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पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव- केंद्र सरकार दबाव बनाए, जलियांवाला कांड के लिए ब्रिटेन मांगे माफी
Wed, 20 Feb 2019 11:19 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 20 Feb 2019 11:19 PM IST
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जलियांवाला बाग हत्याकांड के शताब्दी वर्ष के दौरान इसके शहीदों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि केंद्र सरकार ब्रिटेन पर दबाव बनाए कि वह जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए भारतवासियों से माफी मांगे।
बुधवार को सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के बाद स्पीकर ने सदस्यों को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस आगे शुरू करने की अनुमति दी। इसी बीच संसदीय मामलों के मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के संबंध में प्रस्ताव पेश किया। इसे सभी सदस्यों ने ध्वनिमत से पारित कर दिया।
ब्रह्म मोहिंद्रा ने कहा कि ब्रिटिश साम्राज्य के रौलेट एक्ट के खिलाफ 13 अप्रैल, 1919 को वैसाखी वाले दिन जलियांवाला बाग में एकत्रित हुए बेकसूर लोगों पर साजिश के तहत कायरतापूर्ण हमला किया गया था। मंत्री ने कहा कि हालांकि उस समय भी ब्रिटिश साम्राज्य को इस गैर जिम्मेदाराना कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए जनरल डायर को फौज से समयपूर्व सेवामुक्त कर दिया था। वहीं हमले के विरोध में नोबेल पुरस्कार विजेता रबीन्द्रनाथ टैगोर ने इसके विरोध में नाईटहुड का खिताब वापस कर दिया था।
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ब्रह्म मोहिंदरा ने स्पीकर से इस प्रस्ताव को सदन में मौखिक मत के जरिए पेश करने का आग्रह करते हुए कहा कि भारत के निवासियों और विदेशों में बसते भारतीय समुदाय के जख्मों पर मरहम लगाने का यह उपयुक्त समय है। सभी सदस्यों ने इस पर सहमति जताते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया।
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बुधवार को सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के बाद स्पीकर ने सदस्यों को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस आगे शुरू करने की अनुमति दी। इसी बीच संसदीय मामलों के मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के संबंध में प्रस्ताव पेश किया। इसे सभी सदस्यों ने ध्वनिमत से पारित कर दिया।
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ब्रह्म मोहिंद्रा ने कहा कि ब्रिटिश साम्राज्य के रौलेट एक्ट के खिलाफ 13 अप्रैल, 1919 को वैसाखी वाले दिन जलियांवाला बाग में एकत्रित हुए बेकसूर लोगों पर साजिश के तहत कायरतापूर्ण हमला किया गया था। मंत्री ने कहा कि हालांकि उस समय भी ब्रिटिश साम्राज्य को इस गैर जिम्मेदाराना कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए जनरल डायर को फौज से समयपूर्व सेवामुक्त कर दिया था। वहीं हमले के विरोध में नोबेल पुरस्कार विजेता रबीन्द्रनाथ टैगोर ने इसके विरोध में नाईटहुड का खिताब वापस कर दिया था।
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ब्रह्म मोहिंदरा ने स्पीकर से इस प्रस्ताव को सदन में मौखिक मत के जरिए पेश करने का आग्रह करते हुए कहा कि भारत के निवासियों और विदेशों में बसते भारतीय समुदाय के जख्मों पर मरहम लगाने का यह उपयुक्त समय है। सभी सदस्यों ने इस पर सहमति जताते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया।
ट्रूडो कामागाटा मारू पर माफी मांग सकते हैं तो ब्रिटेन क्यों नहीं : कैप्टन
राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जलियांवाला बाग कांड का जिक्र किया और विधानसभा द्वारा पारित किए प्रस्ताव की सराहना की। उन्होंने कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूदो जब कामागाटा मारू घटना को लेकर माफी मांग सकते हैं तो ब्रिटिश सरकार जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए क्यों नहीं मांग सकती।
उन्होंने सदन को यह भी जानकारी दी कि एक तरफ पंजाब विधानसभा में इस विषय पर प्रस्ताव पारित किया गया है तो उधर ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भी इस घटना की चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री ने विधायक हरदयाल सिंह कंबोज के उस प्रस्ताव पर भी सहमति जताई जिसमें मांग की गई थी कि पंजाबी यूनिवर्सिटी में शहीद उधम सिंह के सम्मान में चेयर स्थापित की जाए।
उन्होंने सदन को यह भी जानकारी दी कि एक तरफ पंजाब विधानसभा में इस विषय पर प्रस्ताव पारित किया गया है तो उधर ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भी इस घटना की चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री ने विधायक हरदयाल सिंह कंबोज के उस प्रस्ताव पर भी सहमति जताई जिसमें मांग की गई थी कि पंजाबी यूनिवर्सिटी में शहीद उधम सिंह के सम्मान में चेयर स्थापित की जाए।