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हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र: सरकार लाएगी 7255 करोड़ का अनुपूरक बजट, आज सदन में होगी चर्चा

Mon, 31 Aug 2026 12:37 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: Vijay Singh Pundir Updated Mon, 31 Aug 2026 12:37 AM IST
सार

सदन की कार्यवाही सोमवार दोपहर दो बजे शुरू होगी। प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद कांग्रेस के 17 विधायक हरियाणा कौशल रोजगार निगम में संविदा भर्ती में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री अनुपूरक बजट मांगें पेश करेंगे और इन पर चर्चा व मतदान होगा।

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Haryana Monsoon Session Government to present supplementary budget; discussion to be held in the House today
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को सरकार वर्ष 2026-27 की पहली अनुपूरक बजट मांगें सदन में पेश करेगी। वित्त मंत्री के तौर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 7,255.42 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बजट मांगें रखेंगे। इनमें 5,440.45 करोड़ रुपये राजस्व खर्च और 1,814.97 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए प्रस्तावित हैं। अनुपूरक बजट मांगों पर सदन में चर्चा के बाद मतदान होगा।

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सरकार ने कुल 15 विभागों के लिए अतिरिक्त राशि मांगी है। इनमें ऊर्जा, उद्योग एवं वाणिज्य, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और सिंचाई विभागों के लिए 1,441.54 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसमें 1,341.53 करोड़ रुपये राजस्व और 100.01 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं।

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सदन की कार्यवाही सोमवार दोपहर दो बजे शुरू होगी। प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद कांग्रेस के 17 विधायक हरियाणा कौशल रोजगार निगम में संविदा भर्ती में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री अनुपूरक बजट मांगें पेश करेंगे और इन पर चर्चा व मतदान होगा।

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शहरी और ग्रामीण विकास के लिए सबसे अधिक राशि
शहरी विकास, नगर निकाय, पंचायत, ग्रामीण विकास और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी से जुड़े विभागों के लिए कुल 1,797.08 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इसमें 1,356.74 करोड़ रुपये राजस्व और 440.34 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं। नगर नियोजन, शहरी विकास और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े विभिन्न कार्यों पर यह राशि खर्च की जाएगी। वहीं, वित्त विभाग के लिए 1,005.03 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांग रखी गई है। यह राशि वित्त, ऋण नियंत्रण, आपूर्ति और सांख्यिकी से जुड़े अतिरिक्त खर्चों को पूरा करने के लिए मांगी गई है।

सहकारिता और खाद्य आपूर्ति के लिए 1,104.25 करोड़
सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों से जुड़े विभागों के लिए 1,104.25 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। इसमें 904.25 करोड़ रुपये राजस्व और 200 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए प्रस्तावित हैं।

गृह, जेल और न्याय प्रशासन से जुड़े विभागों के लिए कुल 665.18 करोड़ रुपये की मांग है। इसमें 323.67 करोड़ रुपये राजस्व और 341.51 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं। यह राशि गृह रक्षक, नागरिक सुरक्षा, जेल, उच्च न्यायालय, अभियोजन और कानूनी सेवाओं से जुड़े खर्चों में इस्तेमाल होगी।

अन्य विभागों को भी अतिरिक्त बजट
लोक निर्माण, परिवहन और नागरिक विमानन के लिए 882.18 करोड़ रुपये, कृषि एवं संबंधित विभागों के लिए 110.48 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य के लिए 176.57 करोड़ रुपये और शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास के लिए 40.53 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। इसके अलावा खेल, विरासत और पर्यटन के लिए 10 करोड़ रुपये, श्रम एवं कौशल विकास के लिए 9.01 करोड़ और सामाजिक न्याय एवं कल्याण विभाग के लिए 12.86 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांग रखी गई है।

सदन में नौ नए विधेयक पेश करेगी सरकार
सरकार सदन में नौ नए विधेयक भी पेश करेगी। इनमें हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, हरियाणा स्थानीय लेखा परीक्षा विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, हरियाणा राज्य महिला आयोग संशोधन विधेयक, माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक, हरियाणा पंचायती राज संशोधन विधेयक और हरियाणा राज्य फिजियोथेरेपी परिषद निरसन विधेयक प्रमुख हैं। इसके अलावा शामलात भूमि और विधि अधिकारियों से संबंधित संशोधन विधेयक भी सदन में रखे जाएंगे। अग्निशमन कानून में बदलाव व शहरी विकास के पुराने प्रावधान हटाने के लिए भी संशोधित विधेयक पेश होंगे।

चार विधायकों पर विचार और पारित करने की प्रक्रिया
चार विधेयकों पर सदन में विचार कर उन्हें पारित कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। इनमें हरियाणा न्यायालय संशोधन विधेयक, हरियाणा नगरपालिका संशोधन विधेयक, हरियाणा नगर निगम संशोधन विधेयक और बाबा खाटू श्याम चुलकाना धाम तीर्थ विधेयक शामिल हैं।

छोटे जल प्रदूषण अपराध होंगे अपराध की श्रेणी से बाहर
सरकार जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को हरियाणा में लागू करने का प्रस्ताव रखेगी। इसके तहत छोटे जल प्रदूषण अपराधों को आपराधिक श्रेणी से बाहर करने और दंड व्यवस्था को अधिक तर्कसंगत बनाने का प्रावधान है।

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