के डॉक्टर व कर्मचारियों की सैलरी में जाता है।
पीजीआई हर साल करीब 150 करोड़ रुपये का बजट भी जेनरेट करता है। पीजीआई के अधिकारियों का कहना है कि वे अपने बजट से संतुष्ट हैं। यदि उन्हें जरूरत पड़ेगी तो वे बाद में फिर सरकार से बजट मांग लेंगे।