मोहाली के दो सपूत बने सेना में अधिकारी, करण को अपने पिता की असम रेजिमेंट में मिला कमीशन
- एएफपीआई मोहाली से ट्रेनिंग लेने वाले पंजाब के चार नौजवान आईएमए की पासिंग परेड में शामिल
- कोविड-19 के चलते रैंक पैड नहीं लगा पाए परिजन, सोशल मीडिया पर देखा लाइव प्रसारण
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कोरोना संकट के बीच मोहाली के लिए गर्व का एक और मौका आया है। एएफपीआई से ट्रेनिंग लेकर एनडीए और फिर आईएमए पहुंचे 4 कैडेट्स शनिवार को पासिंग आउट परेड के बाद भारतीय सेना में बतौर अधिकारी शामिल हुए हैं। इनमें से दो नौजवान मोहाली के रहने वाले हैं। वहीं कोविड-19 के कारण इस बार आईएमए पासिंग आउट परेड में परिजन अपने सपूतों को रैंक पैड नहीं लगा पाए। हालांकि उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण देखा। परेड में 423 अधिकारी शामिल हुए।
मोहाली के दो नौजवान 4 साल पहले महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्स प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग लेकर एनडीए के लिए चयनित हुए थे। शनिवार को इंडियन मिलिट्री अकादमी की पासिंग आउट परेड में इन दोनों के साथ दो और नौजवान अधिकारी बने। मोहाली के सेक्टर-68 दर्शन विहार में रहने वाले ले. कर्नल डीएस चीमा के बेटे लेफ्टिनेंट करण सिंह चीमा को अपने पिता की ही असम रेजिमेंट में कमीशन मिला है।
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मोहाली के फेज-3बी2 में रहने वाले बलविंदर सिंह के बेटे लेफ्टिनेंट सहगुरबाज सिंह को आर्टलरी कोर की मीडियम रेजिमेंट-101 में कमीशन मिला है। इसी तरह मुकेरियां जिला होशियारपुर के रहने वाले लेफ्टिनेंट सिमरनजीत सिंह को भी अपने पिता की ही फर्स्ट हार्स रेजिमेंट में कमीशन मिला है। ले. सिमरनजीत सिंह के पिता इसी रेजिमेंट से बतौर जेसीओ रिटायर हुए हैं। यह दोनों रेजिमेंट आर्म्ड कोर की हैं। फरीदकोट के गांव सरावा के रहने वाले लेफ्टिनेंट गुरलाल सिंह को आर्टलरी कोर की 12 फील्ड रेजिमेंट में कमीशन मिला है।
कोरोना ने तोड़ी बरसों पुरानी परंपरा, परेड में नहीं पहुंच पाए परिजन
कोराना से बरसों से चली आ रही परंपरा को भी तोड़ दिया। हर बार नए सैन्य अधिकारियों की वर्दी पर उनके परिजन रैंक पैड लगाते हैं। लेकिन इस बार परिजन और रिश्तेदार इस समागम में शामिल नहीं हो पाए। आईएमए ने परिजनों तक पासिंग आउट परेड का प्रसारण सोशल मीडिया के जरिए पहुंचाया। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार अपनी यूनिट्स ज्वाइन करने से पहले इन नए अधिकारियों को अवकाश भी नहीं मिल पाएगा।
रैंक पैड नहीं लगा पाए तो क्या... भरपूर खुशी मिली है: परिजन
अपने सपूत के कंधों पर रैंक पैड लगा उन्हें सेना में अधिकारी के तौर पर शामिल होते देखना गर्व का क्षण होता है। लेकिन कोरोना के चलते इस बार ऐसा नहीं हुआ। हमारे लिए यही गर्व की बात है कि सेना के भावी अधिकारियों की स्वास्थ्य व सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया। यह कहना है ले. सहगुरबाज सिंह की मां हरजोत कौर का।
हरजोत कौर हुडको में ज्वाइंट जनरल मैनेजर हैं और पिता बलविंदर सिंह टेलीकॉम डिपार्टमेंट में डिप्टी डायरेक्टर जनरल हैं। उनकी बहन जपजी मेहरा डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस में साइंटिस्ट हैं। जपजी भी अपने भाई की कामयाबी से खुश हैं। हरजोत कौर बताती हैं कि हमने लाइव पासिंग आउट परेड देखी। अपने बेटे के सपनों को पूरा होते देख माता-पिता गर्व महसूस कर रहे हैं।
2011 में शुरू हुआ था इंस्टीट्यूट
वर्ष 2011 में महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्स प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट की शुरूआत हुई थी। जिसका पहला बैच वर्ष 2013 में पास आउट हुआ। पंजाब सरकार ने इसकी स्थापना इसलिए की थी कि पंजाब के ज्यादा से ज्यादा नौजवान सही ट्रेनिंग लेकर एनडीए में दाखिल हो सकें और भारतीय सेना में अधिकारी बनें।
अभी तक यहां से 137 स्टूडेंट्स एनडीए में दाखिल हो चुके हैं, जिनमें से शुरूआती 4 बैच के 63 स्टूडेंट्स भारतीय सेना में बतौर अधिकारी शामिल हैं। यह जानकारी देते हुए इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर रिटा. मेजर जनरल जीएस ग्रेवाल ने चारों अधिकारियों के उज्जवल भविष्य की कामना की।