मोदी के 'यूथफुल और एनर्जेटिक' चंडीगढ़ के बजट में भारी कटौती, धीमे विकास को कहां से मिलेगी एनर्जी
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वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए केंद्र सरकार से यूटी प्रशासन ने 5883 करोड़ के बजट की डिमांड की थी लेकिन केंद्र सरकार ने इस बार भी बजट पर कैंची चलाते हुए यूटी को 4753.12 करोड़ रुपये का बजट अलॉट किया है। इसमें रेवन्यू हेड के 4351.49 करोड़ और कैपिटल हेड के रूप में 401.63 करोड़ मिले हैं।
ऐसे में केंद्र ने यूटी के बजट में 1130 करोड़ में कैंची चलाई है। वहीं, अगर बात सिटी के डेवलपमेंट की करें तो 2018-19 की तुलना में इस बार ओवरऑल कैपिटल बजट 505 करोड़ रुपये से 100 करोड़ घटाकर 401.63 करोड़ का कर दिया गया है। यह बीते चार साल में सबसे कम है। कैपिटल बजट घटने से साफ है कि सिटी में चल रहे डेवलपमेंट के प्रोजेक्टों को रफ्तार नहीं मिल पाएगी।
अगर बीते वित्तीय वर्ष 2018-19 की बात करें तो प्रशासन ने केंद्र से 5,300 करोड़ की मांग की थी लेकिन 4,625 करोड़ का बजट मिला था। वहीं साल 2017-18 में प्रशासन की ओर से 6151 करोड़ मांगे गए थे और 4312 करोड़ ही मिले थे। हालांकि आंकड़ों से साफ है कि बीते साल की अपेक्षा इस बार ओवरऑल बजट में 5.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो यूटी का आम बजट अंतरिम बजट जैसा ही है। एक्सपर्ट को जैसेउम्मीद थी कि आम चुनाव के बाद खास बजट देखने को मिलेगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट की समस्या से फिलहाल राहत नहीं
कैपिटल बजट की राशि का इस्तेमाल शहर में चल रहे प्रोजेक्टों को रफ्तार देने के लिए किया जाता है लेकिन बीते आम बजट की तुलना में इस साल कैपिटल बजट में बड़ा झटका लगा है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने कैपिटल बजट के तहत 575.50 करोड़ रुपये मांगे था लेकिन केंद्र ने कैंची चलाते हुए 401.63 करोड़ रुपये ही प्रशासन को दिए हैं। ऐसे में इस बार कैपिटल बजट करीब 173.87 करोड़ रुपये कम मिला है।
साल 2018-19 में चंडीगढ़ को कैपिटल बजट के तहत 505.03 करोड़ रुपये मिले थे। कैपिटल बजट कम होने का सीधा असर ट्रिब्यून फ्लाईओवर, यूटी सचिवालय, सीएचबी बिल्डिंग सहित उन प्रोजेक्ट पर पड़ेगा, जो निर्माणाधीन हैं या जिनकी प्लानिंग (मोनो या फिर मेट्रो रेल, ट्रांसपोर्ट सिस्टम) होनी है। ऐसे में सिटी में बड़ी समस्या बनी पब्लिक ट्रांसपोर्ट से अभी शहरवासियों को निजात नहीं मिल पाएगी।
शिक्षा में बढ़ा 4.20 करोड़ का बजट
इस बार शिक्षा के लिए बजट उत्साह जनक रहा है। पिछले साल 63.93 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जबकि इस बार 68.13 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें जूनियर और हायर एजुकेशन भी शामिल हैं। इस बर शिक्षा का बजट का बजट बढ़ा है।
इसका सीधा असर स्कूलों के आधुनिकरण और उसके इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर देखने को मिलेगा। जो बजट मिला है, उससे न्यू पालीटेक्निक कालेज और महिलाओं के लिए पालीटेक्निक, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, ई-कंटैंट, जिसमें डिजिटल टीचिंग, नए स्कूलों का निर्माण शामिल है।
5.62 करोड़ घटा हेल्थ का बजट
इस बार हेल्थ के बजट में भी कटौती की गई है। पिछली बार स्वास्थ्य विभाग को 80.93 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि इस बार 75.31 करोड़ रुपये ही दिए गए हैं। हेल्थ बजट गांव मलोया में 50 बेड का हास्पिटल, रीजनल ट्रॉमा सेंटर, मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट और सेक्टर 48 स्थित 100 बेड के हास्पिटल के लिए है।
सिटी में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को पिछले साल 34.06 करोड़ आवंटित हुए थे, इस बार 39.83 करोड़ मिले हैं। बजट बढ़ने के साथ ही नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद आसानी से हो जाएगी। इसके साथ ही सेक्टर-43 स्थित आईएसबीटी का विस्तार किया जाना है।
583 करोड़ का अतिरिक्त बजट मांगा था, केंद्र ने नहीं दिया
यूटी प्रशासन ने चंडीगढ़ में विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए अंतरिम बजट के बाद केंद्र सरकार से वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 583 करोड़ की अतिरिक्त मांग की थी, लेकिन केंद्र ने इसे देने से इनकार कर दिया। इसके अलावा बीते साल 5,300 करोड़ की डिमांड पर केंद्र ने चंडीगढ़ प्रशासन को 4,625 करोड़ दिए थे।
इस हिसाब से वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए प्रशासन के द्वारा केेंद्र से 5883 करोड़ की डिमांड की गई थी। अफसरों को उम्मीद थी कि कुछ न कुछ तो अतिरिक्त बजट मिल जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस संदर्भ में फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा का कहना है कि इस संदर्भ में केंद्र से अभी कोई जानकारी नहीं आई है। सूत्रों की मानें तो यूटी प्रशासन के लिए अंतरिम बजट जैसा ही सबकुछ रहा है। खास कुछ नया देखने को नहीं मिला है।
निगम के लिए मांगे थे 125 करोड़
अतिरिक्त बजट के तहत स्मार्ट सिटी के लिए 300 करोड़ लैंड एक्वायर के लिए 100 करोड़ और एमसी के लिए 125 करोड़ मांगे गए थे। लेकिन यह अतिरिक्त बजट प्रशासन को अभी तक नहीं मिला है।
ऐसे बढ़ा साल दर साल रेवेन्यू
साल 2017-18 2018-19 2019-20
रेवन्यू 3838.66 करोड़ 4006.88 करोड़ 4351.49 करोड़
कैपिटल 792.58 करोड़ 505.03 करोड़ 401.63 करोड़
कुल बजट 4628.24 करोड़ 4511.91 करोड़ 4753.12 करोड़