दो नन्हे 'दूत' बचा गए पांच जिंदगियां, परिजनों को अंधेरी जिंदगी में रोशनी भरने की खुशी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीजीआई में भर्ती दो बच्चों ने दुनिया से जाते हुए पांच लोगों की जिंदगियों में खुशियां भर दीं। उनकी मौत के बाद परिजनों की अनुमति से दोनों बच्चों की दोनों किडनी और एक बच्चे का हार्ट पीजीआई में भर्ती मरीज को ट्रांसप्लांट किया गया है। अंगदान के बाद परिजनों का कहना है कि उन्हें अपने नन्हें फरिश्तों को खोने का दुख तो बहुत है लेकिन खुशी और संतोष इस बात का है कि उन्होंने दुनिया से जाते हुए किसी की अंधेरी जिंदगी में रोशनी भर दिया।
पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने बताया कि खरड़ निवासी 10 साल की एक बच्ची अपने घर में खेलते हुए गिरकर चोटिल हो गई थी। उसके सिर पर गंभीर चोट आई थी। उसे 14 जुलाई को जीएमसीएच-32 में भर्ती कराया गया, जिसे वहां से पीजीआई रेफर कर दिया गया। 24 जुलाई को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
उसके बाद परिजनों की अनुमति के बाद बच्ची की दोनों किडनी और हार्ट को पीजीआई में भर्ती 3 मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दिया गया। बच्ची के परिजनों ने अंगदान को गुप्त दान बताते हुए उसके बारे में कोई भी जानकारी सामने लाने से मना कर दिया। प्रो. जगतराम का कहना है कि ऐसे परिजनों की ही बदौलत अंगदान के इंतजार में प्रतीक्षारत हजारों मरीजों के जीवन में आशा की किरण जग रही है।
रीनल ट्रांसप्लांट के प्रमुख डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि दूसरा बच्चा रोपड़ (रूपनगर) निवासी 13 साल का अमनदीप था, जिसे हिमोफीलिया नामक बीमारी थी। 16 जुलाई को उसे गंभीर स्थिति में पीजीआई में भर्ती किया गया था। इलाज के दौरान 22 जुलाई को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। पिता प्रताप सिंह की अनुमति के बाद उसकी दोनों किडनी पीजीआई में भर्ती किडनी के मरीजों को प्रत्यारोपित कर दी गई हैं।
प्रताप सिंह का कहना है कि उनका बेटा हिमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने के बावजूद रक्तदान से मिलने वाले खून के बल पर जिंदा था, इसलिए उन्होंने उसका अंगदान कर दान की अवधारणा को कायम रखने में सहयोग किया।
लॉकडाउन से अब तक हुए 9 ट्रांसप्लांट
रोटो के नोडल ऑफिसर डॉ. विपिन कौशल ने बताया कि कोरोना की वजह से लॉकडाउन के बाद से अब तक पीजीआई में 9 ऑर्गन ट्रांसप्लांट किया जा चुका है। इनमें से 8 लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट की गई है, जबकि एक मरीज को हार्ट प्रत्यारोपित किया गया है। पीजीआई में यह 6वां हार्ट ट्रांसप्लांट है। डॉ. कौशल ने बताया कि करोना के दौरान संक्रमण से बचाव के सारे मानकों का पालन करते हुए अंगदान की प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को अंग प्रत्यारोपित कर जीवन दान देने का प्रयास किया गया है, जो सफल भी रहा है।