अयोग्य अधिकारी भर्ती कर दिए गए यहां

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 25 Nov 2013 08:50 AM IST
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नियमों को ताक पर रखकर पीजीआई में अधिकारियों की नियुक्ति का एक बड़ा मामला सामने आया है। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि संस्थान में तीन पदों पर अयोग्य लोगों की नियुक्ति की गई।
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इनमें दो पद अधिकारी स्तर के हैं और एक क्लर्क का। कमेटी की जांच रिपोर्ट से पीजीआई में हड़कंप मचा हुआ है।
इस कमेटी ने अपनी जांच में पाया कि वर्ष 2009 असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर और असिस्टेंट अकाउंट अफसर तथा 1998 में एलडीसी के रूप में जिन्हें नियुक्त किया गया उनके पास नियुक्ति की तय शर्त के अनुरूप अनुभव नहीं था। साथ ही कई अन्य पात्रता शर्तों को भी पूरा नहीं करते थे।
इंटरव्यू के दौरान इन्हें कई सर्टिफिकेट जमा कराने को कहा गया था, जो अब तक नहीं जमा कराए गए। साथ ही टेक्नीकल टेस्ट भी नहीं दिया। इसके बावजूद उनकी नियुक्तियां कर दी गई। फिलहाल कमेटी की ओर से तीनों को शो-काज नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।

सूत्रों ने बताया कि एक दो की ओर से जवाब दिया जा चुका है। यह मामला पीजीआई के एडहाक फ्रंट इम्पलायज यूनियन की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद सामने आया है।

लंबे समय से दबा था मामला
एडहाक फ्रंट इम्पलायज यूनियन के अनुसार मामले को लगातार दबाने का प्रयास हो रहा था। उन्होंने नियुक्ति में गड़बड़ियों को लेकर सबसे पहले पीजीआई के डायरेक्टर को पत्र लिखा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद यूनियन ने पंजाब एवं हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

यूनियन ने छह अधिकारियों के रिकार्ड व उनकी नियुक्ति की जांच करने का अनुरोध किया था। हाईकोर्ट ने इसकी जांच के लिए पीजीआई को कमेटी गठित करने का आदेश दिया था।

पीजीआई ने पल्मोनरी मेडिसिन के हेड आफ डिपार्टमेंट एसके जिंदल के नेतृत्व में जांच कमेटी बना कर उक्त सबके रिकार्ड की जांच करवाई।

तीन के रिकार्ड में गड़बड़ियां मिली

जांच कमेटी ने अपनी जांच में पाया कि पीजीआई के असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर दिनेश कुमार के पास इस पोस्ट के लिए पर्याप्त अनुभव नहीं था।

इस पद के लिए पात्र के पास सुपरवाइजरी अनुभव जरूरी था मगर दिनेश कुमार पंजाब वेयरिंगहाउस कार्पोरेशन में अनुबंध पर थे। सलेक्शन कमेटी ने उनसे रिकार्ड मांगा था, जिसे बाद में जमा कराने की बात कही गई थी मगर नियुक्ति के बाद भी रिकार्ड जमा नहीं कराया गया।

इसी तरह असिस्टेंट अकाउंट अफसर की पोस्ट के लिए किसी प्रतिष्ठित संस्थान में अकाउंट का दो साल का अनुभव जरूरी था। इस पोस्ट के लिए सुरेंद्र कुमार की पोस्टिंग दी गई।

जांच कमेटी ने पाया कि एक्सपीरियंस कॉलम के आगे सेलेक्शन कमेटी ने नहीं लिखा था, लेकिन इसके बावजूद सुरेंद्र कुमार की एससी कैटेगिरी में नियुक्ति दी गई।

कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि हो सकता है कि मौखिक रूप में सलेक्शन कमेटी व सुरेंद्र कुमार के बीच एक्सपीरियंस के मसले में पर कुछ बातचीत हुई हो, लेकिन इसका कोई लिखित रिकार्ड नहीं मिला। इसी तरह अपर डिवीजन क्लर्क के पद पर तैनात राजेश कुमार सक्सेना ने टाइपिंग टेस्ट पास नहीं किया था। इसके बावजूद सक्सेना की एलडीसी के पद पर नियुक्ति कर दी गई।
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